IPL में नहीं देखा होगा ऐसा मैच जो RCB vs MI के बीच हुआ, रायपुर में रुकी सबकी सांसे, बेंगलुरु ने मुंबई को 2 विकेट से हराया
IPL 2026: 10 मई को आईपीएल 2026 में एक ऐसा रोमांचक मुकाबले देखने को मिला, जिसने सभी की सांसे रोक दी थी. रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और मुंबई इंडियंस के बीच भिड़ंत हुई. टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए मुंबई इंडियंस ने 166 रन बनाए. जवाब में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने आखिरी गेंद पर मैच को जीत लिया और मुंबई इंडियंस को 2 विकेट से हराया.
विराट कोहली गोल्डन डक का बने शिकार
मुंबई इंडियंस के दिए 167 रनों की लक्ष्य का पीछा करने उतरी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की पारी की शुरुआत विराट कोहली और जैकब बेथेल ने की. पहले ओवर की चौथी ही गेंद पर दीपक चाहर ने विराट कोहली को पवेलियन का रास्ता दिखाया. कोहली खाता भी नहीं खोल और गोल्डन डक का शिकार बने. इसके बाद तीसरे ओवर में दीपक चाहर ने देवदत्त पडिक्कल को आउट कर आरसीबी का दूसरा झटका दिया. पडिक्कल 11 गेंद पर 12 रन बनाकर आउट हुए.
MI के खिलाफ रजत पटीदार नहीं कर सके छक्के-चौके की बारिश
इसके बाद कार्बिन बॉश ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को तीसरा झटका दिया है. उन्होंने आरसीबी के कप्तान रजत पटीदार को पवेलियन का रास्ता दिखाया. पटीदार 8 गेंद पर 8 रन बनाकर आउट हुए. इसके बाद बेथेल और क्रुणाल पांड्या के बीच एक साझेदारी पनप रही थी, जिसे बॉश ने तोड़ा. उन्होंने बेथेल को चलता किया. बेथेल 27 गेंद पर 27 रन बनाए.
इसके बाद कार्बिन बॉश ने 16वें ओवर आरसीबी को 2 बड़े झटके दिए हैं. पहले उन्होंने जितेश शर्मा को चलता किया. जितेश 12 गेंद पर 18 रन बनाए. फिर आखिरी गेंद पर बॉश ने टिम डेविड को पवेलियन भेजा. डेविड गोल्डन डक का शिकार बने.
ऐसी रही मुंबई इंडियंस की बल्लेबाजी
मुंबई इंडियंस ने 20 ओवरों में 7 विकेट पर 166 रनों का स्कोर बनाया है. मुंबई इंडियंस के लिए तिलक वर्मा ने सबसे ज्यादा 57 रनों की पारी खेली. वहीं नमनधीर 47 रन बनाए. जबकि रोहित शर्मा ने 22 रनों का योगदान दिया. इसके अलावा मुंबई का कोई बल्लेबाज कुछ खास नहीं कर सका. आरसीबी के लिए भुवनेश्वर कुमार ने 4 विकेट चटकाए. इसके अलावा जोश हेजलवुड, रशिख सलाम और शेफर्ड को 1-1 सफलता मिली.
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केरल की जीत के बाद मुख्यमंत्री की जंग, सतीसन या राहुल गांधी के खास वेणुगोपाल, किसके सिर सजेगा ताज?
Keralam Politics: केरल विधानसभा चुनावों के नतीजों ने कांग्रेस के खेमे में नई ऊर्जा भर दी है. राज्य की 140 सीटों में से संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) ने 102 सीटों पर शानदार जीत दर्ज कर वामपंथी किले को ढहा दिया है. इस बड़ी जीत में अकेले कांग्रेस ने 63 सीटें हासिल की हैं. हालांकि, इस बड़ी चुनावी सफलता के बाद अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री का चुनाव करना है. रविवार रात तक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंच पाए थे. जैसे-जैसे सरकार बनाने की आखिरी तारीख 23 मई करीब आ रही है, तिरुवनंतपुरम से लेकर दिल्ली तक सियासी धड़कनें तेज हो गई हैं.
