महेंद्रपुर गांव पर मंडराता विस्थापन का खतरा: गंगा की लहरों में समा रहा 7000 लोगों का आशियाना
Mahendrapur Village: एक समय था जब महेंद्रपुर गांव अपनी लहलहाती फसलों, दूध और घी की संपन्नता के लिए दूर-दूर तक जाना जाता था. लेकिन आज इस गांव की तस्वीर पूरी तरह से बदल चुकी है. यहां के करीब सात हजार ग्रामीण दिन-रात एक अनजाने खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं. गंगा नदी का रौद्र रूप हर दिन गांव की उपजाऊ जमीन को लील रहा है. हालात इतने भयानक हैं कि नदी की तेज धारा अब आबादी से महज सौ मीटर की दूरी पर बह रही है, जिसकी गर्जना लोगों की रातों की नींद उड़ा रही है. आंखों के सामने मिट्टी के बड़े-बड़े टीले ताश के पत्तों की तरह नदी में समाते जा रहे हैं और ग्रामीण बेबस होकर अपने उजड़ते आशियाने को देखने के लिए मजबूर हैं.
विस्थापन का पुराना इतिहास और ग्रामीणों का दर्द
महेंद्रपुर के लिए विस्थापन का यह दर्द नया नहीं है. गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि उन लोगों पर छठी बार यह संकट मंडरा रहा है. करीब एक सदी पहले जब गांव में पहली बार कटाव हुआ था, तब चक्की बाजार के आसपास बसा यह इलाका काफी समृद्ध था, जहां स्कूल से लेकर हर बुनियादी सुविधा मौजूद थी. लेकिन गंगा के कहर ने उस पुराने महेंद्रपुर को पूरी तरह से मिटा दिया. इसके बाद साल 1962 से 1965 के बीच नदी ने फिर से अपना विकराल रूप दिखाया और हजारों की आबादी को अपना घर छोड़ना पड़ा. यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। 1972 से 1975 और फिर 1981 में भी भीषण कटाव हुआ. हर बार लोग अपनी उजड़ी हुई दुनिया को समेट कर कुछ दूरी पर फिर से घर बनाते, लेकिन गंगा की लहरें उन्हें फिर से बेघर कर देतीं.
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कई इलाकों में शरण लेने को मजबूर हुए ग्रामीण
लगातार होते कटाव ने गांव की एक बड़ी आबादी को दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया। 1990 में जब नदी ने फिर से गांव की तरफ रुख किया, तो कुछ बचाव कार्य जरूर हुए जिससे गांव पूरी तरह कटने से बच गया, लेकिन खौफ के मारे हजारों लोग गांव छोड़ गए. आज महेंद्रपुर के विस्थापित लोग दरियापुर पंचायत, आजाद नगर कासिमपुर, सोनापुर और साफापुर अंबेडकर नगर जैसे इलाकों में अपनी जिंदगी काट रहे हैं. कभी दस हजार से अधिक की आबादी वाला यह गांव आज कटते-कटते सिर्फ छह-सात हजार की आबादी तक सिमट गया है और अब यह बची हुई आबादी भी अपने वजूद की आखिरी लड़ाई लड़ रही है. बीते तीन सालों में ही गंगा करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर आ चुकी है.
बाढ़ के दिनों में नाव ही बनती है एकमात्र सहारा
बरसात के दिनों में इस गांव का संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह टूट जाता है. महीनों तक लोग अपनी गाड़ियां गांव से दूर गुप्ता-लखमीनिया बांध या सोनापुर में खड़ी करने को विवश होते हैं. ऐसे में नाव ही आवागमन का एकमात्र जरिया बचती है. सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब कोई बीमार पड़ जाता है और उसे अस्पताल ले जाना होता है. सरकारी नावों की कमी के कारण लोग निजी स्तर पर नावों की व्यवस्था करते हैं. पिछले कुछ सालों में आई बाढ़ ने यहां के मिडिल स्कूल को भी हफ्तों तक पानी में डुबोए रखा, जिससे बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई. ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि सत्ताधारी दल के नेता सिर्फ चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं, लेकिन संकट की इस घड़ी में कोई उनकी सुध लेने नहीं पहुंचता.
