केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्वी सीमा से होने वाली घुसपैठ को देश की सुरक्षा और जनसांख्यिक संतुलन के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए सीमा सुरक्षा बल को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि अवैध घुसपैठ को पूरी तरह रोका जाए और जो लोग पहले से अवैध रूप से देश में प्रवेश कर चुके हैं, उनकी पहचान कर उन्हें बाहर किया जाए। नई दिल्ली में आयोजित रुस्तमजी स्मृति व्याख्यान में बोलते हुए अमित शाह ने सीमा सुरक्षा बल से कहा कि वह केवल सीमा की निगरानी तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय प्रशासन, पुलिस और ग्रामीण तंत्र के साथ समन्वय बनाकर घुसपैठियों और उनके मार्गों की पहचान करे।
गृह मंत्री ने कहा कि पूर्वी सीमा के पार से सुनियोजित तरीके से घुसपैठ कर देश की प्राकृतिक जनसांख्यिक संरचना को बदलने की कोशिश की जा रही है। इसे रोकने के लिए एक संगठित और स्थायी व्यवस्था विकसित की जाएगी। उन्होंने सीमा सुरक्षा बल को निर्देश दिया कि गांवों के पटवारी, जिला अधिकारी, पुलिस अधीक्षक, खंड विकास अधिकारी और स्थानीय पुलिस के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें ताकि नए घुसपैठियों, उनके प्रवेश मार्गों और तस्करी से जुडे गिरोहों की जानकारी समय रहते प्राप्त हो सके। सरकार का उद्देश्य इन सभी मार्गों को व्यवस्थित रूप से बंद करना है।
अमित शाह ने कहा कि अगले वर्ष सीमा सुरक्षा बल की स्थापना के साठ वर्ष पूरे होने जा रहे हैं और इस अवसर पर बांग्लादेश तथा पाकिस्तान सीमा को आधुनिक तकनीक से लैस "स्मार्ट सीमा" में बदला जाएगा। इस योजना के तहत ड्रोन, रडार, स्मार्ट कैमरे और अन्य उन्नत तकनीकी उपकरणों की सहायता से सीमा पर निगरानी मजबूत की जाएगी। इन प्रणालियों का उपयोग घुसपैठ रोकने के साथ-साथ मादक पदार्थों की तस्करी, पशु तस्करी, नकली भारतीय मुद्रा के प्रसार तथा हथियार और नशीले पदार्थ पहुंचाने वाले ड्रोन की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए किया जाएगा।
गृह मंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों में कार्य कर रही है और पार्टी का स्पष्ट मत है कि देश से प्रत्येक घुसपैठिए को बाहर किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीमा सुरक्षा बल को केवल सीमा चौकसी तक सीमित रहने के बजाय एक व्यापक सुरक्षा तंत्र के रूप में काम करना होगा। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ लगातार सूचनाओं का आदान प्रदान ही घुसपैठ और तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण का आधार बनेगा।
अमित शाह ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित उच्च स्तरीय जनसांख्यिक मिशन जल्द ही काम शुरू करेगा। इस मिशन का उद्देश्य देश की जनसांख्यिक स्थिति का गहन अध्ययन करना और अवैध घुसपैठ से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान तैयार करना होगा। हालांकि उन्होंने मिशन की विस्तृत रूपरेखा सार्वजनिक नहीं की, लेकिन संकेत दिए कि यह सीमा प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा।
अपने संबोधन में गृह मंत्री ने देश से नक्सलवाद समाप्त करने के सरकारी अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, भारत तिब्बत सीमा पुलिस और विभिन्न राज्य पुलिस बलों की सराहना करते हुए कहा कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। अमित शाह ने बताया कि जब सरकार ने यह लक्ष्य निर्धारित किया था, तब कई सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों ने इसे असंभव बताया था, लेकिन केंद्र सरकार अपने संकल्प पर अडिग रही। विभिन्न सुरक्षा बलों और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से पांच दशक पुरानी इस समस्या को जड़ से समाप्त करने में सफलता मिली।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा का दृष्टिकोण केवल खतरों को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समस्याओं को उनकी जड़ से समाप्त करना ही वास्तविक समाधान है। इसी सोच के आधार पर सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक अभियान चलाया और अब वही रणनीति सीमा सुरक्षा और घुसपैठ रोकने के लिए अपनाई जा रही है।
गृह मंत्री ने सीमा सुरक्षा बल की "ऑपरेशन सिंदूर" में भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि अब आतंकवादी हमलों के बाद बातचीत या समझौते का दौर समाप्त हो चुका है और देश की सुरक्षा के प्रति सरकार का रुख पूरी तरह कठोर है। शाह के अनुसार भारत अब हर चुनौती का जवाब निर्णायक कार्रवाई से देने की नीति पर चल रहा है। अपने पूरे संबोधन में गृह मंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया कि आने वाले समय में सीमा सुरक्षा, जनसांख्यिक संतुलन, घुसपैठ रोकने और आंतरिक सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार और अधिक आक्रामक तथा तकनीक आधारित रणनीति अपनाने जा रही है। सीमा सुरक्षा बल को इस नई नीति का प्रमुख स्तंभ बताते हुए उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा केवल चौकसी का कार्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में विवादास्पद टिप्पणी करने और सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा डालने के आरोपों के बाद महोबा जिले में उत्तर प्रदेश राज्य कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की, जिसमें राय के नेतृत्व में एक सभा दिखाई दे रही थी और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को अवरुद्ध किया जा रहा था। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह घटना गैरकानूनी सभा और सार्वजनिक सड़क अवरोध से संबंधित थी।
सहायक पुलिस अधीक्षक वंदना सिंह ने बताया कि 22 मई 2026 को सोशल मीडिया के माध्यम से हमें एक वीडियो मिला, जिसमें कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय अपने समर्थकों के साथ गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होकर सरकारी कामकाज में बाधा डाल रहे थे और उन्होंने एक सार्वजनिक सड़क को भी अवरुद्ध कर दिया था। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी भी की। महोबा स्थित कोतवाली पुलिस स्टेशन में शिकायत प्राप्त हुई और कई धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। कार्रवाई की जा रही है।
कांग्रेस नेतृत्व द्वारा अपनाई गई राजनीतिक भाषा की आलोचना करते हुए अधिवक्ता नीरज रावत की औपचारिक शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस पार्टी की संस्कृति को दर्शाता है। शायद कांग्रेस पार्टी में इसी तरह प्रशिक्षण दिया जाता है। मैंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और एफआईआर दर्ज कर ली गई है। एफआईआर में कांग्रेस कमेटी के निवर्तमान सचिव बृजराज अहिरवार समेत 25 से 30 समर्थकों के नाम हैं।
इस बीच, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केशवन ने इन टिप्पणियों को अक्षम्य और माफ़ी के लायक नहीं बताते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना की और उन पर पार्टी सदस्यों के बीच इस तरह के व्यवहार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। केशवन ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी का पतन हो गया है और वह अजय राय जैसे भ्रष्ट तत्वों का अड्डा बन गई है... अजय राय ने प्रधानमंत्री मोदी के बारे में जिस तरह की गंदी और अभद्र टिप्पणी की है, वह अक्षम्य और माफ़ी के लायक नहीं है... यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि अजय राय की ये टिप्पणियां राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी पर किए गए शर्मनाक हमले के तुरंत बाद आई हैं। राहुल गांधी इसी तरह के अशोभनीय और असभ्य व्यवहार को बढ़ावा दे रहे हैं... कांग्रेस और राहुल गांधी को एक बात याद रखनी चाहिए कि जनता सब देख रही है।
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