केसी वेणुगोपाल की मजबूत दावेदारी
इस पूरी खींचतान के केंद्र में 63 वर्षीय केसी वेणुगोपाल हैं. वेणुगोपाल पिछले कई सालों से दिल्ली में बैठकर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के संगठन महासचिव के रूप में पार्टी का कामकाज संभाल रहे हैं. उन्हें राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे का सबसे भरोसेमंद साथी माना जाता है. लोकसभा में भी वह राहुल गांधी के ठीक बगल में बैठते हैं. वेणुगोपाल का केरल का राजनीतिक सफर भी काफी प्रभावशाली रहा है. वह अलाप्पुझा से तीन बार विधायक रह चुके हैं और ओमान चांडी की सरकार में पर्यटन मंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं. 2026 के इस चुनाव में वेणुगोपाल ने पर्दे के पीछे रहकर गठबंधन को मजबूत करने और विरोधियों को साथ लाने में बड़ी भूमिका निभाई है.
क्या 63 में से 50 विधायक वेणुगोपाल के पक्ष में ?
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के 63 विधायकों में से लगभग 50 विधायक वेणुगोपाल के पक्ष में हैं. हाल ही में एआईसीसी पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक और अजय माकन ने विधायकों के साथ आमने-सामने बात की थी. एक दस्तावेज की तस्वीर भी सामने आई थी जिसमें विधायकों के समर्थन की बात कही गई थी, हालांकि आधिकारिक रूप से इसे अभी स्वीकार नहीं किया गया है. वेणुगोपाल ने खुद विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा है, इसलिए यदि वह मुख्यमंत्री बनते हैं, तो उन्हें 6 महीने के भीतर चुनाव जीतना होगा.
वीडी सतीसन और रमेश चेन्नीथला की चुनौती
वेणुगोपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती वीडी सतीसन पेश कर रहे हैं. सतीसन पिछले पांच सालों से विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे थे. उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान यह तक कह दिया था कि अगर यूडीएफ की सत्ता में वापसी नहीं हुई, तो वह राजनीति से सन्यास ले लेंगे. उनकी इस मेहनत का फल मिला और वह 20,600 से अधिक वोटों से चुनाव जीते. सतीसन को गठबंधन के प्रमुख साथी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) का भी समर्थन हासिल है. राज्य के कई हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ता सतीसन के समर्थन में सड़कों पर उतरे हैं. सतीसन ने हालांकि कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन उनकी लोकप्रियता आलाकमान के लिए अनदेखी करना मुश्किल हो रहा है.
तीसरे दावेदार कौन?
तीसरे दावेदार के रूप में रमेश चेन्नीथला का नाम है. 69 वर्षीय चेन्नीथला केरल की राजनीति के सबसे अनुभवी चेहरों में से एक हैं. वह राज्य के गृह मंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके हैं. उनके नेतृत्व में 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने राज्य की 20 में से 19 सीटें जीती थीं. हालांकि, 2021 की हार का साया अभी भी उनके राजनीतिक करियर पर बना हुआ है, जिसे उनके विरोध में एक तर्क के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है.
दिल्ली में मैराथन बैठकों का दौर
मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगाने के लिए शनिवार को दिल्ली में मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर तीन घंटे से ज्यादा समय तक बैठक चली. इस बैठक में राहुल गांधी और तीनों प्रमुख दावेदार मौजूद थे. बैठक के बाद रमेश चेन्नीथला ने कहा कि हर किसी ने अपनी राय रखी है और राहुल गांधी ने सभी की बातों को धैर्य से सुना है. उन्होंने साफ किया कि अंतिम फैसला आलाकमान ही करेगा. पार्टी के अन्य नेताओं ने भी कहा है कि जो भी फैसला दिल्ली से होगा, उसे सभी को मानना होगा.
शशि थरूर का भी नाम रहा चर्चा में
इस रेस में तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर का नाम भी चर्चा में आया था, लेकिन उन्होंने खुद ही इन अटकलों पर विराम लगा दिया. थरूर ने कहा कि मुख्यमंत्री को निर्वाचित विधायकों के बीच से ही चुना जाना चाहिए. यह बयान एक तरह से उन दावों की ओर इशारा था जो विधायकों के बीच से ही नेतृत्व की वकालत कर रहे हैं. अब देखना यह होगा कि कांग्रेस नेतृत्व संगठन को संभालने वाले वेणुगोपाल पर भरोसा जताता है या फिर जनता के बीच लोकप्रिय सतीसन को कमान सौंपता है. फैसला जो भी हो, केरल में कांग्रेस के लिए यह नई सरकार एक बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है.
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