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आपदा के बीच भी निखर रही गांव की प्रतिभा
इतनी दुश्वारियों और बार-बार उजड़ने के बावजूद महेंद्रपुर के लोगों ने हार नहीं मानी है. यहां की मिट्टी में पलने वाली प्रतिभाएं देश-विदेश में गांव का नाम रोशन कर रही हैं. इस दियारा इलाके से निकलकर गांव के दो युवा आज अमेरिका में आईआईटीयन के तौर पर रिसर्च और नौकरी कर रहे हैं. इतना ही नहीं, हाल ही में गांव की बेटी रुचि कुमारी ने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा पास कर शानदार सफलता हासिल की है. इससे पहले भी गांव के शिवबालक प्रसाद सिंह त्यागी पुलिस अधीक्षक के पद तक पहुंचे थे. यह साबित करता है कि संसाधनों की कमी यहां के युवाओं के हौसले नहीं तोड़ पाई है.
अब बसने के लिए नहीं बची जमीन, ग्रामीणों की गुहार
लगातार कटते गांव के कारण अब ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा संकट यह है कि अगर यह गांव भी कट गया, तो वे कहां जाएंगे. गांव का रकबा पूरी तरह समाप्त हो चुका है. ग्रामीणों का दर्द है कि अगर वे बेघर होकर बांध, नेशनल हाईवे या रेलवे लाइन के किनारे शरण लेते हैं, तो सरकार उन्हें अतिक्रमणकारी कहकर भगा देगी. ग्रामीणों का सीधा सवाल प्रशासन से है कि असल अतिक्रमण तो गंगा नदी कर रही है, जो उनकी पुश्तैनी जमीन को निगलती जा रही है. ऐसे में सरकार को पहले नदी के इस अतिक्रमण को रोकना चाहिए. गांव वाले अपने स्वाभिमान के साथ अपनी ही जमीन पर जीना चाहते हैं.
बचाव कार्य को लेकर प्रशासन की पहल
हालात की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने भी कुछ कदम उठाए हैं. बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल बेगूसराय के कार्यपालक अभियंता ने अपनी टीम के साथ मौके का मुआयना किया है. उन्होंने इस बात की पुष्टि की है कि कटाव स्थल से घरों की दूरी अब काफी कम रह गई है. स्थिति की नजाकत को समझते हुए उच्चाधिकारियों को पूरे मामले की रिपोर्ट सौंप दी गई है और फिलहाल फौरी राहत के तौर पर बांस के रोल और झाड़ियों की मदद से कटाव रोकने का काम शुरू कर दिया गया है. हालांकि, गांव को बचाने के लिए यह उपाय कितना कारगर होगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा.
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'The Traitors 2' शुरू होने से एक दिन पहले अस्पताल में भर्ती हुईं श्वेता तिवारी, इस बीमारी का चल रहा इलाज
Shweta Tiwari Hospitalised: टेलिविजन की पॉपुलर एक्ट्रेस श्वेता तिवारी इन दिनों रियलिटी शो 'द ट्रेटर्स 2' (The Traitors 2) को लेकर चर्चा में हैं. ये शो 13 अगस्त से शुरू होने जा रहे हैं. लेकिन इसी बीच श्वेता तिवारी को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. शो शुरू होने से एक दिन पहले एक्ट्रेस हॉस्पिटलाइज हो गई है. अचानक एक्ट्रेस के हॉस्पिटलाइन होने की खबर ने उनके फैंस को चिंता में डाल दिया है. चलिए जानते हैं, उन्हें क्या हुआ.
श्वेता तिवारी को क्या हुआ?
