Noida Police ने फर्जी GST अफसर बनकर 29 लाख रुपये वसूलने वाले 5 लोगों को पकड़ा
उत्तर प्रदेश के नोएडा में जीएसटी अधिकारी होने का दावा कर एक जीएसटी सलाहकार से 29 लाख रुपये की रंगदारी वसूलने के आरोप में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। मध्य नोएडा के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया, ‘‘बिसरख पुलिस ने वसूली गई पूरी रकम बरामद कर ली है, जिसमें 24.50 लाख रुपये नकद तथा 4.50 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण शामिल हैं।’’ डीसीपी के अनुसार, यह घटना 20 जुलाई की है।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सलाहकार अपनी कार में पालतू कुत्ते और लैपटॉप के साथ जा रहा था। उन्होंने बताया, ‘‘आरोपियों ने एस एस्पायर सोसायटी के पास अपनी कार से रास्ता रोककर उसकी गाड़ी को रुकवाया। जीएसटी अधिकारी बनकर वे उसकी कार में घुस गए और दो फर्मों के कथित फर्जी ई-वे बिल के मामले में उसे धमकाते हुए अपने साथ ले गए।’’ पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने जीएसटी मामले में जेल भेजने की धमकी देकर 29 लाख रुपये की मांग की।
इसके बाद पीड़ित के भाई के जरिए नकद रकम मंगाई गई। रकम मिलने के बाद आरोपी पीड़ित और उसकी कार को छोड़कर फरार हो गए। जांच में सामने आया कि कथित मुख्य आरोपी कशिश चौहान उर्फ ईशु पीड़ित को पहले से जानता था।
दोनों की वर्ष 2021 से जान-पहचान थी और चौहान को पता था कि पीड़ित जीएसटी संबंधी काम करता है। पुलिस के अनुसार, इसी जानकारी का इस्तेमाल उसे निशाना बनाने के लिए किया गया। पुलिस ने बताया कि वारदात को अंजाम देते समय आरोपियों ने पुलिस उपनिरीक्षक की वर्दी और दिल्ली सिविल डिफेंस की वर्दी का इस्तेमाल किया था।
वारदात में इस्तेमाल दो कार और सात मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, चौहान दिल्ली के द्वारका स्थित यशोभूमि में डीसीपीओ (ड्राइवर-कम-पंप ऑपरेटर) के पद पर कार्यरत है, जबकि आरोपी राजेश पवार दिल्ली सिविल डिफेंस से जुड़ा है। विवेक शर्मा एस्कॉर्ट, मानेसर और बल्लभगढ़ में काम कर चुका है।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि घटना में शामिल आरोपियों में से कोई भी पुलिसकर्मी नहीं है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कशिश चौहान, राजेश पवार, विवेक शर्मा, अंकित शाही और अंशुल के रूप में हुई है। डीसीपी ने बताया कि निगरानी, सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय खुफिया जानकारी की मदद से आरोपियों की पहचान की गई और उन्हें जलपुर रोड स्थित इस्कॉन मंदिर के पास से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने 29 लाख रुपये की पूरी रकम के अलावा वारदात में इस्तेमाल दोनों कार, पुलिस उपनिरीक्षक और दिल्ली सिविल डिफेंस की वर्दियां तथा सात मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। पुलिस आरोपियों के आपराधिक इतिहास का सत्यापन कर रही है।
West Bengal STF ने 2 संदिग्धों को पकड़ा, पाकिस्तानी नागरिक राणा रऊफ 14 दिन की रिमांड पर
पश्चिम बंगाल पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने भारत-बांग्लादेश सीमा के पास से दो लोगों को गिरफ्तार किया है जिनमें एक संदिग्ध पाकिस्तानी नागरिक भी शामिल है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान के फैसलाबाद निवासी राणा रऊफ उर्फ वहाब आलम को मंगलवार देर रात उत्तर 24 परगना जिले के हाबरा से गिरफ्तार किया गया।
उन्होंने बताया कि खुफिया सूचना के आधार पर एसटीएफ के कर्मियों ने बनगांव के पास हाबरा में तलाशी अभियान चलाया और रऊफ को पकड़ लिया। अधिकारियों ने बताया कि जांचकर्ताओं को संदेह है कि रऊफ के पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंध हैं और वे भारत में उसकी गतिविधियों, संपर्कों और आवाजाही की जांच कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मंगलवार को ही कोलकाता के टॉपसिया इलाके से गिरफ्तार किए गए दूसरे व्यक्ति मोहम्मद एजाज के रऊफ से कथित तौर पर सीधे संपर्क थे और उसने भारतीय पहचान पत्र हासिल करने में उसकी मदद की थी।
एसटीएफ के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘हमें रऊफ के बनगांव सीमा की ओर जाने की विशेष सूचना मिली थी और हमने उसे हाबरा के जेसोर रोड से गिरफ्तार कर लिया। हम आईएसआई से उसके कथित संबंधों, भारतीय पहचान दस्तावेजों के इस्तेमाल और क्या वह बांग्लादेश में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था, इसकी जांच कर रहे हैं।’’ जांचकर्ताओं के अनुसार, रऊफ वर्ष 2012 में नेपाल के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ था। उन्होंने कहा, ‘‘भारत में प्रवेश करने से पहले वह कुछ समय नेपाल में रहा था और बाद में पश्चिम बंगाल में बस गया।
उसके कब्जे से कई भारतीय पहचान पत्र बरामद किए गए हैं। उसके पास मिले एक आधार कार्ड में टॉपसिया का पता दर्ज था।’’ अधिकारियों ने बताया कि रऊफ देश में चलने वाली विभिन्न रेलगाड़ियों और सशस्त्र बलों की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। उन्होंने बताया कि एसटीएफ अधिकारियों ने पाया कि रऊफ कोलकाता में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण फोर्ट विलियम समेत कई संवेदनशील ठिकानों पर नजर रख रहा था।
अधिकारी ने बताया कि रऊफ ने अपना मोबाइल फोन नष्ट कर दिया था। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के समय उसके पास से कोई भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद नहीं हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘उसके बैग में एक नोटबुक मिली, जिसमें कई फोन नंबर दर्ज थे।
इनमें से कुछ नंबर बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका के थे।’’ उन्होंने बताया कि उसके पास से दो सिम कार्ड भी बरामद हुए। अधिकारी ने कहा, ‘‘उस पर रेलवे और भारतीय नौसेना से जुड़ी सूचनाएं पाकिस्तान को भेजने का भी संदेह है। हम यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि वह किस तरह की जानकारी जुटा रहा था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘रऊफ के साथ उसके संबंधों की गहराई और इसमें अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं, यह पता लगाने के लिए एजाज से पूछताछ की जा रही है।’’ उन्होंने कहा कि एसटीएफ यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी स्वतंत्रता दिवस से पहले किसी ‘‘विध्वंसक गतिविधि’’ की साजिश बना रहे थे।
अधिकारी ने बताया कि हमीम मंडल से पूछताछ के दौरान जांचकर्ताओं को महत्वपूर्ण जानकारी मिली, जिससे बाद में उन्हें रऊफ का पता लगाने में मदद मिली। अधिकारियों ने बताया कि एसटीएफ रऊफ के प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से संभावित संबंधों और आईएसआई के साथ उसके कथित जुड़ाव की प्रकृति की भी जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि गिरफ्तारी के बाद मंगलवार रात रऊफ को चिकित्सकीय जांच के लिए हाबरा अस्पताल ले जाया गया।
बाद में बारासात की अदालत में पेश किए जाने पर, अदालत ने गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों को 14 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi









