गर्मियों में बुरा हाल सिर्फ हम सबका ही नहीं, बल्कि गाड़ियों पर इसका असर देखने को मिलता है। जब पारा 40-50 डिग्री तक पहुंच जाता है, तो कार भी काफी प्रभाव पड़ता है। लंबे ट्रैफिक जाम, तपती सड़कें और लगातार चलते एसी की वजह से गाड़ी के हर हिस्से पर डबल दबाव देखने को मिलता है।
गर्मी में अक्सर में इंजन का ओवरहीट होना, टायर फेलियर और बैटरी से जुड़ी समस्याएं काफी देखने को मिलती है। यदि इंजन खराब हुआ तो आपका लाखों का खर्चा हो सकता है। अगर आप इन सभी समस्याओं से बचना चाहते हैं, तो ड्राइविंग की आदतों में सुधार करने से बड़े-बड़े हादसे टाले जा सकते हैं। यदि आप गर्मी में रोजाना अपनी कार का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपको काफी सावधानी बरतने की जरुरत है।
कार का कूलेंट लेवल को चेक करते रहें
भयंकर गर्मी में कार का इंजन ठंडा रहना बेहद जरुरी है। TOI की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि, यदि कूलेंट कम है या बहुत पुराना हो गया है, तो वह अपना काम ठीक से नहीं कर सकता है। इससे इंजन ओवरहीट हो सकता है। इसलिए समय-समय पर कूलेंट का लेवल जरुर चेक करें। इतना ही नहीं, कार के इंजन ऑयल और ब्रेक ऑयल को भी चेक करते रहे हैं। यदि इंजन ऑयल पुराना हो गया या गाढ़ा हो गया, तो वह इंजन को ठीक से लुब्रिकेंट नहीं कर पाएगा, जिससे परफॉर्मेंस पर काफी असर दिखेगा।
AC की सर्विस जरुर कराएं
समर सीजन में सबसे जरुरी एसी है। ऐसे AC खराब हो जाए तो गर्मी के दिनों में कार में सफर करना काफी मुश्किल हो जाता है। इसलिए सर्विस कराना बेहद ही जरुरी है। यदि कूलिंग कम लग रही है, तो एसी की गैस और फिल्टर चेक कराएं। साफ फिल्टर हवा ठंडी देगा और माइलेज भी बढ़ाएगा।
टायरों की हवा पर ध्यान दें
आग उगलने वाली गर्मी में तपती सड़कों के कारण टायर के अंदर की हवा का प्रेशर अपने आप बढ़ने लगता है। इसलिए गर्मियों में टायरों में बहुत ही ज्यादा हवा न भराएं। वरना ज्यादा हवा के कारण टायर फट सकता है। हर 10 से 15 दिनों में टायरों का प्रेशर चेक जरुर कराएं।
इंजन गर्म होने की चेतावनी को नजरअंदाज न करें
बार-बार डैशबोर्ड पर इंजन गर्म होने वाली लाइट जल रही है, तो इसको जरा-सा भी नजरअंदाज न करें। ऐसे में कार को तुरंत छांव में रोक दें और इंजन को ठंडा होने दें। इस स्थिति में बिल्कुल भी जबरदस्ती गाड़ी न चलाएं, इंजन पूरी तरह से खराब हो सकता है और आपको लाखों का खर्चा हो सकता है। इसके साथ ही कभी भी धूप में गाड़ी का पार्क न करें। धूप में कार खड़ी होने से गाड़ी अंदर से बहुत तेज गर्म हो जाती है, इसलिए हमेशा कार को किसी पेड़ के नीचे या कवर्ड पार्किंग में खड़ा करें।
बैटरी का ध्यान रखें
अधिक गर्मी बैटरी के अंदर के लिक्विड को सुखा देती है। इसलिए बैटरी जल्दी खराब हो सकती है। ऐसे में आपकी गाड़ी स्टार्ट होने में समय ले रही है या लाइटें डिम है, तो समझें कि बैटरी खराब होने वाली है। भयंकर गर्मी में बैटरी फेल होना आपको मुसीबत में डाल देगी।
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लम्बे संघर्ष और राजनैतिक उतार-चढ़ाव के बाद भारतीय जनता पार्टी को बिहार में पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाने का अवसर मिल गया है। यह अवसर राजग गठबंधन के माध्यम से आया है। अभी तक बिहार में भाजपा जद (यू) के साथ छोटे भाई की भूमिका मे थी अब बड़े भाई की भूमिका में आ गई है। जब बिहार से विधायक नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए तभी से बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की रणनीति पर काम चल रहा था। बिहार के निवर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपना मन बनाया और राज्यसभा जाने के