अमेरिकी महिला आर्थिक विधेयक का लक्ष्य है दक्षिण एशिया
वाशिंगटन, 13 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी कांग्रेस की सदस्य जूली जॉनसन ने दक्षिण और मध्य एशिया में महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से एक विधेयक पेश किया है। यह विधेयक इस पहल को व्यापक अमेरिकी विदेश नीति और क्षेत्रीय स्थिरता के लक्ष्यों से सीधे जोड़ता है।
ईएमपीओवर एक्ट नामक प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य दक्षिण और मध्य एशिया में महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और उन्नति को बढ़ावा देने के लिए अमेरिकी नीति स्थापित करना है, जिसे इस क्षेत्र में हमारी विदेश नीति के उद्देश्यों का अभिन्न अंग बनाया गया है।
विधेयक की घोषणा करते हुए जॉनसन ने कहा कि अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी गरीबी उन्मूलन और दीर्घकालिक क्षेत्रीय स्थिरता से गहराई से जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा, हम जानते हैं कि महिलाओं की श्रम शक्ति में भागीदारी, संपत्ति का स्वामित्व और आर्थिक सुरक्षा गरीबी उन्मूलन और दीर्घकालिक स्थिरता के प्रमुख कारक हैं, जिनमें दक्षिण और मध्य एशिया भी शामिल है। उत्तरी टेक्सास में एक बड़ा और जीवंत दक्षिण और मध्य एशियाई समुदाय रहता है। हमारे क्षेत्र और दुनिया के उस हिस्से के बीच के संबंध इस कार्य को और भी अधिक सार्थक बनाते हैं।
जॉनसन ने ट्रंप प्रशासन की नीतियों की आलोचना करते हुए आर्थिक साझेदारी और विकास पहलों के माध्यम से इस क्षेत्र में निरंतर अमेरिकी भागीदारी की वकालत की।
उन्होंने कहा, ट्रंप प्रशासन ने हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की कीमत पर एक लापरवाह सांस्कृतिक युद्ध छेड़ा है, फिर भी कांग्रेस को वैश्विक स्थिरता में समझदारीपूर्ण निवेश के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए।
जॉनसन ने कहा, “यह महत्वपूर्ण विधेयक विदेश विभाग की सार्वजनिक-निजी भागीदारी और नीतिगत प्रयासों को मजबूत करता है, और विश्व भर में महिलाओं की आर्थिक गतिशीलता, रोजगार, उद्यमिता और शिक्षा तक पहुंच को बढ़ावा देने की हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।”
विधेयक के अनुसार, कांग्रेस ने पाया कि महिलाओं की पूर्ण और निर्बाध राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक भागीदारी सार्वभौमिक मानवाधिकारों, वैश्विक समृद्धि, शांति और सुरक्षा की प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विधेयक में कहा गया है कि महिलाओं की श्रम शक्ति में भागीदारी, संपत्ति का स्वामित्व और आर्थिक सुरक्षा “विकास गुणक” के रूप में कार्य करते हैं, जो दक्षिण और मध्य एशिया में पारिवारिक वित्तीय मजबूती, शैक्षिक उपलब्धि और गरीबी में कमी को बढ़ावा देते हैं।
विधेयक के निष्कर्ष खंड में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि दक्षिण एशिया के श्रम बल में महिलाओं की हिस्सेदारी “लगभग 33 प्रतिशत है, जो विश्व में महिलाओं की श्रम शक्ति में भागीदारी की सबसे कम दरों में से एक है।” साथ ही, यह भी कहा गया है कि रोजगार में लैंगिक समानता दक्षिण एशिया के सकल घरेलू उत्पाद को “19 से 58 प्रतिशत तक” बढ़ा सकती है।
इस विधेयक के तहत विदेश मंत्री को सरकारों, व्यवसायों, नागरिक समाज समूहों और विश्वविद्यालयों को शामिल करते हुए मौजूदा महिला परिषदों और अन्य सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बनाए रखने व उनका विस्तार करने का निर्देश दिया जाएगा।
इनमें यूएस-पाकिस्तान महिला परिषद, यूएस-इंडिया महिला आर्थिक सशक्तीकरण गठबंधन और अफगान महिला आर्थिक लचीलापन गठबंधन शामिल हैं।
-आईएएनएस
पीएम
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ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने बताया क्यों खत्म नहीं हो रही जंग, बोले- 'अमेरिका में सद्भावना की कमी'
US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच लागू युद्धविराम बेहद नाजुक दौर में पहुंच चुका है. जिसके कभी भी टूटने का खतरा मंडर रहा है. ऐसे में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने अमेरिका के साथ जंग के खत्म ना होने का कारण भी बताया है. ईरानी विदेश मंत्री का कहना है कि अमेरिका के साथ सद्भावना और विश्वास की कमी जंग खत्म करने में सबसे बड़ी बाधा बन रही है. प्रेस टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मंगलवार को संयुक्त राज्य अमेरिका की कड़ी आलोचना की. उन्होंने वाशिंगटन की कार्रवाइयों पर अविश्वास को शांति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बताया.
