प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे ही पांच देशों की यात्रा से भारत लौटे, उससे एक दिन पहले ही यह खास शख्स पीएम मोदी से मिलने पहुंच गए। पीएम मोदी एक बहुत बड़े खेल की तैयारी में लग गए हैं। पीएम मोदी के साथ खड़े यह शख्स भारत के दुश्मन के सबसे बड़े दुश्मन है। लेकिन भारत के पक्के दोस्त इनके देश पर बहुत बड़ा संकट आने वाला है। उसी सिलसिले में इन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात की है। यह शख्स है एक छोटे मगर भारत के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण देश साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टो डेलिड्स। दरअसल साइपरस तुर्की का सबसे बड़ा दुश्मन है और तुर्की भारत का भी दुश्मन है। यहां पर इजराइल भी एक बहुत बड़ा खेल करने वाला है क्योंकि इजराइल भी तुर्की का दुश्मन है। दरअसल खबर है कि तुर्की आने वाले दिनों में एक ऐसा कानून लाने वाला है जो अगर पास हो गया तो साइप्रेस हमेशा के लिए बर्बाद हो सकता है और तुर्की के इस कानून का भारत पर भी बहुत बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में साइप्रेस के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी के सामने खड़े होकर जो बयान दिया है, उसने तुर्की में भूचाल ला दिया है।
दरअसल जिस तरह से पाकिस्तान ने कश्मीर के एक हिस्से पर अवैध कब्जा कर रखा है, ठीक वैसे ही तुर्की ने भी साइप्रस के 35% उत्तरी इलाके में कब्जा कर रखा है। तुर्की लगातार कश्मीर पर बयान देता आया है। जिसके बाद पीएम मोदी ने भी ऐलान कर दिया कि भारत साइप्रस की संप्रभुता और सुरक्षा का समर्थन करता है। यानी पीएम मोदी ने ऐलान कर दिया कि साइप्रस के जिस हिस्से पर तुर्की का कब्जा है, वह इलाका साइप्रस का ही है। पिछले साल 16 जून को साइप्रस के राष्ट्रपति पीएम मोदी को अपनी वही जमीन दिखाने ले गए जो तुर्की के कब्जे में थी। इसी घटना के बाद तुर्की में बवाल मच गया। पिछले कुछ महीनों से इसी का बदला लेने के लिए तुर्की प्लान बना रहा था। अब तुर्की ने ऐलान किया है कि वह अपनी ब्लू होमलैंड पॉलिसी को लागू करेगा। ब्लू होमलैंड सिद्धांत तुर्की का आक्रामक समुद्री सिद्धांत है जिसका उद्देश्य आसपास के समुद्री इलाकों और संसाधनों पर पूर्ण कब्जा करना है। साइप्रस का कहना है कि ब्लू होमलैंड के जरिए तुर्की हमारे गैस भंडारों पर अपना दावा ठोकता है। हमारे समुद्री इलाकों पर कब्जा करने की तैयारी कर रहा है। साइप्रस ने बताया कि तुर्की ऐसा करके मेडिटरेनियन सी के रणनैतिक इलाकों पर कब्जा चाहता है। यह वही इलाका है जहां से भारत और इजराइल का आईमैक कॉरिडोर यूरोप तक पहुंचेगा। इस इलाके को यूरोप का गेटवे कहा जाता है। इसी समुद्री इलाके पर कब्जा करने के लिए तुर्की अपनी संसद में ब्लू होमलैंड सिद्धांत पर कानून ला रहा है। लेकिन इसी बीच साइप्रस के राष्ट्रपति भारत आ गए।
साइप्रस के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी के सामने खड़े होकर बयान दिया कि हम धन्यवाद करते हैं कि भारत हमारी स्वतंत्रता और संप्रभुता का समर्थन करता है। हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के लिए परमानेंट सीट की मांग करते हैं। खबर है कि तुर्की को निपटाने के लिए साइप्रस, भारत, इजराइल और ग्रीस एक मेडिटरेनियन क्वाड बना रहे हैं। जिसको लेकर बातचीत तेज हो गई है।