लिए तैयार हो गए। नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने से लेकर सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण तक सारी प्रक्रिया बहुत ही सधी हुई रही जिससे न तो विरोधी दलों को कोई अवसर मिला और न ही पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समर्थक नाराज होकर कोई गठबंधन विरोधी कार्य कर सके। बिहार में नीतीश कुमार के युग का नयी पीढ़ी के सम्राट को हस्तांतरण हो गया है। यह निश्चित है कि बिहार में केवल मुख्यमंत्री का केवल चेहरा बदला है सरकार नीतीश कुमार जी के निर्देशन व उनके किए गए कार्यों के आधार पर ही चलने वाली है।
सम्राट चौधरी के साथ जदयू के दो नेताओं विजय चौधरी और विजेंद्र यादव ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। मंत्रिमंडल विस्तार बाद में किया जाएगा। अभी तक भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में गठबंधन की राजनीति में ऐसा सत्ता परिवर्तन किसी भी राज्य में कहीं भी नहीं देखा गया है। यह नेतृत्व परिवर्तन भारतीय राजनीति में एक नया इतिहास लिख रहा है। मुख्यमंत्री के पद पर सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण के बाद भाजपा नेताओं ने दावा किया कि जैसे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने बिहार की जनता की 18 वर्षों से भी अधिक समय तक सेवा की वैसे ही अब सम्राट चौधरी भी 20 वर्षों तक बिहार की सेवा करने वाले हैं।
कौन हैं सम्राट चौधरी- सम्राट चौधरी बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बने हैं और राजनीतिक दृष्टिकोण से युवा हैं। सम्राट चौधरी ओबीसी के कोइरी समुदाय से आते हैं। सम्राट चौधरी को बिहार के सवर्ण समाज मे भी पसंद किया जाता है। सवर्णों के मुद्दों पर भी वह मुखर रहे हैं। सम्राट की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत 1990 में हुई और वे लालू यादव की राजद से वर्ष 2000 में परबत्ता विधानसभा सीट से विधायक और लालू यादव की सरकार में मंत्री बने। 2014 में वो नीतीश कुमार जी के साथ आ गए किन्तु जदयू के साथ उनकी मित्रता अधिक दिनों तक नहीं चली और वह 2017 में बीजेपी में शामिल हुए। वर्ष 2023 में बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाए गये। जनवरी 2024 में वह नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री बने और कई महत्वपूर्ण विभागों वित्त, स्वास्थ्य, शहरी विकास, पंचायती राज को संभाला। मात्र आठ से नौ वर्षों मे ही उनकी भाजपा मे तेज तरक्की पार्टी की ओबीसी राजनीति और रणनीति का अहम हिस्सा है। भाजपा ने सम्राट चौधरी का चयन काफी सोच समझ कर किया है ताकि पिछड़ों-दलितों-महादलितों की सियासत में कोई नया खालीपन न पैदा हो।
सम्राट चौधरी को भले ही भाजपा में बाहर से आया नेता बताया जा रहा हो किंतु वह काफी दमदार हैं और उनकी शैली आक्रामक है। वह लालू यादव के समीकरण को ध्वस्त करने की क्षमता रखते हैं क्योकि उनकी राजनीति का सफर लालू यादव की राजद से ही प्रारंभ हुआ था और फिर वह नीतीश की पार्टी में भी गए और उसके बाद जीतनराम मांझी के साथ रहे। सम्राट के माध्यम से भाजपा ने पश्चिम बंगाल के ओबीसी समाज को एक बहुत बड़ा राजनैतिक संदेश भेजा है। बंगाल में ओबीसी समाज का मतदता बड़ी संख्या में है। वर्ष 2027 की शुरूआत मे ही उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में विधानसभा चुनाव होंगे उसको भी ध्यान में रखा गया है। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि जातीय जनगणना की उथल पुथल के बीच बीजेपी को एक कद्दावर ओबीसी नेता की तलाश थी जो सम्राट चौधरी पूरी कर रहे हैं।
- मृत्युंजय दीक्षित
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