दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद पहुंचा हाईकोर्ट, केंद्र सरकार को जारी हुआ नोटिस; तुषार मेहता और सिंघवी ने दी ये दलीलें
दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने के केंद्र सरकार के आदेश को लेकर मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है. सोमवार को हुई सुनवाई में अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया. क्लब प्रबंधन ने 5 जून तक परिसर खाली करने के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है.
कोर्ट में आमने-सामने आए दोनों पक्ष
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी याचिकाकर्ता विजय खुराना की ओर से पेश हुए, जबकि केंद्र सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखा. अदालत ने सबसे पहले केंद्र सरकार से उसका पक्ष स्पष्ट करने को कहा.
तुषार मेहता ने क्या दी दलील
कोर्ट के कहना पर तुषार मेहता ने दलील दी कि लीज से जुड़े क्लॉज-4 के तहत सरकार को आवश्यक कदम उठाने का अधिकार प्राप्त है. उन्होंने कहा कि सरकार ने नियमों के अनुसार ही नोटिस जारी किया है और प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी दायरे में की जा रही है.
कोर्ट ने पूछा- क्या सरकार जबरन कब्जा लेगी?
सुनवाई के दौरान जज ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या सरकार सीधे क्लब पर कब्जा करने जा रही है. इस पर तुषार मेहता ने कहा कि सरकार कानून के तहत ही कार्रवाई करेगी और सभी कदम वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार उठाए जाएंगे. यही नहीं उन्होंने यह भी साफ किया कि सरकार की ओर से क्लब को अचानक खाली करने का आदेश नहीं दिया गया, बल्कि पूर्व निर्धारित प्रक्रिया अपनाई गई है.
सिंघवी ने उठाए गंभीर सवाल, दी ये दलीलें
वहीं अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में कहा कि दिल्ली जिमखाना क्लब एक गैर-लाभकारी संस्था है और सरकार की कार्रवाई से उसके संचालन पर गंभीर असर पड़ सकता है. उन्होंने अदालत को बताया कि क्लब को 5 जून तक परिसर खाली करने को कहा गया है और इसके लिए 15 सदस्यीय टीम भी गठित की गई है.
सिंघवी ने दावा किया कि सरकार इस प्रक्रिया के जरिए क्लब का नियंत्रण अपने हाथ में लेना चाहती है. हालांकि अदालत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि संबंधित सदस्य केवल सरकार के नामित प्रतिनिधि हैं.
‘पब्लिक प्रिमाइसेस एक्ट’ का भी हुआ जिक्र
सुनवाई के दौरान सिंघवी ने पब्लिक प्रिमाइसेस एक्ट का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि यह मामला “कमरे में मौजूद बड़े हाथी” जैसा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि इससे पहले दिल्ली रेस क्लब और पोलो क्लब जैसे मामलों में भी अदालत हस्तक्षेप कर चुकी है और टेकओवर संबंधी कार्रवाई पर रोक लगाई गई थी.
फिलहाल राहत की उम्मीद
दिल्ली जिमखाना क्लब और स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन दोनों ने केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती दी है. याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अपील की है कि जब तक मामला विचाराधीन है, तब तक सरकार कोई कठोर कदम न उठाए. फिलहाल हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अब इस मामले की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसका असर क्लब के भविष्य और उसके प्रशासनिक ढांचे पर पड़ सकता है.
यह भी पढ़ें - 'ट्विशा की सास जांच में बनी अड़चन', सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में दी दलील
संभल में दो कारों की टक्कर में पिता-पुत्री की मौत, पांच घायल
संभल में दो कारों की टक्कर में पिता-पुत्री की मौत, पांच घायल
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation
IBC24























