Market Crash में क्या करें? घबराने की बजाय अपनाएं स्मार्ट रणनीति
ग्लोबल टेंशन, महंगाई, इंटरस्ट रेट और आर्थिक उतार-चढ़ाव के कारण बाजार में अक्सर अचानक गिरावट देखने को मिलती है. इससे आपको काफी चिंता हो सकती है जिसके चलते आप घबराहट और जल्दबाजी में आकर गलत फैसले ले सकते हैं. हालांकि, ऐसे समय में घबराने के बजाय आपको सही रणनीति अपनानी चाहिए. ऐसे में हम यहां आसान शब्दों में समझा रहे हैं कि बाजार में भारी गिरावट (Market Crash) आने पर निवेशकों को क्या करना चाहिए.
सबसे पहले Panic Selling से बचें
जब भी बाजार गिरने लगता है तो डर के मारे शेयर नहीं बेचने चाहिए क्योंकि निवेशक अक्सर यही सबसे बड़ी गलती करते हैं. बाजार कभी भी एक जैसा नहीं रहता गिरावट के बाद उसके फिर से ऊपर उठने की भी संभावना होती है. इसलिए आपको हमेशा सब्र रखना चाहिए. इसके साथ ही यह पैनिक सेलिंग से आपके लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन को नुकसान पहुंच सकती हैं. ऐसी स्थितियों में आपको खुद को याद दिलाना चाहिए कि अगर आपने लंबे समय के लिए निवेश किया है तो छोटी-मोटी उतार-चढ़ाव को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है.
मार्केट क्रेश पर SIP बंद न करें
कई लोग बाजार गिरते ही अपनी SIP रोक देते हैं. हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब बाजार क्रैश होता है तो SIP असल में और भी ज्यादा असरदार बन सकती हैं क्योंकि उस समय कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स मिल जाती हैं. इसके अलावा बाजार में गिरावट के दौरान कई मजबूत स्टॉक्स डिस्काउंटेड रेट पर उपलब्ध हो सकते हैं. साथ ही आपको सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों से भी खुद को बचाकर रखना चाहिए.
Ganga Dussehra 2026: क्यों मनाया जाता है गंगा दशहरा? 60000 पुत्रों की मुक्ति के लिए गंगा मां धरती पर आई थी, पढ़ें पौराणिक कथा
Ganga Dussehra 2026: सनातन धर्म में गंगा दशहरा पर्व का बेहद खास महत्व है. ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर गंगा दशहरा पर्व मनाया जाता है. शास्त्रों के अनुसार, इस तिथि को मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से निकलकर धरती पर आई थी. उनके धरती पर अवतरण दिवस के रुप में गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है. राजा भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा धरती पर आईं थी. गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान, पूजा-पाठ और दान का विशेष महत्व होता है. इस दिन मां गंगा की पूजा और दान करने से सभी तरह के पाप कर्मों से मुक्ति मिल जाती है. इस दिन पूजा करने के बाद मां गंगा के धरती पर आने की कथा को पढ़ना या सुनना अवश्य चाहिए. तभी गंगा दशहरा व्रत पर्व का पूरा फल प्राप्त होता है. आइए इस आर्टिकल में जानते हैं क्या है मां गंगा के धरती पर आने की कथा.
गंगा दशहरा की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा सगर की 2 रानियां केशिनी और सुमति थीं. दोनों रानियों से राजा को कोई संतान नहीं थी. इसलिए, दोनों रानियों ने हजारों सालों तक बहुत कठिन तपस्या की थी. इनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी के पुत्र महर्षि भृगु ने उन्हें वरदान दिया कि राजा की एक रानी को 60 हजार पुत्रों की प्राप्ति होगी, जबकि दूसरी रानी से एक पुत्र होगा. केशिनी ने एक पुत्र को जन्म दिया, जबकि सुमति के गर्भ से एक पिंड ने जन्म लिया, जिससे उन्हें 60 हजार पुत्र प्राप्त हुए.
राजा सगर के 60 हजार पुत्र बहुत अभिमानी थे जबकि केशिनी का पुत्र अंशुमान, धर्मपरायण, सुशील और विवक पूर्ण गुणों से संपन्न था. एक बार राजा सगर ने अपने यहां अश्वमेघ यज्ञ का आयोजन किया. राजा सगर ने अपने 60 हजार पुत्रों को यज्ञ के घोड़े को संभालने की जिम्मेदारी सौंपी. इस यज्ञ से देवराज इंद्र भयभीत हो गये, उन्होंने छल पूर्वक उस घोड़े को चुराकर कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया. जब राजा सगर के 60 हजार पुत्र उस घोड़े को खोजते-खोजते कपिल मुनि के आश्रम में पहुंचे तो उन्होंने उस घोड़े को वहां बंधा हुआ पाया. उन पुत्रों ने तपस्या में बैठे कपिल मुनि को क्रोधित होकर अपशब्द कहना शुरु कर दिया, आश्रम में उत्पात मचाना शुरु कर दिया. इससे कपिल मुनि की तपस्या भंग हो गई, उनकी आंखों से ज्वाला निकली जिससे राजा सगर के 60 हजार पुत्र भस्म हो गए. लेकिन उनकी आत्मा भट रही थी. उनकी भस्म आश्रम ही रह गई.
राजा भागीरथ ने दिलवाई पूर्वजों को मुक्ति
इन 60 हजार पुत्रों की मुक्ति के लिए राजा सगर के वंश के अनेक राजाओं ने बहुत प्रयास किए लेकिन कोई सफल न हो सका. इन्हीं के वंश में राजा दिलीप के पुत्र भागीरथ ने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए तपस्या शुरु की. इनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने कहा कि गंगा ही आपके पितरों को मोक्ष दे सकती हैं. लेकिन गंगा धरती पर आयीं तो धरती बचेगी नहीं क्योंकि उनका वेग बहुत तेज है. राजा भागीरथ ने उनसे मां गंगा को धरती पर लाने का उपाय पूछा तो उन्होंने कहा कि महादेव ही गंगा की तेज धारा को सहन कर सकते हैं. इसलिए तुम उनकी शरण में जाओं.
ब्रह्माजी के बताने पर राजा भागीरथ ने एक बार फिर महादेव को प्रसन्न करने से लिए तपस्या शुरु की. महादेव उनकी तपस्या से प्रसन्न हुए. उन्होंने अपनी जटाओं में गंगा को स्थान दिया. भगवान शिव की जटाओं में गंगा का वेग धीमा हो गया. भगवान शिव ने ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि को मां गंगा को अपनी जटाओं से धरती की ओर मुक्त किया. मां गंगा ने धरती पर आकर कपिल मुनि के आश्रम पहुंची और राजा भागीरथ के पूर्वजों को मुक्ति प्रदान की. इसके बाद गंगा सागर में जाकर मिल गईं.
गंगा दशहरा का महत्व
कथा के अनुसार, ज्येष्ठ मास की दशमी तिथि को गंगा दशहरा पर्व मनाया जाता है. यह दिन मां गंगा के धरती पर अवतरण दिवस के रुप में मनाया जाता है. इस दिन गंगा स्नान करने से हजारों राजसूय यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है. जानें-अनजाने में किए गए पाप कर्मों से छुटकारा मिल जाता है. पितरों को शांति प्राप्त होती है. मां गंगा के पूजन और दान से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. जीवन के सभी संकट और कष्ट समाप्त हो जाते हैं.
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी इस्लामिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यूज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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