Bihar News: बिहार के स्कूलों में अब नहीं चलेगी मनमानी, सरकार ने तय की हर क्लास की फीस
Bihar News: पिछले कुछ सालों में शिक्षा के क्षेत्र में एक चिंताजनक बदलाव देखने को मिला है. स्कूल अब पढ़ाई के केंद्र कम और व्यापार के अड्डे अधिक नजर आने लगे हैं. ड्रेस, स्टेशनरी और किताबों के नाम पर अभिभावकों की जेब ढीली करना आम बात हो गई है. देश के कोने-कोने से ऐसी शिकायतें आती रही हैं जहां स्कूल प्रशासन इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य सुविधाओं के बहाने मोटी रकम वसूलता है. इस गंभीर समस्या को देखते हुए बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है. सरकार ने अब स्कूलों की फीस की सीमा तय कर दी है ताकि शिक्षा के नाम पर हो रही लूट को रोका जा सके.
फीस निर्धारण के नए नियम
बिहार सरकार द्वारा जारी की गई नई सूची के अनुसार, कक्षा 9 से लेकर 12वीं तक के छात्रों के लिए हर मद में पैसे निश्चित कर दिए गए हैं. इसमें प्रवेश शुल्क से लेकर शिक्षण शुल्क, विकास शुल्क और यहां तक कि टीसी यानी स्थानांतरण प्रमाण पत्र का चार्ज भी शामिल है. इतना ही नहीं, लाइब्रेरी और स्पोर्ट्स एक्टिविटी के नाम पर जो मनमाने पैसे वसूले जाते थे, अब उन पर भी सरकार की सीधी नजर रहेगी. विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई भी स्कूल इस निर्धारित दर से अधिक पैसे मांगता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
कक्षा 9 और 10 के लिए शुल्क की स्थिति
सरकार के नए आदेश के मुताबिक, कक्षा 9 में नामांकन के लिए अब केवल 50 रुपये फीस निर्धारित की गई है. इसके अलावा कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए विकास शुल्क के रूप में मात्र 80 रुपये तय किए गए हैं. सरकार का मानना है कि बुनियादी शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और इसे अनावश्यक रूप से महंगा नहीं बनाया जाना चाहिए. इस कदम से ग्रामीण और मध्यम वर्गीय परिवारों को बहुत बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है जो हर साल नए सत्र में फीस के भारी बोझ तले दब जाते थे.
उच्च माध्यमिक कक्षाओं का फीस गणित
कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्रों के लिए भी फीस का पूरा ब्यौरा पेश किया गया है. 11वीं कक्षा में कला, विज्ञान और वाणिज्य यानी कॉमर्स संकाय में एडमिशन लेने वाले छात्रों को अब केवल 50 रुपये नामांकन शुल्क देना होगा. अगर छात्र ने उसी स्कूल से 10वीं की पढ़ाई की है, तो 11वीं में प्रवेश के समय उससे यह 50 रुपये भी नहीं लिए जाएंगे. शिक्षण शुल्क की बात करें तो 11वीं में कला और वाणिज्य के लिए 180 रुपये और विज्ञान के लिए 240 रुपये निर्धारित हैं. इसी तरह 12वीं में भी कला के लिए 180 रुपये और विज्ञान के लिए 240 रुपये की राशि तय की गई है. विकास शुल्क के नाम पर सभी वर्गों से 200 रुपये लिए जा सकेंगे.
आरक्षित वर्ग और नामांकन प्रक्रिया में छूट
बिहार सरकार ने इस नीति में सामाजिक न्याय का भी पूरा ध्यान रखा है. नियमों के अनुसार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों से शिक्षण शुल्क और विकास शुल्क के नाम पर कोई पैसा नहीं लिया जाएगा. इन छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने में कोई आर्थिक बाधा न आए, इसके लिए सरकार ने उन्हें पूरी तरह शुल्क मुक्त रखा है. इसके साथ ही, 11वीं में नामांकन के समय छात्रों को दिए जाने वाले फॉर्म और प्रॉस्पेक्टस का खर्च भी अब स्कूलों को खुद नहीं उठाना होगा. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा इसके लिए स्कूलों को राशि उपलब्ध कराई जाएगी.
