Hariyali Amavasya Vrat Katha: आज है हरियाली अमावस्या, बहुरानी की इस कथा को सुनने मात्र से दूर हो जाते हैं दुख-कष्ट
Hariyali Amavasya Vrat Katha: आज यानी 12 अगस्त 2026 को श्रावण मास की हरियाली अमावस्या का व्रत रखा जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अमावस्या का विशेष महत्व होता है. इस साल हरियाली अमावस्या बुधवार के दिन पड़ रही है, जो भगवान गणेश को समर्पित दिन है. इस दिन हरे रंग की भी विशेष मान्यता होती है. हालांकि, उत्तर भारत में इस दिन को हरियाली अमावस्या कहा जा रहा है लेकिन दक्षिण भारत में आज की अमावस्या की श्रावण अमावस्या कहा जाता है. हरियाली अमावस्या का दिन स्नान-दान और व्रत का होता है. इस दिन पितृ देव को प्रसन्न करने के लिए दान किया जाता है. महादेव को आज के दिन जल अर्पित करने से आशीर्वाद मिलता है. इसके अलावा, जो भी साधक आज के दिन व्रत रख रहे हैं उन्हें इस व्रत के बारे में भी जरूर पढ़ना या सुनना चाहिए. आइए पढ़ते हैं हरियाली अमावस्या की व्रत कथा.
हरियाली अमावस्या की व्रत कथा
धार्मिक पौराणिक कथाओं के अनुसार, बहुत समय पहले की बात है. एक नगर में एक व्यापारी राजा अपनी पत्नी, पुत्र और बहू के साथ महल में सुखपूर्वक रहता था. राजपरिवार में किसी चीज की कमी नहीं थी. सभी लोग प्रेम और आनंद से अपना जीवन जी रहे थे. मगर घर की बहु का जीवन परेशानियों से घिरा रहता था. उसके ससुराल वाले हमेशा किसी न किसी छोटी-मोटी बात पर उसे फंसाते थे और दोषी बताते थे. हुआ यूं कि..
एक दिन राजा की बहू ने रसोई में रखी सारी मिठाइयां चुपके से खा लीं. जब घरवालों ने मिठाइयों के बारे में पूछा तो उसने अपनी गलती मानने के बजाय सारा दोष महल में रहने वाले चूहों पर डाल दिया. उसने कहा कि महल में रह रहे चूहों ने रसोई घर में रखी मिठाइयों को खा गए होंगे. चूहों ने बहू की यह बात सुन ली और अपने ऊपर लगाए गए झूठे आरोप से वे बहुत नाराज हुए. अब चूहों ने उसे सबक सिखाने का निश्चय किया. कुछ दिनों बाद राजा के महल में कुछ मेहमान आए थे. रात के समय जब सभी लोग सो गए, तब चूहों ने राजा की बहू की एक साड़ी चुपके से उठा ली और उसे मेहमानों के कमरे में रख दिया.
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अगले दिन जब सुबह मेहमानों की नींद खुली तो उन्होंने अपने कमरे में राजपरिवार की बहू की साड़ी देखी. उन्होंने तुरंत इसकी जानकारी राजा को दी. साड़ी मेहमानों के कमरे में मिलने की बात सुनकर राजा बहुत क्रोधित हो गए. उन्होंने बिना पूरी सच्चाई जाने बिना ही अपनी बहू के चरित्र पर संदेह कर लिया और उसे महल से बाहर निकाल दिया.
जंगल में रहने गई बहू
राजा के महल से निकाले जाने के बाद बहू बहुत दुखी हुई. उसे भी अपनी गलती का एहसास हुआ. उसे समझ आया कि अगर उसने मिठाई खाने की सच्चाई बता दी होती और झूठ बोलकर चूहों पर इलजाम नहीं लगाया होता, तो उसके साथ भी ऐसा कभी नहीं होता. अब बहू जंगल में जाकर रहने लगी. वहां उसने एक पीपल के पेड़ को अपना आसरा बनाया. वह प्रतिदिन शाम को पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाती, ज्वार बोती और श्रद्धा से पूजा करती थी. पूजा समाप्त होने के बाद वह गुड़-धानी का प्रसाद लोगों में बांटती. धीरे-धीरे उसका सारा जीवन पूजा-पाठ, सेवा और भक्ति में बीतने लगा.
