शशांक सिंह क्यों छोड़ रहे हैं इतने आसान Catch? अब हेनरिक क्लासेन का ड्रॉप किया, कब तक बर्दाश्त करेंगे कप्तान श्रेयस अय्यर
IPL 2026: इंडियन प्रीमियर लीग 2026 का 49वां मैच 6 मई को सनराइजर्स हैदराबाद और पंजाब किंग्स के बीच राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जा रहा. पंजाब किंग्स के कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया, जिसके बाद 10 ओवरों में ही पंजाब किंग्स के गेंदबाजों ने 4 कैच छोड़ दिए. शशांक सिंह इस मैच में भी हेनरिक क्लासेन का एक आसान सा कैच ड्रॉप छोड़ दिया. इस सीजन शशांक सिंह अब तक 5 आसान कैच ड्रॉप कर चुके हैं.
शशांक सिंह ने छोड़ा हेनरिक क्लासेन का कैच
शशांक सिंह ने खेले जा रहे मुकाबले में सनराइजर्स हैदराबाद के विस्फोटक बल्लेबाज हेनरिक क्लासेन का कैच सिर्फ 9 रन के स्कोर पर छोड़ दिया. यह कैच बहुत आसान था, लेकिन उनके हाथ से गेंद फिसल गई. आईपीएल 2026 में 9 मैचों में शशांक द्वारा छोड़ा गया यह छठा कैच था. फील्डिंग के हिसाब से शशांक सिंह के लिए यह सीजन बेहद ही खराब रहा है. उन्होंने अपनी टीम पंजाब किंग्स और फैंस को अपने खराब फील्डिंग से काफी निराश किया है.
आईपीएल 2026 में 6 कैच छोड़ चुके हैं शशांक सिंह
लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ मुकाबले में तो शशांक सिंह ने 3 अहम कैच ड्रॉप कर दिए थे. उन्होंने निकोलस पूरन, एडेन मार्कराम और मुकुल चौधरी का कैच छोड़ दिया था. इसके बाद दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ मैच में शशांक ने केएल राहुल जैसे बड़े खिलाड़ियों का कैच छोड़ दिया था, जिसके बाद केएल राहुल ने 152 रनों की पारी खेली.
Well well well, it's that man again! ????????
— Star Sports (@StarSportsIndia) May 6, 2026
Shashank Singh has dropped yet another catch down, and #PBKS camp is in utter disbelief! ????#TATAIPL Revenge Week 2026 ➡️ #SRHvPBKS | LIVE NOW ????https://t.co/4Te1XilHXg pic.twitter.com/lSVDGKfiBg
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Punjab News: बंदूक छोड़ कलम थामेंगे पंजाब के गबरू, भटके हुए नौजवानों को मुख्यधारा में लाएगी पुलिस
Punjab News: पंजाब पुलिस ने राज्य में बढ़ते संगठित अपराध और गैंगस्टर संस्कृति पर नकेल कसने के लिए एक बेहद मानवीय और प्रभावी रास्ता चुना है. राज्य की पुलिस केवल अपराधियों को जेल भेजने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह उन युवाओं को बचाने की भी कोशिश कर रही है जो अनजाने में या किसी आकर्षण के चलते अपराध की दलदल में फंस सकते हैं. इसी सोच के साथ पंजाब पुलिस ने अपने ‘युवा सांझ कार्यक्रम’ के दायरे को और बढ़ा दिया है.
क्या है इस पहल का मुख्य उद्देश्य
इस पहल का मुख्य उद्देश्य कम्युनिटी पुलिसिंग के जरिए समाज के आखिरी छोर पर बैठे उस युवा तक पहुंचना है, जिसे सही मार्गदर्शन की जरूरत है. स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस गुरप्रीत कौर देओ के नेतृत्व में कम्युनिटी अफेयर्स डिविजन इस पूरे प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए लगातार बैठकें कर रहा है.
दो स्तरों पर काम कर रही रणनीति
पंजाब पुलिस की यह रणनीति दो स्तरों पर काम कर रही है. एक तरफ ‘गैंगस्टरों पर वार’ अभियान के तहत अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है, तो दूसरी तरफ ‘युवा सांझ’ के जरिए निवारक कदम उठाए जा रहे हैं. पुलिस का मानना है कि युवाओं को आतंकवाद, गन कल्चर और नशाखोरी जैसे नकारात्मक प्रभावों से दूर रखने के लिए उन्हें सकारात्मक विकल्प देना जरूरी है. पिछले चार महीनों के भीतर पुलिस ने पांच बड़े संवाद सत्र आयोजित किए हैं. आने वाले आठ महीनों में 11 और ऐसे सत्र आयोजित करने की योजना है ताकि पंजाब के हर जिले और गांव तक इस संदेश को पहुंचाया जा सके.