मिली जानकारी के मुताबिक, 'द ट्रेटर्स 2' के प्रीमियर से पहले श्वेता तिवारी को डेंगू हो गया है इस वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. सेलिब्रिटी इंस्टाग्राम पेज विरल भयानी के मुताबिक, श्वेता डेंगू जैसी बीमारी से पीड़ित हैं. उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. फिलहाल उनका इलाज अभी जारी है और वो खतरे से बाहर हैं. हालांकि, अभी तक एक्ट्रेस के परिवार या टीम की ओर से उनकी हेल्थ को लेकर कोई जानकारी शेयर नहीं की गई है.
इन एक्ट्रेसेस को भी हुआ डेंगू
श्वेता तिवारी को डेंगू होने की खबर के बाद उनके फैंस उनकी सेहत को लेकर चिंतित हैं. वहीं, बता दें कि श्वेता से पहले टीवी एक्ट्रेस अविका गौर और एक्ट्रेस स्वरा भास्कर के भी डेंगू की चपेट में आने की खबरें सामने आई थीं. यानी मनोरंजन जगत से हाल के दिनों में अब तक इन तीन सितारों के डेंगू से संक्रमित होने की जानकारी सामने आ चुकी है. बारिश के मौसम में डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच सेलेब्स के बीमार पड़ने की खबरों ने एक बार फिर इस बीमारी को लेकर चिंता बढ़ा दी है.
'द ट्रेटर्स 2' के प्रोमो में छाई श्वेता
बता दें, लंबे समय के बाद श्वेता तिवारी कोई रियलिटी शो करने जा रही हैं. कुछ दिनों पहले ही शो का प्रोमो टीजर रिलीज किया गया था. जिसमें कंटेस्टेंट्स के बीच कुछ खास पल दिखाए गए थे. वीडियो में श्वेता तिवारी भी नजप आई थी, वो कहती हैं, 'अपने पतियों को धोखा देते हुए मैंने ही पकड़ा था' इसपर करण जवाब देते हैं, 'झूठ को पकड़ने में आप इतनी माहिर तो नहीं हो सकतीं.' अब देखना होगा कि शो में श्वेता कैसा खेलती हैं.
कब से देख सकेंगे ‘द ट्रेटर्स 2’?
‘द ट्रेटर्स 2’ की बात करे तो ये शो 13 अगस्त 2026 से प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम होने जा रहा है. इस बार शो को फिर से करण जौहर होस्ट कर रहे हैं और पहले सीजन के मुकाबले कंटेस्टेंट्स की संख्या बढ़ाकर 21 कर दी गई है. शो में खिलाड़ियों को ‘फेथफुल’ और ‘ट्रेटर्स’ के बीच बांटा जाएगा, जहां भरोसे, चालाकी और धोखे के दम पर आगे बढ़ना होगा. वहीं, शो शुरू होने से पहले ही इसके कआ वीडियोज वायरल हो रहे हैं और फैंस की एक्साइटमेंट काफी ज्यादा है.
‘द ट्रेटर्स 2’ के कंटेस्टेंट्स
इस सीजन में श्वेता तिवारी के अलावा मल्लिका शेरावत, मुनव्वर फारूकी, अभिषेक मल्हान (फुकरा इंसान), आदित्य कुलश्रेष्ठ (कुल्लू), रिया चक्रवर्ती, क्रिस्टल डिसूजा, शहनील गिल, रैपर रफ्तार, संजय कपूर, शालिनी पासी, दलीप ताहिल, साहिल सलाथिया, पारुल गुलाटी समेत कई चर्चित चेहरे नजर आएंगे. शो में टीवी, बॉलीवुड, कॉमेडी, सोशल मीडिया और फैशन से जुड़े अलग-अलग बैकग्राउंड के लोग एक ही गेम में आमने-सामने होंगे. ऐसे में इस सीजन में ड्रामा और रणनीति दोनों देखने को मिलेगी.
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