अमेरिका के साथ जंग को लेकर क्या बोले अराघची?
ईरानी सरकारी प्रसारक के मुताबिक, विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तेहरान में नॉर्वे के उप विदेश मंत्री के साथ हुई बातचीत के दौरान अमेरिका की कड़ी आलोचना की. सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिकी पक्ष के अहंकारी रवैये और धमकी भरे, उकसाने वाले बयानों की निंदा करते हुए कहा कि "संयुक्त राज्य अमेरिका की सद्भावना की कमी और बेईमानी ही युद्ध के निर्णायक अंत में सबसे बड़ी बाधा है."
इसके साथ ही विदेश मंत्री ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य आक्रामकता को होर्मुज में मौजूदा स्थिति का मुख्य कारण और उत्पत्ति बताया. उन्होंने कहा कि ईरान के समुद्री बंदरगाहों की निरंतर नाकाबंदी के चलते बार-बार युद्धविराम का उल्लंघन हो रहा है.
ईरानी विदेश मंत्री ने आगे कहा कि ईरान, होर्मुज जलडमरूमध्य के तटीय राज्य के रूप में, अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार होर्मुज से संबंधित व्यवस्थाओं के लिए नियम बनाने पर परामर्श और विचार-विमर्श कर रहा है. इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई ने बुधवार को एक पोस्ट में ईरान के विरुद्ध अमेरिकी-इजरायली आक्रमण को केवल भूमि, संसाधनों या भू-राजनीति पर आधारित युद्ध नहीं बताया, बल्कि इसे एक ऐसा युद्ध बताया जो हमारे समय और भविष्य में 'अच्छाई' और 'बुराई' के अर्थ को निर्धारित करेगा.
ईरान पर थोपा गया ये संघर्ष- विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बाक़ाई ने आक्रमणकारियों पर युद्ध के कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि यह संघर्ष ईरान पर थोपा गया है. उन्होंने कहा, "हमारे शांतिप्रिय राष्ट्र पर जो विकराल संकट आया है, वह महज एक और संघर्ष नहीं है. एक तरफ वे लोग खड़े हैं जो युद्ध के हर कानून और बुनियादी मानवीय मर्यादा का उल्लंघन करने में आनंद लेते हैं."
उन्होंने कहा, "वे लोग जो खेल-खेल में हत्या करते हैं, जो परिवारों को सताने के लिए बच्चों का कत्ल करते हैं, जो महिलाओं के खेल के मैदानों पर मिसाइलें दागते हैं, सिर्फ उनकी विनाशकारी शक्ति का परीक्षण करने के लिए. यह युद्ध उन लोगों के बीच है जो निहत्थे जहाजों को 'मज़े के लिए' नष्ट करने का दावा करते हैं, और उन लोगों के बीच जो निर्दोषों की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं."
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ट्रंप फिर किया ईरानी सेना को नष्ट करने का दावा
इस बीच, चीन रवाना होने से पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि ईरानी सेना पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है और अमेरिका "शांतिपूर्ण तरीके से या अन्यथा" युद्ध जीतेगा. ट्रंप ने कहा, "हम इसे किसी भी तरह से जीतेंगे. हम इसे शांतिपूर्वक या अन्यथा जीतेंगे. उनकी नौसेना खत्म हो गई है, उनकी वायु सेना खत्म हो गई है, उनकी युद्ध मशीन का हर एक हिस्सा नष्ट हो गया है."
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