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भारत की रक्षा ताकत अब सिर्फ हथियारों तक सीमित नहीं है बल्कि दुनिया के बड़े-बड़े देश भी भारत की डिफेंस टेक्नोलॉजी और रिसर्च क्षमता को गंभीरता से ले रहे हैं और इसकी सबसे बड़ी मिसाल हाल ही में देखने को मिली जब फ्रांस का एक हाई लेवल डेलीगेशन डीआरडीओ मुख्यालय पहुंचा और भारत के साथ एडवांस डिफेंस टेक्नोलॉजी पर चर्चा की। यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं थी बल्कि आने वाले समय में भारत और फ्रांस की रक्षा साझेदारी को नई ऊंचाई देने वाला एक बड़ा संकेत है। दरअसल फ्रांस की रक्षा खरीद और टेक्नोलॉजी एजेंसी डीजीए यानी कि डायरेट जनरल ऑफ आर्मामेंट्स के डेलीगेट जनरल पैट्रिक पैक्स के नेतृत्व में एक डेलीगेशन 20 मई को डीआरडीओ मुख्यालय के दौरे पर पहुंचा। यहां पर उनकी मुलाकात डीआरडीओ चेयरमैन डॉ. समीर कामत के साथ हुई। इस मुलाकात की जानकारी खुद डीआरडीओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए दी है।
डीआरडीओ के मुताबिक दोनों देशों के बीच डिफेंस टेक्नोलॉजी में सहयोग को और मजबूत बनाने पर गंभीर चर्चा हुई। यानी अब भारत और फ्रांस सिर्फ हथियार खरीद बिक्री तक सीमित नहीं रहना चाहते हैं। बल्कि नई पीढ़ी के रक्षा तकनीकों को साथ मिलकर विकसित करना चाहते हैं। एक समय था जब भारत रक्षा उपकरणों के लिए बाकी देशों पर निर्भर रहता था। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदलती जा रही है। डीआरडीओ लगातार ऐसी हाईटेक तकनीक विकसित कर रहा है जिसने दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। और अब यहां समझने वाली बात यह है कि फ्रांस जैसा देश जिसके पास दुनिया की बेहतरीन मिलिट्री टेक्नोलॉजी है वो भी बार-बार डीआरडीओ के पास क्यों आ रहा है।
इसका जवाब है डीआरडीओ की बढ़ती हुई क्षमता। आज डीआरडीओ सिर्फ मिसाइल नहीं बना रहा बल्कि वो क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंडर वाटर रोबोटिक जैसे भविष्य के क्षेत्रों में लीड कर रहा है। दुनिया को समझ आ गया है कि भारत के पास ना सिर्फ टैलेंट है बल्कि रिसर्च के लिए जबरदस्त इकोसिस्टम भी है। यही वजह है कि अब फ्रांस जैसे बड़े रक्षा साझेदार भी भारत के साथ मिलकर रिसर्च और टेक्नोलॉजी शेयरिंग को बढ़ाना चाहते हैं। पिछले साल डीआरडीओ और फ्रांस के डीजीए के बीच एक बड़ा टेक्निकल एग्रीमेंट भी साइन हुआ था। इस समझौते का मकसद भविष्य की रक्षा चुनौतियों के लिए मिलकर नई तकनीक विकसित करना था। इस समझौते के तहत दोनों देश एयरनॉटिकल प्लेटफॉर्म्स, अनमैन व्हीकल्स, एडवांस मटेरियल, साइबर सिक्योरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस टेक्नोलॉजी, नेविगेशन सिस्टम, एडवांस सेंसर क्वांटम टेक्नोलॉजीस और अंडर वाटर वेफेयर जैसी कई अहम टेक्नोलॉजीस पर एक साथ काम कर रहे हैं।
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