चेन्नई सुपर किंग्स के खेमे में इन दिनों बदलाव का दौर चल रहा है। लंबे समय तक टीम की कमान संभालने वाले स्टीफन फ्लेमिंग से रिश्ता खत्म होने के बाद अब फ्रेंचाइजी नए कोच की तलाश में है। इसी बीच पूर्व भारतीय ऑलराउंडर रविचंद्रन अश्विन ने एक ऐसा नाम सामने रखा है, जिसने क्रिकेट जगत में चर्चा बढ़ा दी है। अश्विन के मुताबिक पूर्व इंग्लैंड कप्तान इयोन मोर्गन चेन्नई सुपर किंग्स के अगले कोच बन सकते हैं।
अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा कि मोर्गन का नाम नए कोच के लिए काफी मजबूती से चर्चा में है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी यह तय नहीं है कि मोर्गन इसी साल जिम्मेदारी संभालेंगे या टीम के साथ बाद में जुड़ेंगे। उनके मुताबिक एक संभावना यह है कि कोई दूसरा व्यक्ति पहले टीम का ढांचा तैयार करे और मोर्गन बाद में जिम्मेदारी संभालें।
गौरतलब है कि इयोन मोर्गन ने 2023 में पेशेवर क्रिकेट से दूरी बना ली थी। इसके बाद वह मुख्य रूप से क्रिकेट विशेषज्ञ और कमेंटेटर के तौर पर नजर आए हैं। उन्होंने अभी तक किसी अंतरराष्ट्रीय या फ्रेंचाइजी टीम के मुख्य कोच की जिम्मेदारी नहीं संभाली है। इसके बावजूद सीमित ओवरों के क्रिकेट की उनकी समझ को काफी मजबूत माना जाता है।
मोर्गन ने इंग्लैंड की सफेद गेंद वाली टीम में बड़ा बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाई थी। उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने 2019 में पहली बार एकदिवसीय विश्व कप का खिताब जीता था। आक्रामक सोच, खिलाड़ियों से प्रदर्शन निकालने की क्षमता और मैदान पर तेज फैसले लेने के लिए उनकी पहचान रही है। यही वजह है कि कोचिंग का अनुभव नहीं होने के बावजूद उन्हें इस भूमिका के लिए गंभीर उम्मीदवार माना जा रहा है।
बता दें कि चेन्नई सुपर किंग्स पिछले कुछ सत्रों में अपने पुराने स्तर का प्रदर्शन नहीं कर सकी है। पांच बार की चैंपियन टीम के लिए हाल के दो सत्र निराशाजनक रहे हैं। ऐसे में फ्लेमिंग के जाने को टीम में नए तरीके से बदलाव की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
इस बदलाव में महेंद्र सिंह धोनी की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहने वाली है। अश्विन का मानना है कि कम से कम अगले एक साल तक धोनी टीम को दिशा देने में अहम योगदान दे सकते हैं। उनके मुताबिक अगले बड़े बदलाव से पहले धोनी के नेतृत्व में टीम का नया ढांचा तैयार किया जा सकता है।
मौजूदा जानकारी के अनुसार, अगले बड़े खिलाड़ियों के चयन से पहले केवल एक साल का समय बचा है। ऐसे में कोच की नियुक्ति का समय भी महत्वपूर्ण होगा। अश्विन का मानना है कि धोनी के अनुभव का इस्तेमाल करते हुए टीम इस बदलाव को बेहतर तरीके से संभाल सकती है।
स्टीफन फ्लेमिंग का लंबा दौर खत्म होने के बाद चेन्नई सुपर किंग्स अब एक नए अध्याय की ओर बढ़ रही है। इयोन मोर्गन तुरंत जिम्मेदारी संभालते हैं या बाद में टीम से जुड़ते हैं, यह आने वाले समय में साफ होगा, लेकिन अश्विन के बयान ने सीएसके के नए कोच को लेकर चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया हैं।
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भारतीय क्रिकेट टीम के लिए सीमित ओवरों में तस्वीर भले ही मजबूत नजर आती हो, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में गौतम गंभीर के कार्यकाल का रिकॉर्ड चिंता बढ़ाने वाला है। गंभीर के मुख्य कोच बनने के बाद भारत ने 19 टेस्ट खेले हैं, जिनमें सात में जीत मिली, दस में हार हुई और दो मुकाबले बराबरी पर खत्म हुए हैं। अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट को इस आंकड़े में शामिल नहीं किया गया है।
गौरतलब है कि गंभीर के कार्यकाल में भारत को दो बड़ी घरेलू श्रृंखलाओं में करारी हार झेलनी पड़ी है। 2024 में न्यूजीलैंड ने भारत को तीन-शून्य से हराया था, जबकि 2025 में दक्षिण अफ्रीका ने दो-शून्य से घरेलू श्रृंखला अपने नाम की। इसके अलावा भारत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर श्रृंखला 1-3 से हार गया था और इंग्लैंड में 2025 की श्रृंखला 2-2 से बराबर रही थी।
हालांकि सीमित ओवरों में भारत का प्रदर्शन इसके मुकाबले काफी बेहतर रहा है। भारत ने 2024 से 2026 के टी-20 विश्व कप तक कोई टी-20 श्रृंखला नहीं गंवाई थी। इसके बाद सूर्यकुमार यादव की जगह श्रेयस अय्यर के कप्तान बनने के बाद आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 श्रृंखलाओं में भारत को हार मिली। एकदिवसीय क्रिकेट में भी भारत ने 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी।
टेस्ट में कमजोर प्रदर्शन के बीच अलग-अलग प्रारूपों के लिए अलग कोच रखने की चर्चा भी उठती रही है। हालांकि पूर्व भारतीय लेग स्पिनर अमित मिश्रा ने गौतम गंभीर का समर्थन किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक साक्षात्कार में मिश्रा ने कहा कि खिलाड़ियों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और किसी कोच को काम करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
मिश्रा के मुताबिक गंभीर को लाल गेंद वाले क्रिकेट में कुछ और समय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि टीम में कई नए खिलाड़ी हैं और उन्हें परिस्थितियों को समझने तथा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के हिसाब से ढलने में समय लगता है। उनके अनुसार कोच योजना बना सकता है और खिलाड़ियों को मार्गदर्शन दे सकता है, लेकिन मैदान पर योजना को लागू करने की जिम्मेदारी खिलाड़ियों की होती है।
बता दें कि गंभीर के कार्यकाल में बल्लेबाजी क्रम में लगातार बदलाव भी चर्चा का विषय रहा है। खासकर तीसरे नंबर पर करुण नायर, साई सुदर्शन, देवदत्त पडिक्कल और वॉशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ियों को आजमाया गया है। मिश्रा का मानना है कि टीम प्रबंधन खिलाड़ियों को नेट अभ्यास में देखकर परिस्थितियों के हिसाब से सर्वश्रेष्ठ संयोजन तैयार करने की कोशिश कर रहा है।
मौजूदा जानकारी के अनुसार, भारत अब 15 अगस्त से श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट की श्रृंखला खेलेगा। इसके बाद न्यूजीलैंड में दो टेस्ट और 2027 की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट की महत्वपूर्ण बॉर्डर-गावस्कर श्रृंखला होनी है। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में 48.15 प्रतिशत अंकों के साथ भारत पांचवें स्थान पर है और लगातार दूसरी बार फाइनल की दौड़ से बाहर होने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में आने वाली टेस्ट श्रृंखलाएं गौतम गंभीर और भारतीय टीम के लिए बेहद अहम रहने वाली हैं।
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