अधिकतर लोगों को अक्सर पेट दर्द की शिकायत होती है। वैसे कभी-कभार यह गैस, कब्ज या अपच के कारण होता है और कुछ समय के बाद ठीक हो जाता है। अगर यह दर्द पहले नाभि के आसपास महसूस हो रहा है और कुछ घंटों के अंदर पेट के निचले दाहिने हिस्से में जाकर तेज और चुभने वाला बन जाए, तो यह सामान्य दर्द नहीं भी हो सकता है।
गेस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट के मुताबिक, यह पैटर्न एक्यूट अपेंडिक्स यानी अपेंडिक्स में सूजन का क्लासिक संकेत हो सकता है। वैसे जरुरी नहीं कि यह लक्षण हर मरीज में हो। इसलिए सही समय पर डॉक्टर से जांच करा लें।
नाभि से दाईं ओर दर्द क्यों खिसकता है?
NHS के मुताबिक अपेंडिक्स बड़ी आंत से संबंधित एक छोटी उंगली जैसी थैली होती है, जो पेट के निचले दाहिने हिस्से में स्थित रहती है। शुरुआती स्टेज में जब अपेंडिक्स में सूजन शुरु होती है, तो दर्द नाभि के आसपास वाले हिस्से में महसूस होती है। जैसे-जैसे पेट में सूजन बढ़ती है और पेट की अंदरुनी परत प्रभावित होती है, दर्द अपनी वास्तिवक जगह यानी दाहिने निचले हिस्से में स्पष्ट और अधिक तेज महसूस होने लगता है। इसे मेडिकल साइस में पेन माइग्रेशन कहा जाता है और यह अपेंडिसाइटिस का महत्वपूर्ण क्लिनिकल संकेत माना जाता है।
क्या यह अपेंडिसाइटिस हो सकता है?
NIH के अनुसार, अगर दर्द के साथ भूख कम लगना, मतली, उल्टी, हल्का बुखार और चलने या खांसने पर दर्द बढ़ना जैसे लक्षण हों, तो अपेंडिसाइटिस की संभावना अधिक हो सकती है। वैसे कुछ मरीजों में शुरुआत में दर्द सहन वाला होता है, लेकिन कुछ घंटों बाद यह दर्द लगातार बढ़ जाता है। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट के अनुसार 12 से 24 घंटे के अंदर दर्द का बढ़ना और महिलाओं में लक्षण अलग हो सकते हैं, इसलिए समय रहते हुए डॉक्टर को जरुर दिखाएं।
अपेंडिसाइटिस के लक्षण क्या है?
दर्द का पेट की दाईं और खिसकना
वैसे यह दर्द नाभि से शुरु होकर कुछ घंटों के अंदर पेट दर्द के निचले दाहिने हिस्से में पहुंच जाता है और अधिक तेज हो जाता है। इसमें कई बार व्यक्ति को चलने में भी परेशानी होती है।
खांसने या हिलने पर दर्द बढ़ना
अपेंडिक्स में व्यक्ति हल्की एक्टिविटी, जैसे खांसने या झटका लगने पर भी दर्द की तीव्रता बढ़ जाती है। वैसे कई बार दर्द इतना असहनीय होता है कि व्यक्ति बैठने या करवट लेने में भी परेशानी महसूस करता है।
भूख कम लगना
आपको अचानक से खाने की इच्छा कम हो जाती है। यह अपेंडिक्स में सूजन का संकेत हो सकता है। व्यक्ति को खुद-ब-खुद खाने की इच्छा कम होती है। इसके साथ ही, वह कमजोरी महसूस करने लगता है।
मतली और उल्टी
इस स्थिति में व्यक्ति को पेट दर्द के साथ जी मिचलाना या उल्टी होना आम लक्षण है। इसमें व्यक्ति को खाने के बाद ही अजीब महसूस होने लगता है और उल्टी आने लगती है।
हल्का बुखार
अक्सर इस समस्या में हल्का बुखार जरुर आता है, जो कि स्थिति गंभीर होने पर तेज भी हो सकता है। कुछ व्यक्ति को बुखार के साथ पेट फूलने की समस्या देखने को मिलती है।
अगर अपेंडिसाइटिस का इलाज न कराया जाए, तो क्या होगा?
