समूचा उत्तरी भारत भीषण गर्मी की चपेट में चल रहा है तो दूसरी और ना तो राजस्थान में कोई आसन्न विधानसभा या लोकसभा के चुनाव है और ना ही कोई ऐसी आपात् स्थिति जिसमें जनता से सीधा संवाद कायम करना आवश्यक हो, ऐसी स्थिति में ही एक संवेदनशील मुख्यमंत्री के नाते राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा गावों में चौपाल आयोजित कर सीधे ग्रामीणों से रुबरु हो रहे हैं, यह वास्तव में जननेता की पहचान व उसकी आमजन के प्रति सोच का परिणाम है। 40 डिग्री से अधिक के तापमान में मुख्यमंत्री की रात्रि चौपाल और फिर रात्रि विश्राम आज के सुविधाभोगी युग में लगभग असंभव लग रहा है पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस लपलपाती गर्मी में गांवों में रात्रि चौपालों के माध्यम से ग्रामीणों से संवाद कायम कर रहे हैं। 5 मई से 16 मई तक राजधानी जयपुर ही नहीं अपितु दूरदराज के इलाकों के गांवों में पांच चौपाल आयोजित कर ग्रामीणों से सीधा संवाद कायम करने के साथ ही रात को उसी गांव के सरकारी स्कूल में रात्रि विश्राम और फिर सुबह गांव में ही प्रातःकालीन भ्रमण के माध्यम से गांववासियों से आत्मीय संवाद कायम कर रहे हैं। मई माह में मुख्यमंत्री 5 से 16 मई के दौरान प्रतापगढ़ के बम्बोरी, सीकर के जाजोर, अजमेर के पुष्कर के पास कड़ेल, जालौर के पंसेरी और जयपुर के ठिकरिया में ग्राम विकास चौपाल में ग्रामीणों के बीच बैठकर उनसे रुबरु हो चुके हैं। 20 मई को बांसवाड़ा के चुड़ावा और 21 मई को धुम्बाला को ग्रामीण चौपाल और गांव की सरकारी स्कूल में रात्रि विश्राम कर रहे हैं। यह गांव कोई राजधानी जयपुर के पास के नहीं है अपितु प्रदेश के दूरदराज के गांव है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा समय निकाल कर इन गांवों में रात्रि चौपाल में ग्रामवासियों की परिवेदनाओं को सुनते हैं, यथा सभव मौके पर ही समाधान करने का प्रयास करते हैं और रात्रि को भोजन भी गांव के ही किसी ग्रामवासी के घर बिना किसी तामझाम के करते हुए देखा जा सकता है। इसके साथ ही खासबात यह है कि इस भीषण गर्मी के दौर में गांव के स्कूल में ही रात्रि को विश्राम करने के साथ ही प्रातःकालीन भ्रमण के दौरान गांववासियों से अपनत्व के साथ मेलमिलाप कर रहे हैं। यह धरातलीय हालातों को समझने, लोगों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं की जानकारी लेने, स्थानीय समस्याओं को समझने और उनके निराकरण का बेहतरीन माध्यम होने के साथ ही मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर ग्रामवासियों में जिस तरह का संदेश जाता हे उसे हम भलीभांति समझ सकते हैं। क्योंकि आज के हालातों में मुख्यमंत्री तो दूर की बात जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से मिलना भी इतना आसान नहीं होता। फिर सबसे बड़ी बात यह कि मुख्यमंत्री मतलब सरकार आपके बीच आती है तो फिर उसके परिणाम निश्चित रुप से सकारात्मक होते हैं और धरातलीय हालातों को समझने का बेहतर अवसर आसानी से मिल जाता है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की यह पहल सीधा ग्रामीणों से रुबरु होने का सशक्त माध्यम बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ही माने तो इससे गांवों की समस्याओं से रुबरु होने का अवसर मिलता है तो आवश्यक निर्देश मौके पर ही जारी होने से समस्याओं का समाधान भी मौके पर ही हो पाता है। इसके माध्यम से सरकारी योजनाओं व कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के साथ ही स्थानीय समस्याओं यथा पानी, बिजली, स्कूल, स्वास्थ्य, सड़क और इसी तरह की सुविधाओं के धरातल पर हालात को समझने का अवसर मिल जाता है। मौके पर ही समस्याओं के समाधान को इस तरह से भी समझा जा सकता है कि सीकर के जाजोद गांव में ग्रामीण चौपाल के दौरान छात्राओं की मांग पर एक रात में विद्यालय में विज्ञान संकाय खोलने के आदेश जारी हो गए। यही नहीं अजमेर के कड़ेल गांव में ग्रामीणों से चर्चा के दौरान सामने आया तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में क्रमोन्नयन के आदेश मुख्यमंत्री के निर्देश पर तत्काल जारी हो गए। यह तो उदाहरण मात्र है पर इससे साफ संदेश जाता है कि ग्रामीण विकास चौपाल कोई दिखावा या औपचारिकता ना होकर ग्रामीणों व आमजन को सीधे राहत पहुंचाने वाली पहल है। निश्चित रुप से यह सराहनीय पहल मानी जानी चाहिए।
एक खास बात यह है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की यात्रा में जहां काफिले को सीमित किया गया हैं वहीं दौरों के दौरान ईवी वाहन का उपयोग कर ईंधन बचत पर जोर दिया जा रहा सरकारी स्कूल में ही रात्रि विश्राम से गांववासियों और आमजन में एक अपनेपन का संदेश जा रहा है। लगता है जैसे मुख्यमंत्री अपनो के बीच अपनेपन के साथ मिल रहे हैं, अपनी बात कह रहे हैं, उनकी बात सुन रहे हैं और आवश्यकता के अनुसार समाधान भी कर रहे हैं। इसके साथ ही स्थानीय सरकारी मशीनरी मुख्यमंत्री की रात्रि चौपाल को देखते हुए एक्टिव मोड पर आ जाती है और इसका परिणाम यह होता है कि बहुत सी समस्याओं का समाधान तो मुख्यमंत्री की रात्रि चौपाल से पहले ही हो जाता है। मुख्यमंत्री के दौरे और फिर रात्रि चौपाल की हो तो फिर किसी एक विभाग तक बात सीमित ना रहकर सभी आधारभूत सुविधाओं और समस्याओं के समाधान की हो जाती है और निश्चित रुप से समस्याओं का समाधान होता भी है। इस सबसे अलग ग्राम विकास चौपाल के माध्यम से मुख्यमंत्री और सरकार को लोगों की भावनाओं, क्षेत्र विशेष की समस्याओें, आवश्यकताओं को समझने का अवसर मिलता है वहीं स्थानीय प्रशासन, कानून व्यवस्था आदि का भी चर्चा से फीड बैक मिल जाता है। यह तो सभी जानते हैं कि सभी गांवों में मुख्यमंत्री की ग्रामीण चौपाल नहीं हो सकती पर ग्रामीण चौपाल के माध्यम से संवेदनषील सरकार का संदेश आमजन में जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह कि विकसित राजस्थान का सपना पूरा करने में यह ग्रामीण विकास चौपाल अहम् भूमिका निभाएगी ही साथ ही सरकार की भावी योजनाएं करते समय फील्ड का यह व्यावहारिक अनुभव निश्चित रुप से कागजी नहीं रह पायेगा और इससे व्यावहारिक योजनाएं बनने के साथ ही विकास को नई गति मिल सकेगी। यह साफ हो जाना चाहिए कि यह किसी मुख्यमंत्री या राजनेता के महिमा मंडन का प्रयास ना होकर एक राजनेता से आमजन की अपेक्षाओं पर खरा उतरने व आमजन के प्रति सीधे संवाद और जनभावना को समझने का बेहतरीन प्रयास माना जाना चाहिए। आज आमजन अपने जनप्रतिनिधि व मुख्यमंत्री से यही अपेक्षा रखती है कि वहां तक आमजन की सहज पहुंच हो सके। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की इस पहल की सराहना की जानी चाहिए और संभव हो तो अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों व जनप्रतिनिधियों को भी इस दिशा में पहल करनी चाहिए।
- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा
Continue reading on the app