बिना सैंपल की जांच किए बना दी गर्भवती महिला की यूरिन टेस्ट रिपोर्ट, लैब टेक्नीशियन निलंबित, जिम्मेदारों पर सवाल
नीमच जिले के जीरन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों की जान से खिलवाड़ के मामले में पैथोलॉजी लैब में गर्भवती महिलाओं को बिना यूरिन सैंपल छुए ही फर्जी रिपोर्ट थमा देने के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के कड़े निर्देशों के बाद, लापरवाही बरतने वाले लैब टेक्नीशियन अंकित शर्मा और लीना सिंघाडिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि गर्भवती माता और शिशु की सुरक्षा से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जीरन सीएचसी में 25 मई को प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर में आई गर्भवती महिलाओं की जांच के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा था। पालसोड़ा निवासी रीना राठौर के पति अनिल राठौर की शिकायत और मीडिया में खबर आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी। जांच में यह बात पूरी तरह सच साबित हुई कि लैब टेक्नीशियन अंकित शर्मा और अन्य स्टाफ द्वारा यूरिन, ब्लड शुगर और एल्बुमिन की जांच किए बिना ही फर्जी रिपोर्ट बांटी जा रही थी।
फर्जी जाँच रिपोर्ट गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु के लिए खतरा
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि लैब में शासकीय सप्लाई की यूरिन एल्बुमिन स्ट्रिप का उपयोग ही नहीं किया गया। यह कोई छोटी-मोटी चूक नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं और उनके अजन्मे बच्चों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ था। सही जांच न होने से जेस्टेशनल डायबिटीज, हाइपरटेंशन, प्री-एक्लेमप्सिया और एक्लेमप्सिया जैसी जानलेवा बीमारियों का सही समय पर पता नहीं चल पाता। इस घोर लापरवाही से जच्चा और बच्चा, दोनों की मौत होने तक का खतरा बना रहता है। जब मरीज के परिजन ने वीडियो बनाया, तब जाकर कर्मचारियों ने घबराहट में सैंपलों में स्ट्रिप्स डालना शुरू किया था।
कलेक्टर ने दोनों लैब टेक्नीशियंस को निलंबित किया
इस पूरे घटनाक्रम को मानवीय जीवन और कर्तव्य के प्रति घोर उदासीनता मानते हुए कलेक्टर ने एक्शन लिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने लैब टेक्नीशियन अंकित शर्मा और लीना सिंघाडिया को सिविल सेवा नियमों के तहत तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सिंगोली रहेगा। बंसल न्यूज की इस मुहिम ने यह साबित कर दिया है कि सिस्टम की इस तरह की जानलेवा लापरवाही को अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ऐसा पकड़ में आया फर्जीवाड़ा, कर लिया स्टिंग
उल्लेखनीय है कि अनिल राठौर भी अपनी गर्भवती पत्नी के चैकअप के लिए शिविर में गए थे, डॉक्टर के कहने पर उनकी पत्नी की यूरिन के सेंपल लिए गए, लेकिन उनके होश तब उड़ गए जब उनकी आँखों के सामने ही एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया, उन्होंने देखा कि सेंपल टेबल पर रखे रहे और लैब टेक्नीशियन ने उन्हें रिपोर्ट भी बनाकर दे दी, अनिल की पत्नी का 12:48 बजे यूरिन सैंपल लिया गया और ठीक 8 मिनट बाद 12:56 बजे फाइनल रिपोर्ट दे दी गई।
वीडियो बनते देख सैम्पल में डाली स्ट्रिप
अनिल ने एक जिम्मेदार नागरिक की तरह इस कारगुजारी की वीडियो बनानी शुरू की टेबल पर 11 और सैम्पल रखे थे लैब टेक्नीशियन ने जैसे ही देखा कि वीडियो बन रही है उसने सैम्पल में स्ट्रिप डाल दी। यानि अनिल को उनकी पत्नी की बिना सेंपल की जाँच किये फर्जी रिपोर्ट बनाकर दे दी गई, जब उन्होंने सवाल किया तो जो जवाब मिला वो और हैरान करने वाला था लैब टेक्नीशियन ने कहा हम ब्लड से यूरिन की जाँच कर लेते हैं, जब अनिल ने मोबाइल रिकॉर्डिंग जारी रख लैब टेक्नीशियन से सवाल जवाब किये तो उनका मुंह सूख गया और बिना बोले आगे निकल गए, अन्य स्टाफ भी चुप्पी साधे रहा।
बीएमओ को दी लिखित शिकायत
अनिल राठौर ने जब बीएमओ को ये बात बताई तो उन्होंने लिखित आवेदन देने के लिए कहा, जिसके बाद अनिल राठौर ने लिखित शिकायत की और वीडियो भी उन्हें सौंपे, बात मीडिया तक पहुंची जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया , बीएमओ, पालसोड़ा (जीरन क्षेत्र) डॉ. विजय भारती ने कहा जीरन स्वास्थ्य केंद्र के इस पूरे घटनाक्रम और वीडियो की बारीकी से निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी तथ्य और लापरवाही सामने आएगी, उसके आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, इसके बाद उन्होंने जाँच कर प्रतिवेदन सीएमएचओ नीमच को भेजा जिसके बाद दोनों लैब टेक्नीशियंस को निलंबित कर दिया गया।
दिखावे का निरीक्षण, कार्यप्रणाली पर सवाल