तकनीक आधारित नेटवर्क सबसे बड़ी ताकत
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत इसका तकनीक आधारित नेटवर्क है. पंजाब पुलिस ने सोशल मीडिया का विश्लेषण करके उन युवाओं की पहचान की है जो ऑनलाइन माध्यमों से हिंसा या गैंगस्टर संस्कृति की तरफ आकर्षित हो रहे थे. अब तक लगभग 2,358 ऐसे युवाओं की पहचान की गई है, जिनमें से 1,519 की प्रोफाइल खास तौर पर तैयार किए गए ‘युवा सांझ सॉफ्टवेयर’ पर अपलोड की गई है. इस सॉफ्टवेयर की मदद से पुलिस इन युवाओं की गतिविधियों और उनके व्यवहार में आने वाले बदलावों पर नजर रखती है. यह केवल निगरानी नहीं है, बल्कि एक सुरक्षा कवच है जो उन्हें बड़ी गलती करने से पहले रोकता है.
क्या है पूरे कार्यक्रम का आधार?
पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस गौरव यादव ने इस पहल के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि पुलिस एक संतुलित रणनीति पर काम कर रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि मनोवैज्ञानिक प्रोफाइलिंग और परिवार की भागीदारी इस पूरे कार्यक्रम का आधार है. पुलिस की टीमें न केवल युवाओं से बात करती हैं, बल्कि उनके माता-पिता को भी इस प्रक्रिया में शामिल करती हैं. जिन युवाओं को ज्यादा मदद की जरूरत होती है, उन्हें उप-मंडल स्तर के सामुदायिक केंद्रों में भेजा जाता है ताकि उनकी निरंतर काउंसलिंग की जा सके. लक्ष्य साफ है कि अपराधी नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाए और युवाओं को उनके चंगुल से बचाया जाए.
जिला स्तर पर बनाई गई विशेष कमेटियां
जमीनी स्तर पर इस काम को अंजाम देने के लिए जिला स्तर पर विशेष कमेटियां बनाई गई हैं. इन समितियों का नेतृत्व जिले के बड़े पुलिस अधिकारी करते हैं. इसमें केवल पुलिस वाले ही नहीं होते, बल्कि समाज के प्रतिष्ठित लोग, रिटायर्ड अधिकारी, मनोवैज्ञानिक और एनजीओ के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं. यह सब मिलकर एक ऐसा माहौल तैयार करते हैं जहां एक भटका हुआ युवा बिना डरे अपनी बात कह सके. अब तक 1,109 युवाओं ने काउंसलिंग सत्रों में भाग लिया है, जिससे उनके जीवन के प्रति नजरिए में सकारात्मक बदलाव देखा गया है.
युवाओं को आत्मनिर्भर बनान भी जरूरी
युवाओं को केवल सही रास्ता दिखाना ही काफी नहीं है, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी जरूरी है. इसीलिए पंजाब पुलिस इस कार्यक्रम के तहत कौशल विकास पर भी जोर दे रही है. पंजाब स्किल डेवलपमेंट मिशन के सहयोग से युवाओं को अलग-अलग ट्रेड में ट्रेनिंग दी जा रही है. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें रोजगार के अवसरों से जोड़ा जाता है और जरूरत पड़ने पर आर्थिक सहायता भी मुहैया कराई जाती है. इससे युवाओं का ध्यान अपराध से हटकर अपने भविष्य को संवारने की तरफ जाता है.
जमीनी स्तर पर मिलेगी बड़ी सफलता
फाजिल्का के एसएसपी गुरमीत सिंह का कहना है कि इस पहल ने जमीनी स्तर पर अपराध दर को कम करने में बड़ी सफलता हासिल की है. यह देश में किसी भी राज्य की पुलिस द्वारा शुरू की गई अपनी तरह की अनोखी पहल है. पुलिस ने युवाओं को उनकी गलतफहमियां दूर करने और जीवन की हकीकत को समझने के लिए एक मजबूत मंच दिया है. आज पंजाब का युवा कानून का पालन करने वाले समूह का हिस्सा बन रहा है, जो आने वाले समय में राज्य की तरक्की में बड़ी भूमिका निभाएगा. पंजाब पुलिस की यह कोशिश न केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रही है, बल्कि एक सुरक्षित समाज का निर्माण भी कर रही है.
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