JPSC JSSC exam: रांची में मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे छात्र
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित ‘अनियमितताओं’ के खिलाफ जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच की अगुवाई में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मंगलवार को घोषणा की कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। यहां मंगलवार शाम को मौन जुलूस में भाग लेने वाले मंच के सदस्यों ने कहा कि उन्होंने आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया है, तथा इसकी विस्तृत योजना जल्द ही साझा की जाएगी। यहां एक पत्रकार वार्ता में जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के नेता रवींद्र पासवान ने कहा, हमें उम्मीद थी कि सोमवार के प्रदर्शन के बाद राज्य सरकार छात्रों के लिए कोई सकारात्मक संदेश लेकर आएगी।
इस प्रदर्शन में राज्य भर से 50,000 से अधिक छात्रों ने भाग लिया था। उन्होंने कहा, लेकिन हमें सरकार की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। इसलिए, हमने फैसला किया है कि जब तक हमारी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, हम जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
मंच के एक अन्य नेता पीयूष कुमार ने कहा कि वे इस मुद्दे को सुलझाने के लिए सरकार के साथ बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं। इससे पहले भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच की अगुवाई में छात्रों ने मंगलवार शाम यहां जयपाल सिंह स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक एक मौन जुलूस निकाला। इस मुद्दे पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को 18वें दिन में प्रवेश कर गया और यह जुलूस उसी आंदोलन के हिस्से के रूप में आयोजित किया गया था।
भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के कामकाज में सुधार, कई परीक्षाओं को रद्द करने तथा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या राज्य के बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक पैनल से स्वतंत्र जांच कराने की मांग को लेकर छात्र व नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थी 25 जुलाई से आंदोलन कर रहे हैं। अपनी मांगों को लेकर छह प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं, जिनमें से दो को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
TMC MLA निर्मल घोष समेत तीन पर FIR दर्ज, RG Kar डॉक्टर के जल्दबाजी में अंतिम संस्कार का मामला
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में अगस्त 2024 में एक जूनियर डॉक्टर से बलात्कार और उसकी हत्या के मामले में उसके शव का कथित तौर पर जल्दबाजी में अंतिम संस्कार किए जाने को लेकर बैरकपुर पुलिस आयुक्तालय ने तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक निर्मल घोष और दो अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। मामले में नामजद अन्य दो लोगों में पानीहाटी नगरपालिका के पार्षद सोमनाथ डे और पीड़िता के परिवार के पड़ोसी संजीव मुखर्जी शामिल हैं।
पुलिस ने बताया कि प्राथमिकी खड़दह थाने में मृतका के पिता की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। पुलिस ने बताया कि पिता ने आरोप लगाया है कि तीनों आरोपियों की निगरानी में अंतिम संस्कार जल्दबाजी में कराया गया, ताकि दोबारा पोस्टमार्टम की संभावना को रोका जा सके और कथित रूप से सबूत छिपाए जा सकें। बैरकपुर पुलिस आयुक्तालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह नया मामला डॉक्टर के बलात्कार और हत्या मामले की सीबीआई जांच से अलग है।
अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, सीबीआई आरजी कर अस्पताल में डॉक्टर के बलात्कार और हत्या मामले की जांच कर रही है, जो कोलकाता पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आता है। खड़दह थाने में दर्ज नई प्राथमिकी मृतका के परिवार की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि परिवार की सहमति के बिना शव का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया गया ताकि सबूत दबाए जा सकें। यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा डॉक्टर की दूसरी पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पुलिस को अंतिम संस्कार से जुड़ी परिस्थितियों की अलग से जांच के लिए मामला दर्ज करने का निर्देश देने के दो दिन बाद सामने आया।
31 वर्षीय स्नातकोत्तर प्रशिक्षु डॉक्टर का शव 9 अगस्त, 2024 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के एक सेमिनार कक्ष में मिला था। जांचकर्ताओं ने बाद में पुष्टि की थी कि पिछली रात उसके साथ बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, शव को पानीहाटी के एक श्मशान घाट ले जाया गया था और कथित तौर पर कतार में लगे दो अन्य शवों को पीछे छोड़ते हुए जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया गया था।
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