अभिभावकों को मिलेगी बड़ी राहत
इस नए आदेश का सबसे सकारात्मक प्रभाव उन अभिभावकों पर पड़ेगा जो हर साल स्कूलों की बढ़ती फीस से परेशान रहते थे. अक्सर देखा गया है कि स्कूल सत्र शुरू होते ही नई ड्रेस और विशेष दुकानों से किताबें खरीदने का दबाव बनाते हैं. बिहार सरकार का यह फैसला स्कूलों को शिक्षा के मौलिक उद्देश्य की ओर वापस लाने का एक प्रयास है. फीस के स्ट्रक्चर को विकास कोष और छात्र कोष में बांटकर पारदर्शिता लाने की कोशिश की गई है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्थानीय स्तर पर शिक्षा अधिकारी इन नियमों का पालन कितनी कड़ाई से करवाते हैं.
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ट्रंप का आरोप: ओबामा की नीतियों से ईरान हुआ मजबूत, विमान से तेहरान भेजे गए अरबों डॉलर
नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान की नीति और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की कार्यशैली पर बड़ा हमला बोलते हुए गंभीर आरोप लगाए।
ट्रंप ने आरोप लगाया कि ओबामा सरकार की नीतियों ने ईरान को आर्थिक और राजनीतिक तौर पर मजबूत किया, जबकि ईरान वर्षों से अमेरिका को धोखा देता आ रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया, ईरान पिछले 47 वर्षों से अमेरिका और बाकी दुनिया के साथ खेल खेलता आ रहा है। हर बार बस टालमटोल करता रहा, आज नहीं, कल वाली नीति अपनाता रहा। फिर उसे सबसे बड़ा मौका तब मिला, जब बराक हुसैन ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति बने। ओबामा सिर्फ ईरान के प्रति नरम नहीं थे, बल्कि पूरी तरह उनके पक्ष में चले गए। उन्होंने इजरायल और दूसरे सहयोगी देशों को नजरअंदाज कर दिया और ईरान को फिर से मजबूत होने का बड़ा मौका दे दिया।
ट्रंप दावा किया कि ईरान को सैकड़ों अरब डॉलर दिए गए और 1.7 अरब डॉलर नकद हरे नोट विमान से तेहरान भेजे गए। ट्रंप ने दावा किया कि वॉशिंगटन डीसी, वर्जीनिया और मैरीलैंड के बैंकों से इतना पैसा निकाला गया कि ईरानी नेताओं को समझ ही नहीं आया कि उसका क्या करें। यह पैसा सूटकेस और बैगों में भरकर विमान से उतारा गया। ईरानी हैरान थे कि उन्हें इतनी बड़ी रकम मिल गई।
ट्रंप ने ओबामा को कमजोर और बेवकूफ राष्ट्रपति बताते हुए कहा कि ईरान को आखिरकार ऐसा नेता मिल गया जिसे वे आसानी से इस्तेमाल कर सकें। उन्होंने आगे कहा कि ओबामा अमेरिका के नेता के तौर पर खराब थे, लेकिन स्लीपी जो बाइडेन जितने नहीं।
ट्रंप ने आरोप लगाया कि पिछले 47 वर्षों में ईरान अमेरिका को लगातार उलझाता रहा है। सड़क किनारे बम धमाकों में अमेरिकी लोगों की जान लेता रहा है। हाल ही में 42,000 निर्दोष और निहत्थे प्रदर्शनकारियों को मार डाला। ट्रंप ने कहा कि ईरान अब अमेरिका पर हंस नहीं पाएगा, क्योंकि देश फिर से महान बन रहा है।
ट्रंप का यह बयान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के उस बयान के बाद आया, जिसमें उन्होंने अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता को उसकी कमजोरी न समझने की हिदायत दी।
रविवार को सोशल मीडिया पोस्ट में पेजेश्कियन ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, हम दुश्मन के सामने सिर नहीं झुकाएंगे। अगर बातचीत या मोलभाव की बात उठती है, तो इसका मतलब सरेंडर (आत्मसमर्पण) या पीछे हटना नहीं है। बल्कि, इसका मकसद ईरान के अधिकारों को बनाए रखना और पूरी मजबूती के साथ राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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