वाशिंगटन/सोल, 11 मई (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया की नौसेना का युद्धपोत अगले दो महीनों में अमेरिका में आयोजित होने वाली फ्लीट रिव्यू और बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेगा। दक्षिण कोरियाई नौसेना ने सोमवार को इसकी जानकारी दी।
नौसेना के आधिकारिक बयान के अनुसार, 4,400 टन वजनी आरओकेएस मुनमु द ग्रेट डिस्ट्रॉयर सोमवार को जेजू द्वीप स्थित नौसैनिक अड्डे से रवाना होगा। यह जहाज 3 से 8 जुलाई तक न्यूयॉर्क में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू में भाग लेगा।
योनहाप न्यूज एजेंसी ने बताया कि इस फ्लीट रिव्यू में कनाडा, ब्रिटेन, जापान और स्पेन सहित लगभग 50 देशों के करीब 100 नौसैनिक जहाज शामिल होंगे।
फ्लीट समीक्षा से पहले यह युद्धपोत अगले महीने के अंत में बहुराष्ट्रीय फील्ड ट्रेनिंग में भी हिस्सा लेगा। यह अभ्यास अमेरिका के वर्जीनिया राज्य स्थित नॉरफॉक के पूर्वी तट पर आयोजित होगा, जहां प्रमुख अमेरिकी नौसैनिक अड्डा स्थित है।
इस सैन्य अभ्यास की मेजबानी अमेरिकी सेकेंड फ्लीट करेगी, जो अमेरिका के पूर्वी तट और उत्तरी अटलांटिक महासागर में संचालन के लिए जिम्मेदार है। प्रशिक्षण में ब्राजील, फ्रांस और ब्रिटेन सहित 18 देशों के लगभग 30 नौसैनिक जहाज हिस्सा लेंगे।
‘मुनमु द ग्रेट’ का नाम प्राचीन सिल्ला साम्राज्य (57 ईसा पूर्व-935 ईस्वी) के एक राजा के नाम पर रखा गया है। यह जहाज मैक्सिको और कोलंबिया के बंदरगाहों पर दक्षिण कोरिया के नौसैनिक जहाजों और हथियार प्रणालियों के प्रचार संबंधी गतिविधियां भी करेगा।
वापसी के दौरान यह विध्वंसक कोलंबिया के कार्टाजेना शहर और अमेरिका के सैन डिएगो बंदरगाह पर भी रुकेगा। वहां 1950-53 के कोरियाई युद्ध में दक्षिण कोरिया के साथ लड़ने वाले सैनिकों और पूर्व सैनिकों को सम्मानित करने के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इस बीच, दक्षिण कोरिया और अमेरिका के शीर्ष रक्षा अधिकारियों के बीच सोमवार को वॉशिंगटन में बैठक भी प्रस्तावित है। इस वार्ता में युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल (ओपीसीओएन) को अमेरिका से दक्षिण कोरिया को सौंपने की प्रक्रिया और दक्षिण कोरिया की परमाणु-संचालित पनडुब्बियां हासिल करने की योजना पर चर्चा होगी।
--आईएएनएस
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक ऐसा भूचाल आया है जिसकी गूंज सिर्फ कोलकाता तक सीमित नहीं रही है बल्कि बांग्लादेश तक भी वह सुनाई देने लगी है। कोलकाता के परेड ग्राउंड में बीजेपी की पहली सरकार ने शपथ ली और शुभेंदु अधिकारी अब आधिकारिक तौर पर पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री बन चुके हैं। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की हो रही है वो है बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खास बयान की। जैसे ही शेख हसीना ने शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी की जीत पर बधाई दी, सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस और तीखी प्रतिक्रियाएं का तूफान आ गया था। बता दें कि शपथ ग्रहण समारोह के बेहद भव्य तरीके से आयोजित किया गया था। परेड ग्राउंड में हजारों समर्थकों की मौजूदगी रही और साथ ही साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मंच पर मौजूद रहे। समारोह खत्म होने के बाद पीएम मोदी ने घुटनों के बल बैठकर जनता को प्रणाम किया जिसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई। लेकिन इसी बीच असली हलचल तब शुरू हुई जब शेख हसीना का बयान सामने आया। दरअसल कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने यह कहा है कि वह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत पर बधाई देती हैं और खासतौर पर शुभेंदु अधिकारी को शुभकामनाएं देती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल के नतीजे दिखाते हैं कि जनता ने शुभेंदु अधिकारी पर भरोसा जताया है और भारत और बांग्लादेश रिश्तों में भी बंगाल की भूमिका हमेशा अहम रही है।
सबसे ज़्यादा चर्चा उस लाइन की हो रही है यहां पर कि जिसमें शेख हसीना ने जय बंगला लिखा और यही नारा लंबे समय से बंगाल और बांग्लादेश दोनों की राजनीति में बड़ा प्रतीक माना जाता रहा है। बता दें कि बंगाल की राजनीति में इस नारे को लेकर पहले भी कई बार विवाद और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप रहते रहे हैं। अब जब यही नारा शेख हसीना के बयान में सामने आया तो सोशल मीडिया पर इसे लेकर नई बहस शुरू हो चुकी है। बता दें कि बीजेपी समर्थक इसे बड़ा राजनीतिक संदेश मान रहे हैं। जबकि विरोधी इसे अलग नजरिए से देख रहे हैं। इधर सोशल मीडिया पर बांग्लादेश के कुछ कट्टरपंथी समूहों और उग्र अकाउंट्स की तरफ से गुस्से भरे प्रतिक्रिया यानी कमेंट्स भी सामने आए हैं। कई पोस्ट में शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ आपत्तिजनक बातें लिखी गई। तो वहीं भारत को लेकर भी भड़काऊ टिप्पणियां नजर आई। हालांकि इन वायरल दावों और कथित धमकियों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। लेकिन इंटरनेट पर माहौल लगातार यहां पर गमाया हुआ है। शायद यही वजह है कि अब बंगाल का यह सत्ता परिवर्तन सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं रहा है। बल्कि अब यह क्षेत्रीय राजनीति का मुद्दा भी बन चुका है। अगर शुभेंदु अधिकारी की राजनीतिक यात्रा को अगर हम देखते हैं तो यह अपने आप में बेहद दिलचस्प कहानी है।
कभी वह ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में से एक गिने जाते थे।
नंदीग्राम आंदोलन के दौरान उनकी भूमिका ने उन्हें बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा बताया था। टीएमसी सरकार में उन्होंने परिवहन और सिंचाई जैसे अहम मंत्रालय भी संवारे थे। लेकिन 2020 में उन्होंने टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था और उसके बाद बंगाल की राजनीति पूरी तरह से बदल गई थी। अब वहीं शुभेंदु अधिकारी बीजेपी के पहले बंगाल मुख्यमंत्री बन चुके हैं और इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर से बंगाल और बांग्लादेश के रिश्तों को चर्चा के केंद्र में लाकर फिर से खड़ा कर दिया है। सीमा, घुसपैठ, अल्पसंख्यक राजनीति चुनावी ध्रुवीकरण और बंगाल की बदलती राजनीतिक दिशा अब आने वाले समय में और बड़े तूफान ला सकती है।
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