विजय की आपदा में DMK-AIADMK ढूंढ रही अवसर, सरकार बनाने के लिए दोनों के बीच शुरू हुई बातचीत- सूत्र
तमिलनाडु की राजनीति में एक चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है. विधानसभा चुनाव के बाद किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. हालांकि सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी टीवीके के प्रमुख विजय ने राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है. सूत्रों की मानें तो फिलहाल उन्हें इजाजत नहीं मिली है क्योंकि उनके पास अभी संख्याबल पूरा नहीं है. 5 विधायकों का साथ उन्हें अब भी चाहिए. इस बीच सूत्रों के हवाले से एक और बड़ी खबर सामने आई है. दरअसलस डीएमके औऱ एआईएडीएमके विजय की इस आपदा में अवसर ढूंढ रहे हैं. दोनों के बीच सरकार बनाने को लेकर संपर्क और बातचीत शुरू हो गई है.
तमिलनाडु में चुनाव नतीजों के बाद सत्ता के समीकरण तेजी से बदलते दिख रहे हैं. इसी बीच द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के 74 और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के 53 विधायकों के बीच बातचीत शुरू होने की खबर ने सियासी हलचल बढ़ा दी है.
क्या बन सकता है ‘असंभव’ गठबंधन?
DMK और AIADMK पारंपरिक रूप से कट्टर प्रतिद्वंद्वी रहे हैं. दशकों से दोनों दल एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते आए हैं. ऐसे में इनका साथ आना 'राजनीतिक असंभव' माना जाता रहा है. लेकिन जब सत्ता का गणित फंस जाता है, तो राजनीति में नए समीकरण बनते देर नहीं लगती. अगर दोनों दल साथ आते हैं, तो यह तमिलनाडु की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है.
किन मुद्दों पर बन सकती है सहमति?
1. स्थिर सरकार की जरूरत
सबसे बड़ा मुद्दा राजनीतिक स्थिरता का है। किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं होने की स्थिति में गठबंधन सरकार ही विकल्प बनता है. DMK और AIADMK दोनों ही नहीं चाहेंगे कि राज्य में राजनीतिक अस्थिरता या राष्ट्रपति शासन की नौबत आए.
2. विकास और प्रशासनिक निरंतरता
राज्य में चल रही बड़ी परियोजनाओं इन्फ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्री और वेलफेयर स्कीम्स को जारी रखने के लिए साझा एजेंडा बन सकता है. दोनों दल विकास को प्राथमिकता देने पर सहमत हो सकते हैं, भले ही उनकी विचारधारा अलग रही हो.
3. केंद्र-राज्य संबंध
केंद्र सरकार के साथ तालमेल भी एक अहम फैक्टर हो सकता है. अगर दोनों दल किसी साझा रणनीति पर सहमत होते हैं, तो फंडिंग, प्रोजेक्ट अप्रूवल और प्रशासनिक फैसलों में तेजी आ सकती है.
4. क्षेत्रीय पहचान और भाषा का मुद्दा
तमिल अस्मिता और क्षेत्रीय पहचान दोनों दलों के लिए अहम रही है. हिंदी थोपने जैसे मुद्दों पर दोनों का रुख पहले भी मिलता-जुलता रहा है। यह एक कॉमन ग्राउंड बन सकता है.
5. पावर शेयरिंग फॉर्मूला
सबसे बड़ा पेंच मुख्यमंत्री पद और मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर होगा. संभावित फॉर्मूला यह हो सकता है...
रोटेशनल सीएम (ढाई-ढाई साल)
डिप्टी सीएम का पद
मंत्रालयों का बराबर बंटवारा
अगर इस पर सहमति बनती है, तो गठबंधन की राह आसान हो सकती है.
क्या हैं बड़ी चुनौतियां?
कैडर का विरोध: दोनों दलों के जमीनी कार्यकर्ता इस गठबंधन को स्वीकार नहीं कर सकते
वैचारिक टकराव: दशकों की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को खत्म करना आसान नहीं
नेतृत्व का अहंकार: बड़े नेताओं के बीच तालमेल बनाना चुनौतीपूर्ण होगा
DMK और AIADMK के बीच बातचीत तमिलनाडु की राजनीति में नया अध्याय खोल सकती है. हालांकि यह गठबंधन अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन अगर दोनों दल सत्ता के लिए समझौता करते हैं, तो यह “विचारधारा से ज्यादा सत्ता” वाली राजनीति का बड़ा उदाहरण बन सकता है. कुलमिलाकर अब नजर इस बात पर है कि क्या ये बातचीत सिर्फ दबाव बनाने की रणनीति है या वाकई तमिलनाडु में एक नया राजनीतिक प्रयोग जन्म लेने जा रहा है.
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भारत और वियतनाम के वित्त मंत्रियों के बीच हुई अहम बैठक, व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर
नई दिल्ली, 6 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार को भारत और वियतनाम के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस दौरान, दोनों देशों के वित्त मंत्रियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, बदलते भू-राजनीतिक हालात और भविष्य में सहयोग के नए रास्तों पर विस्तार से चर्चा की।
वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वियतनाम के वित्त मंत्री न्गो वान तुआन से नई दिल्ली में मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच 10 साल पूरे कर चुके व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
मंत्रालय ने बताया कि बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और मौजूदा भू-राजनीतिक चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। साथ ही, आर्थिक स्थिरता और मजबूती बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने के तरीकों पर चर्चा की गई। वियतनाम ने खास तौर पर टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, ऊर्जा और फार्मा सेक्टर में भारत के साथ सहयोग बढ़ाने में गहरी रुचि दिखाई।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वियतनाम की मजबूत आर्थिक नीतियों और सुधारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन सुधारों के चलते वियतनाम की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और वह ग्लोबल वैल्यू चेन में बेहतर तरीके से जुड़ रहा है।
वहीं, वियतनाम के वित्त मंत्री ने भारत की मजबूत आर्थिक नीतियों की तारीफ की और खास तौर पर टैक्स सुधार, एमएसएमई सेक्टर के विकास और सार्वजनिक निवेश के जरिए आर्थिक वृद्धि के मॉडल को समझने में रुचि जताई।
बैठक में भारत की ओर से एमएसएमई सेक्टर को समर्थन देने वाली योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई। इसमें टैक्स सुधार, ब्याज सब्सिडी, सरकारी खरीद नीतियां और वर्कफोर्स के लिए एआई स्किलिंग जैसी पहल शामिल हैं।
साथ ही, सरकार द्वारा टैक्स सिस्टम को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए अपनाए गए फेसलेस असेसमेंट और टेक्नोलॉजी-आधारित सिस्टम का भी जिक्र किया गया।
वित्त मंत्री सीतारमण ने पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म के बारे में भी जानकारी दी, जो इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए एक आधुनिक और टेक्नोलॉजी-आधारित सिस्टम है। इस मॉडल में वियतनाम ने भी खास रुचि दिखाई।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने रक्षा मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान वियतनाम की अपनी यात्रा को भी याद किया और दोनों देशों के बीच मजबूत और सौहार्दपूर्ण संबंधों को रेखांकित किया। बैठक में भारत-वियतनाम व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने तथा प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।
--आईएएनएस
डीबीपी
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