राजा को हुआ आश्चर्य
एक दिन राजा शिकार से वापस लौट रहे थे. रास्ते में उनकी नजर पीपल के पेड़ के नीचे जल रहे कई दीयों पर पड़ी. उन्होंने वहां ज्वार के पौधे भी देखे. यह देखकर राजा को बहुत आश्चर्य हुआ, उन्होंने सोचा कि आखिर इस सुनसान जंगल में हर दिन इस पेड़ के नीचे दीपक कौन जलाता है और यहां ज्वार कैसे उग रही है. राजा महल लौटे और उसने अपने सैनिकों को उस स्थान का रहस्य पता लगाने का आदेश दिया. सैनिक जब पीपल के पेड़ के पास पहुंचे तो उन्होंने एक अद्भुत दृश्य देखा. वहां रखे दीये आपस में बातचीत कर रहे थे और अपनी-अपनी कहानी सुना रहे थे.
दीये ने बताई बहू की सच्चाई
जब उस दीपक की बारी आई जिसे राजा की बहू प्रतिदिन जलाती थी, तो उसने पूरी सच्चाई बता दी. उसने बताया कि बहू ने मिठाइयां खाने के बाद झूठ बोलकर चूहों को दोषी ठहराया था. इसी बात से नाराज होकर चूहों ने उसकी साड़ी मेहमानों के कमरे में रख दी थी. राजा ने बिना सच्चाई जाने ही उसे महल से निकाल दिया था.
सैनिकों ने वापस लौटकर राजा को पूरी बात बता दी. सच्चाई जानकर राजा को अपनी गलती का बहुत पछतावा हुआ. उन्होंने तुरंत अपनी बहू को सम्मान के साथ महल वापस बुलाने के लिए सैनिक भेजे. बहू के महल लौटने के बाद राजपरिवार में फिर से खुशियां लौट आईं. राजा और बहू ने मिलकर धर्म-कर्म और पूजा-पाठ किए और उनका जीवन सुख-शांति से बीतने लगा.
कथा से क्या सीख मिली?
यह कथा हमें सिखाती है कि झूठ बोलकर अपनी गलती छिपाना कभी सही नहीं होता है. सिर्फ एक झूठ कई बड़ी परेशानियों का कारण भी बन सकता. साथ ही, किसी के बारे में पूरी सच्चाई जाने बिना कोई भी निर्णय नहीं लेना चाहिए. सच्चाई और सच्ची भक्ति ही अंत में व्यक्ति को न्याय और सम्मान दिलाती है.
हरियाली अमावस्या का महत्व
हरियाली अमावस्या पर पौधे लगाना शुभ माना जाता हैत. इस दिन हर किसी को वृक्षारोपण करना चाहिए. कहते हैं कि सावन मास की अमावस्या पर हमें पीपल, नीम, आंवला बरगद और बेलपत्र का पौधा लगाना चाहिए. इन पौधों में देवताओं का वास होता है और इस शुभ दिन पर इन्हें लगाने से अक्षय पुण्य मिलता है. यह दिन पितरों की शांति का भी होता है. इसलिए, आज के दिन पिंडदान भी किया जाता है. परिवार में सुख-समृद्धि आती है.
FAQs
प्रशन.1-हरियाली अमावस्या कब है?
उत्तर- हरियाली अमावस्या आज यानी 12 अगस्त 2026, बुधवार को है.
प्रशन.2-हरियाली अमावस्या पर क्या करें?
उत्तर- हरियाली अमावस्या के दिन स्नान-दान और पितरों का तर्पण करते हैं.
प्रशन.3- हरियाली अमावस्या पर पौधे क्यों लगाएं जाते हैं?
उत्तर- हरियाली अमावस्या के वृक्षारोपण करना बेहद शुभ माना जाता है. पीपल, बरगद, नीम, आंवला और बेल का पौधा लगाना शुभ माना जाता है.
प्रशन.4- हरियाली अमावस्या कथा किस पर आधारित है?
उत्तर- हरियाली अमावस्या की कथा राजा और उसकी बहू पर आधारित है, जो बतलाती है कि बिना सच्चाई जाने निर्णय लेना गलत हो सकता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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