चीन को मिलेगी टक्कर, क्वाड के किस देश के पास है कितने रेयर अर्थ, भारत सबसे आगे!
यूएसजीएस की 2026 रिपोर्ट और सरकारी आंकड़ों में बताया है कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और भारत तीनों देशों के पास रेयर अर्थ के भंडार अच्छे हैं. साल 2020 तक वैश्विक भंडार का अनुमान 120 मिलियन मीट्रिक टन लगाया गया है. चीन 44 मिलियन मीट्रिक टन के भंडार के साथ सबसे आगे है.
राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों पर नाराजगी, सरकारों को फटकार
देश की सर्वोच्च अदालत ने राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य में लगातार बढ़ रहे अवैध रेत खनन को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है, आज मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इसपर कड़ा रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश , उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकारों को तत्काल प्रभाविकदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने राज्य सरकारों को निर्देश देते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य में हो रहे अवैध रेत खनन पर तत्काल प्रभावी कदम उठाने होंगे, कोर्ट ने निगरानी व्यवस्था बढ़ाने उसे और मजबूत करने तथा खाली पड़े वन रक्षकों के पदों को जल्दी भरने के निर्देश भी दिए।
मुरैना में बिना नंबर प्लेट अवैध रेत ढो रहे वाहनों पर कड़ी फटकार
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए मुरैना जिले में बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों से अवैध रेत परिवहन वाली मीडिया रिपोर्ट पर भी संज्ञान लिया और कड़ी फटकार लगाई, कोर्ट ने कहा पहले के आदेशों के बाद भी बिना रजिस्ट्रेशन नंबर वाले वाहनों से अवैध रेत ढुलाई की बात सही है तो इसका मतलब है कि अधिकारियों ने अदालत में गलत हलफनामा दाखिल किया है।
सिर्फ ड्राइवर नहीं, मालिकों, ठेकेदारों पर भी हो कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने अवैध रेत खनन रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए अदालत ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए, कोर्ट ने तीनों राज्यों को प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में सीसी टीवी कैमरे, कंट्रोल सेंटर और मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए, कोर्ट ने बिना रजिस्ट्रेशन अवैध रेत परिवहन में लगे वाहनों को जब्त कर उनके खलाफ क़ानूनी कार्रवाई करें, कोर्ट ने कहा केवल ड्राइवर तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिये, वाहन मालिक, ठेकेदार और अन्य लोगों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए
इसलिए खास है राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य
राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैला है, करीब 5400 वर्ग किलोमीटर का ये संरक्षित क्षेत्र दुर्लभ घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन और रेड क्राउन रूफ टर्टल जैसे संकटग्रस्त जीवों का घर माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे अवैध रेत खनन को वन्य जीवों और पर्यावरण के खतरा कहा है। इसी को देखते हुए अदालत ने तीनों राज्यों को सख्त और समन्वित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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