अब यहाँ सबसे बड़ा सवाल ये उठता है, अनिल राठौर जैसे एक जागरूक नागरिक ने फर्जीवाड़ा पकड़ लिया इस बात की क्या गारंटी है कि इस सीएचसी या नीमच जिले के अन्य किसी अस्पताल में इस तरह का फर्जीवाड़ा नहीं हो रहा होगा, लोग जिमेम्दारों पर भी सवाल उठा रहे हैं जो समय समय निरीक्षण के दावे करते हैं, लेकिन उनकी आँख के नीचे सब होता रहता है लेकिन उन्हें दिखाई नहीं देता, सामने आई लापरवाही एक नहीं दो जानों (मां और गर्भस्थ शिशु) के लिए खतरा बन सकती थी। यह घटना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा धब्बा है।
राजस्थान: पूर्व CM अशोक गहलोत ने कई मुद्दों पर BJP सरकार को घेरा, गिनाईं अपने कार्यकाल की उपलब्धियां, चिरंजीवी योजना पर खड़े किए सवाल
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर दौरे के दौरान राज्य की बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है। 26 मई को जोधपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से मुखातिब होते हुए गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा धर्म की राजनीति से सत्ता में तो आ गई है, लेकिन आम आदमी की समस्याओं से उसका कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार के बारह साल पूरे होने वाले हैं, परंतु जनता को कोई बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं हुई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने जोधपुर में गहराते पेयजल संकट को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद इंदिरा गांधी नहर परियोजना के माध्यम से पानी पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया था। इस परियोजना के तीसरे चरण के लिए लगभग 1400 करोड़ रुपए भी स्वीकृत किए गए थे, जिसका उद्देश्य शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में पानी की समस्या का स्थायी समाधान करना था। हालांकि, गहलोत ने दावा किया कि वर्तमान सरकार इस परियोजना की निगरानी में पूरी तरह विफल साबित हुई है, जिससे आम जनता को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ रहा है।
अशोक गहलोत ने अपने कार्यकाल की गिनाईं उपलब्धियां
अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि उनके समय में जोधपुर में कई महत्वपूर्ण विकास कार्य हुए। इनमें मेडिकल कॉलेज, विश्वविद्यालय, अस्पताल भवन और अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। उन्होंने विशेष रूप से प्रतापनगर, मंडोर अस्पताल और चौपासनी हाउस जैसी इमारतों का उल्लेख किया और कहा कि बाहर से आने वाले लोग भी इन भवनों की वास्तुकला और सुविधाओं की सराहना करते थे। पूर्व मुख्यमंत्री ने अफसोस जताते हुए कहा कि मौजूदा सरकार इन महत्वपूर्ण ढाँचों की उचित देखरेख तक नहीं कर पा रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दे पर भी गहलोत ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी महत्वाकांक्षी चिरंजीवी योजना अब केवल कागजों तक ही सिमट कर रह गई है। गहलोत ने बताया कि निजी अस्पताल मरीजों से मनमानी फीस वसूल रहे हैं, जिसके चलते गरीब आदमी को इलाज के लिए अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। इस स्थिति से साफ है कि योजना का लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
पंचायत और नगर निगम चुनावों में देरी पर सरकार को घेरा
पंचायत और नगर निगम चुनावों में हो रही देरी को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संविधान की पालना नहीं कर रही है और राजस्थान हाईकोर्ट की फटकार के बावजूद इन महत्वपूर्ण चुनावों को कराने में जानबूझकर देरी की जा रही है। गहलोत ने देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनाव आयोग की वर्तमान स्थिति पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बढ़ता दबाव देश के भविष्य के लिए चिंताजनक है।
एयरपोर्ट विस्तार और अन्य विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए गहलोत ने स्पष्ट किया कि कई बड़ी परियोजनाएं उनके कार्यकाल में ही शुरू हुई थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार केवल पुराने कार्यों का श्रेय लेने में व्यस्त है और नए विकास कार्यों की ओर ध्यान नहीं दे रही है। पेपर लीक और ओएमआरएस मामलों पर गहलोत ने कहा कि इन मामलों में कार्रवाई और गिरफ्तारियां उनके शासनकाल में ही शुरू हो गई थीं। उन्होंने वर्तमान सरकार पर केवल प्रचार तक सीमित रहने का आरोप लगाया और कहा कि राजस्थान में हालात गंभीर हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार जनता की समस्याओं को लेकर संवेदनशील नजर नहीं आ रही है, जिससे प्रदेश में एक निराशा का माहौल है।
आज जोधपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बात की :
राज्य सरकार द्वारा जोधपुर की उपेक्षा किए जाने पर मेरी प्रतिक्रिया :
देखिए सबसे बड़ी बात है कि 12 साल पूरे हो गए तो अलग बात है कि 12 साल में कोई उपलब्धि नहीं रही है। धर्म के नाम पर राजनीति हुई और उसमें वो पूरी तरह कामयाब रहे। अब नतीजे… pic.twitter.com/ydWgAbeUKA
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) May 26, 2026
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