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Chief Minister Salary in India Per Month: किस राज्य के CM की जेब में आती है सबसे ज्यादा सैलरी, अभी करें चैक

Chief Minister Salary in India Per Month: भारत में जब भी चुनाव होते हैं, तो जनता के मन में यह उत्सुकता रहती है कि उनके राज्य की कमान संभालने वाले मुख्यमंत्री को कितनी तनख्वाह मिलती होगी. हाल ही में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और असम समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद नई सरकारों का गठन हो चुका है. ऐसे में यह सवाल फिर से चर्चा के केंद्र में है कि इन दिग्गजों को मिलने वाला मासिक वेतन कितना है. अक्सर लोग यह समझते हैं कि प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति की तरह सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों का वेतन भी केंद्र ही तय करता होगा, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. भारत में मुख्यमंत्रियों की सैलरी राज्यों के हिसाब से बहुत अलग होती है और इसके पीछे कानूनी कारण भी मौजूद हैं.

विधानसभा के पास होता है वेतन तय करने का अधिकार

देश के अलग अलग राज्यों में मुख्यमंत्रियों की सैलरी में अंतर होने की मुख्य वजह हमारा संविधान है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(5) के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया है कि राज्य की विधानसभा को अपने मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के वेतन और भत्ते तय करने का पूरा अधिकार है. इसी वजह से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की सैलरी केरल के मुख्यमंत्री से अलग हो सकती है. राज्य अपनी आर्थिक स्थिति और विधायी फैसलों के आधार पर समय समय पर इस सैलरी में संशोधन भी करते रहते हैं. यही कारण है कि देशभर में मुख्यमंत्रियों का वेतन एक समान न होकर काफी विविधताओं से भरा रहता है.

विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों का वेतन गणित

अगर हम हाल ही में चर्चा में रहे राज्यों की बात करें तो पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के मुख्यमंत्रियों का वेतन लगभग एक समान स्तर पर है. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री को हर महीने करीब 2.10 लाख रुपए की सैलरी मिलती है. वहीं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री का वेतन लगभग 2.05 लाख रुपए के आसपास रहता है. केरल के मुख्यमंत्री को प्रति माह लगभग 1.85 लाख रुपए मिलते हैं. असम के मुख्यमंत्री की बात करें तो उनका वेतन इन राज्यों की तुलना में थोड़ा कम है. हालांकि यह आंकड़े पूरी तरह स्थिर नहीं होते क्योंकि महंगाई भत्ते और अन्य संशोधनों के कारण इनमें थोड़ा बहुत बदलाव आता रहता है.

सबसे ज्यादा सैलरी वाला है ये राज्य 

पूरे देश की तुलना की जाए तो तेलंगाना वह राज्य है जहां मुख्यमंत्री को सबसे ज्यादा वेतन और भत्ते दिए जाते हैं. तेलंगाना में मुख्यमंत्री की कुल सैलरी और भत्ते मिलाकर यह आंकड़ा करीब 4 लाख रुपए महीने तक पहुंच जाता है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों में भी मुख्यमंत्रियों को अच्छी खासी सैलरी मिलती है. पूरे भारत में मुख्यमंत्रियों की मासिक सैलरी का दायरा 1.25 लाख रुपए से शुरू होकर 4 लाख रुपए तक जाता है. यह अंतर राज्यों के अपने वित्तीय नियमों और पारित कानूनों पर निर्भर करता है.

सिर्फ सैलरी ही नहीं अन्य खास सुविधाएं भी मिलती हैं

मुख्यमंत्री को मिलने वाले कुल लाभ का अंदाजा सिर्फ उनके मूल वेतन से नहीं लगाया जा सकता है. सैलरी के अलावा उन्हें कई तरह के भत्ते और विश्वस्तरीय सरकारी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं. इसमें रहने के लिए एक आलीशान सरकारी बंगला, चौबीसों घंटे सुरक्षा व्यवस्था, निजी स्टाफ, देश विदेश की यात्रा के लिए विशेष सुविधा और मुफ्त मेडिकल सेवाएं शामिल होती हैं. इसके साथ ही कई राज्यों में विशेष सत्कार भत्ता और निर्वाचन क्षेत्र भत्ता भी दिया जाता है. इन सभी सुख सुविधाओं को जोड़ने के बाद मुख्यमंत्री का पूरा पैकेज उनकी मूल सैलरी से कहीं अधिक बड़ा हो जाता है. मुख्यमंत्री पद की गरिमा और सुरक्षा को देखते हुए यह सभी सुविधाएं बेहद जरूरी मानी जाती हैं.

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क्रूज शिप पर हंटावायरस संक्रमण के बाद भारत सरकार अलर्ट, निगरानी बढ़ाई गई

नई दिल्ली, 8 मई (आईएएनएस)। क्रूज शिप एमवी होंडियस पर हंटावायरस संक्रमण के मामलों के सामने आने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी है। सरकार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों के साथ मिलकर स्थिति पर करीबी नजर रख रही है।

एनडीटीवी के हवाले से एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों के साथ मिलकर उच्चस्तरीय निगरानी तंत्र सक्रिय कर चुका है, ताकि वायरस के संभावित प्रसार को रोका जा सके।

अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (आईएचआर) ढांचे के तहत साझा की गई प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जहाज पर हंटावायरस संक्रमण के आठ संभावित मामले सामने आए हैं, जिनमें से पांच की प्रयोगशाला जांच में पुष्टि हो चुकी है।

इसके अलावा, इस महीने की शुरुआत में डब्ल्यूएचओ को प्रकोप की जानकारी मिलने के बाद अब तक तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है।

स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, संक्रमण का संबंध हंटावायरस के एंडीज स्ट्रेन से माना जा रहा है। यह स्ट्रेन अन्य कई हंटावायरस प्रकारों के विपरीत सीमित स्तर पर इंसान से इंसान में फैल सकता है।

हालांकि अधिकारियों ने कहा कि वायरस का प्रसार आमतौर पर लंबे और बेहद करीबी संपर्क में आने से होता है और फिलहाल वैश्विक स्तर पर जोखिम कम माना जा रहा है।

इसके बावजूद स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हैं, क्योंकि वायरस की ऊष्मायन अवधि (इंक्यूबेशन पीरियड) लंबी होती है। इससे जहाज पर मौजूद यात्रियों और क्रू सदस्यों में आगे भी नए मामले सामने आने की आशंका बनी हुई है।

डब्ल्यूएचओ फिलहाल आईएचआर तंत्र के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया समन्वयित कर रहा है। इसके तहत डायग्नोस्टिक सहायता मजबूत करने, महामारी विज्ञान संबंधी आकलन करने और यात्रियों व क्रू के सुरक्षित उतरने तथा आगे की यात्रा सुनिश्चित करने के उपाय किए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि आईएचआर चैनलों से मिली जानकारी के अनुसार जहाज पर दो भारतीय नागरिक भी मौजूद हैं। दोनों में फिलहाल कोई लक्षण नहीं हैं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के तहत निगरानी में रखा गया है।

स्थिति को देखते हुए एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल संचालन केंद्र और एनसीडीसी ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक भी की। इसमें आईडीएसपी और आईएचआर-एनएफपी इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लेकर तैयारियों और स्थिति का आकलन किया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि वह डब्ल्यूएचओ और अन्य वैश्विक स्वास्थ्य साझेदारों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए एहतियाती सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय शुरू कर दिए गए हैं।

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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