मैयाक्लीनिक के अनुसार, अगर अपेंडिक्स में लगातार सूजन रहने पर वह फट सकता है। जिसके बाद बैक्टीरिया पूरे पेट में फैल जाता है और पेट की अंदरूनी परत में पेरिटनाइटिस नामक गंभीर संक्रमण हो सकता है। वहीं, देखा जाता है कि कुछ मरीजों में पेट के भीतर पस (Abscess) भी बन जाती है। अगर संक्रमण खून में फैल जाए, तो सेप्सिस जैसी जानलेवा स्थिति विकसित हो सकती है। यही कारण है कि डॉक्टर अपेंडिसाइटिस के मामलों में समय सर्जरी (Appendectomy) या जरुरत अनुसार एंटीबायोटिक उपचार की सलाह दी जाती है। इसलिए पेट का दर्द पहले नाभि के आसपास शुर होकर धीरे-धीरे निचले दाहिनए हिस्से पर होने लगे, तो इसे बार-बार गैस या अपच समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह अपेंडिसाइटिस का महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।
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हर माता-पिता की यह चाहत होती है कि वह अपने बच्चे को अच्छी से अच्छी परवरिश दें। लेकिन कई बार वह बच्चे को लाड़-प्यार में इतना सिर पर चढ़ा लेते हैं कि वह माता-पिता की बात को हल्के में लेते हैं। वहीं इसके अलावा की गई छोटी-छोटी बातें गलतियां बच्चे के व्यवहार को गुस्सैल और जिद्दी बना देते हैं। बच्चों की हर बेतुकी मांग को पूरा करना, दूसरों से तुलना करना, बात-बात पर चिल्लाना जैसी चीजें शामिल हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 4 ऐसी गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो बच्चे के स्वभाव को बिगाड़ सकती हैं।
अनुशासन की कमी
जब पेरेंट्स बच्चों को न तो सही नियम सिखाते हैं और न ही रोक-टोक करते हैं। वहीं हद से ज्यादा लाड-प्यार देते हैं, तो बच्चे समझ नहीं पाते हैं कि क्या सही है और क्या गलत। वहीं दूसरी ओर बच्चे की हर बात में कमी निकाली जाए या फिर उन पर दबाव बनाया जाए, तो उनको ऐसा लगता है कि कोई उनकी बात को सुन नहीं रहा है। ऐसे में माहौल में अपनी बात को मनवाने के लिए और खुद को बचाने के लिए बच्चे गुस्सैल और जिद्दी बनते हैं।
लड़ाई-झगड़े का माहौल
घर का तनावपूर्ण माहौल बच्चे के भावनात्मक और मानसिक विकास को रोकता है। जब बच्चों को सही दिशा और प्यार की जगह सिर्फ डांट और गुस्सा मिलता है। तो उनका सेल्फ-कॉन्फिडेंस डगमगा जाता है। वह अपनी फीलिंग्स को सही तरीके से व्यक्त नहीं कर पाते हैं। फिर यह आदत धीरे-धीरे उनके स्वभाव का हिस्सा बन जाती है। वह छोटी-छोटी बातों पर चिढ़ने लगते हैं।
बचपन के बर्ताव का बड़े होने पर भी दिखता है असर
बचपन की आदतें उम्र के साथ खत्म नहीं होती हैं बल्कि बड़े होने पर वह व्यक्ति के स्वभाव का हिस्सा बन जाती है। ऐसे माहौल में पले-बढ़े बच्चे बड़े होकर अपनी छोटी-छोटी परेशानियों या फिर तनान को झेल नहीं पाते हैं। वह हर बात पर अपना बचाव करने लगते हैं और दूसरों के साथ दिल से जुड़ने में उनको समस्या आती है। बचपन का गुस्सा बड़े होने पर अविश्वास करने या फिर दूरी बनाने की आदत में बदल जाता है।
भविष्य के लिए बेहतर है अनुशासन
पेरेंट्स जिस तरह से बच्चे को संस्कार और अनुशासन सिखाते हैं, वह उनके भविष्य को आकार देता है। बच्चों से गुस्से की जगह बातचीत के जरिए अपनी समस्याओं को हल करना सिखाना जरूरी होता है। इसके लिए माता-पिता को खुद भी शांत रहना होगा। आपका अच्छा व्यवहार बच्चों के सामने सही मिशाल पेश करेगा। जब घर में समझदारी, प्यार और सही नियम होंगे, तो बच्चे भी आगे चलकर समझदार और मानसिक रूप से मजबूत बन जाएंगे।
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