Mumbai बम धमाका: विशेष कोर्ट ने आरोपी जैनुल शेख को जमानत दी, 15 साल से जेल में था बंद
मुंबई की एक विशेष अदालत ने 2011 के सिलसिलेवार बम विस्फोट मामले में एक आरोपी को करीब 15 साल से जेल में रहने और पहले रिहा किए जा चुके सह-आरोपियों के साथ समानता के सिद्धांत को आधार बनाते हुए बुधवार को जमानत दे दी। महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण आर. नवांदर ने कहा कि अदालत इस बात से ‘‘अवगत है कि आरोप बेहद गंभीर’’ हैं और उसने ‘‘अभियोजन के साक्ष्यों के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त करने’’ से परहेज किया है। न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी जैनुल शेख की याचिका पर ‘‘विशेष रूप से लंबे समय तक हिरासत में रखे जाने के संवैधानिक आधार और पहले ही जमानत पर रिहा किए जा चुके सह-आरोपियों के साथ समानता के सिद्धांत’’ के आधार पर विचार किया गया।
शेख 2012 से न्यायिक हिरासत में है। तेरह जुलाई, 2011 को शाम 6.54 बजे दक्षिण मुंबई के ओपेरा हाउस के पास प्रसाद चैंबर्स के बाहर एक शक्तिशाली बम विस्फोट हुआ था। यह शाम के व्यस्त समय में हुए तीन समन्वित सिलसिलेवार विस्फोटों का हिस्सा था।
जवेरी बाजार और दादर में भी विस्फोट हुए थे। इन धमाकों में 27 लोगों की मौत हुई थी और 130 से अधिक लोग घायल हुए थे। आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता वहाब खान ने मुख्य रूप से समानता और लंबे समय से जेल में रहने के आधार पर जमानत देने का अनुरोध किया।
खान ने कहा कि विस्फोटों में आरोपी की संलिप्तता साबित करने वाला कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। विशेष लोक अभियोजक अजय मिसार ने जैनुल शेख की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उसके खिलाफ कबूलनामे और सीसीटीवी फुटेज सहित पर्याप्त सामग्री मौजूद है। मिसार ने यह भी बताया कि मुकदमे में काफी प्रगति हुई है और अब तक 227 गवाहों की गवाही हो चुकी है।
न्यायाधीश नवांदर ने कहा कि मुकदमे की प्रगति की सराहना की जानी चाहिए। अदालत ने कहा, ‘‘हालांकि, केवल यह परिस्थिति इस तथ्य को समाप्त नहीं कर सकती कि आवेदक विचाराधीन कैदी के रूप में करीब 15 साल की कैद पहले ही भुगत चुका है।’’ जमानत देते हुए अदालत ने आरोपी को एक लाख रुपये का मुचलका और इतनी ही राशि की एक या अधिक सक्षम स्थानीय जमानतदारों की जमानत पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि आरोपी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अभियोजन के साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगा और किसी गवाह को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगा।
जमानत की एक अन्य शर्त के तहत आरोपी को पूर्व अनुमति के बिना अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं जाने का निर्देश दिया गया है।
Noida Police ने फर्जी GST अफसर बनकर 29 लाख रुपये वसूलने वाले 5 लोगों को पकड़ा
उत्तर प्रदेश के नोएडा में जीएसटी अधिकारी होने का दावा कर एक जीएसटी सलाहकार से 29 लाख रुपये की रंगदारी वसूलने के आरोप में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। मध्य नोएडा के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया, ‘‘बिसरख पुलिस ने वसूली गई पूरी रकम बरामद कर ली है, जिसमें 24.50 लाख रुपये नकद तथा 4.50 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण शामिल हैं।’’ डीसीपी के अनुसार, यह घटना 20 जुलाई की है।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सलाहकार अपनी कार में पालतू कुत्ते और लैपटॉप के साथ जा रहा था। उन्होंने बताया, ‘‘आरोपियों ने एस एस्पायर सोसायटी के पास अपनी कार से रास्ता रोककर उसकी गाड़ी को रुकवाया। जीएसटी अधिकारी बनकर वे उसकी कार में घुस गए और दो फर्मों के कथित फर्जी ई-वे बिल के मामले में उसे धमकाते हुए अपने साथ ले गए।’’ पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने जीएसटी मामले में जेल भेजने की धमकी देकर 29 लाख रुपये की मांग की।
इसके बाद पीड़ित के भाई के जरिए नकद रकम मंगाई गई। रकम मिलने के बाद आरोपी पीड़ित और उसकी कार को छोड़कर फरार हो गए। जांच में सामने आया कि कथित मुख्य आरोपी कशिश चौहान उर्फ ईशु पीड़ित को पहले से जानता था।
दोनों की वर्ष 2021 से जान-पहचान थी और चौहान को पता था कि पीड़ित जीएसटी संबंधी काम करता है। पुलिस के अनुसार, इसी जानकारी का इस्तेमाल उसे निशाना बनाने के लिए किया गया। पुलिस ने बताया कि वारदात को अंजाम देते समय आरोपियों ने पुलिस उपनिरीक्षक की वर्दी और दिल्ली सिविल डिफेंस की वर्दी का इस्तेमाल किया था।
वारदात में इस्तेमाल दो कार और सात मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, चौहान दिल्ली के द्वारका स्थित यशोभूमि में डीसीपीओ (ड्राइवर-कम-पंप ऑपरेटर) के पद पर कार्यरत है, जबकि आरोपी राजेश पवार दिल्ली सिविल डिफेंस से जुड़ा है। विवेक शर्मा एस्कॉर्ट, मानेसर और बल्लभगढ़ में काम कर चुका है।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि घटना में शामिल आरोपियों में से कोई भी पुलिसकर्मी नहीं है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कशिश चौहान, राजेश पवार, विवेक शर्मा, अंकित शाही और अंशुल के रूप में हुई है। डीसीपी ने बताया कि निगरानी, सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय खुफिया जानकारी की मदद से आरोपियों की पहचान की गई और उन्हें जलपुर रोड स्थित इस्कॉन मंदिर के पास से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने 29 लाख रुपये की पूरी रकम के अलावा वारदात में इस्तेमाल दोनों कार, पुलिस उपनिरीक्षक और दिल्ली सिविल डिफेंस की वर्दियां तथा सात मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। पुलिस आरोपियों के आपराधिक इतिहास का सत्यापन कर रही है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi








