अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गूंजी बंगाल की जीत, ट्रंप ने पीएम मोदी को दी बधाई
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में बीजेपी की बंपर जीत अब देश की सीमाओं से निकलकर वैश्विक चर्चा का विषय बन गई है. इस ऐतिहासिक नतीजे पर दुनिया भर की नजरें टिकी हैं और कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं व मीडिया संस्थानों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. इसी कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हो गए हैं. उन्होंने भी पीएम मोदी बंगाल जीत पर बधाई दी है.
ट्रंप ने दी मोदी को बधाई
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस जीत के लिए बधाई दी है. व्हाइट हाउस के प्रवक्ता के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, ट्रंप ने हाल ही में फोन पर बातचीत के दौरान मोदी के नेतृत्व की सराहना की और कहा कि भारत उनके नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है. इस जीत को उन्होंने “ऐतिहासिक और निर्णायक” बताया.
पीएम मोदी का संदेश, नए युग की शुरुआत
चुनावी नतीजों के बाद नई दिल्ली में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इसे पश्चिम बंगाल के लिए “नए युग की शुरुआत” करार दिया. उन्होंने कहा कि जनता ने भयमुक्त, विकास-प्रधान और विश्वास से भरे शासन के लिए मतदान किया है. मोदी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि दशकों का इंतजार अब खत्म हुआ है और जनता ने उस सपने को साकार करने का अवसर दिया है.
टीएमसी के गढ़ में सेंध
इस चुनाव में बीजेपी ने टीएमसी के पारंपरिक गढ़ों में भी मजबूत प्रदर्शन किया. पार्टी ने शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अपना आधार बढ़ाया, जिससे पहली बार राज्य में सरकार बनाने का रास्ता साफ हुआ. यह परिणाम बंगाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है.
वैश्विक मीडिया की नजर
दुनिया के बड़े मीडिया संस्थानों ने भी इस नतीजे को खास महत्व दिया है. BBC ने इसे प्रधानमंत्री मोदी की सबसे चुनौतीपूर्ण जीतों में से एक बताया. वहीं The Guardian ने विश्लेषकों के हवाले से लिखा कि यह जीत लंबे समय से चल रहे राजनीतिक प्रोजेक्ट और रणनीतिक विस्तार का परिणाम है.
2029 की राजनीति पर असर
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, यह जीत बीजेपी की नीतियों जैसे समान नागरिक संहिता और बुनियादी ढांचे के विकास को और गति दे सकती है. साथ ही, इसे 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
यूरोपियन मीडिया की प्रतिक्रिया
जर्मन ब्रॉडकास्टर Deutsche Welle ने इसे ऐतिहासिक करार देते हुए लिखा कि बीजेपी पहली बार पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच गई है, जो पार्टी के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम है.
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Uncovered with Manoj Gairola: सुवेंदु अधिकारी या दिलीप घोष… Bengal में CM पद की रेस में सबसे आगे कौन?
Uncovered with Manoj Gairola: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल है कि वहां मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा. 9 मई को नई सरकार बन जाएगी. लेकिन इससे पहले बीजेपी विधायक दल के नेता को चुनने की खानापूर्ति होगी और इस खास मीटिंग के लिए ऑब्जर्वर बनकर खुद अमित शाह कोलकाता जाएंगे. ऐसा शायद पहली बार होगा कि अमित शाह ऑब्जर्वर बने हों. ऐसा इसलिए कि बंगाल यूनिट में सीएम के नाम को लेकर एक राय नहीं है. अनकवर्ड के आज के एपिसोड में हम आपको बताएंगे कि बंगाल बीजेपी में किस नेता की दावेदारी में कितना दम है? और कौन सीएम की रेस में आगे निकल सकता है.
बीजेपी में CM पद के लिए कई उम्मीदवार
वैसे तो बंगाल बीजेपी में CM पद के लिए कई काबिल नेता हैं और बीजेपी सरप्राइज सीएम चुनने के लिए भी जानी जाती है. लेकिन फिर भी, एक नाम ऐसा है जो इस रेस में सबसे आगे है. खास बात ये है कि बीजेपी में इस नेता का इतिहास 6 साल से पुराना नहीं है. आपने सही अंदाजा लगाया हम बात कर रहे हैं सुवेंदु अधिकारी की. लेकिन उनकी दावेदारी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बंगाल बीजेपी के ही एक पुराने नेता हैं, जिनका नाम है दिलीप घोष.
दिलीप घोष भी हैं बड़े दावेदार
पिछले एक दशक की राजनीति को देखें तो बंगाल में बीजेपी के सबसे बड़े नेता हैं दिलीप घोष. दिलीप घोष की जड़ें RSS से जुड़ी हैं और बंगाल में बीजेपी को खड़ा करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई है. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने जब बंगाल में 18 सीटें जीतकर अपना बेस्ट परफोर्मेंस दिया था, तब दिलीप घोष ही बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष थे. उनके ही कार्यकाल में बीजेपी 2021 के विधानसभा चुनाव में 77 सीटें जीतकर पहली बार मुख्य विपक्षी दल बनी थी. और यहीं से बंगाल में ये मैसेज गया था कि टीएमसी को टक्कर देने वाली पार्टी, बीजेपी ही है. इस बार के विधानसभा चुनाव में खड़गपुर सदर सीट से दिलीप घोष 30 हजार से ज्यादा वोटों से जीते हैं. ऐसे में वो मुख्यमंत्री पद के स्वाभाविक दावेदार हैं.
सुवेंदु अधिकारी CM की रेस में सबसे आगे
वहीं सुवेंदु अधिकारी को बीजेपी में आए सिर्फ 6 साल ही हुए हैं लेकिन इन 6 सालों में वो ममता बनर्जी को सीधी टक्कर देने वाले लीडर के तौर पर स्थापित हुए हैं. बता दें कि साल 2020 में वो टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे. उन्हें ममता बनर्जी का राइट हैंड माना जाता था. ममता को सत्ता दिलाने में 2007 के नंदीग्राम आंदोलन का बड़ा रोल था और सुवेंदु अधिकारी इस पूरे आंदोलन के सूत्रधार थे. नंदीग्राम सुवेंदु का गढ़ था और इस आंदोलन के बाद टीएमसी में सुवेंदु का कद लगातार बढ़ता गया. लेकिन जब ममता ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को ज्यादा पावर देनी शुरू की तो सुवेंदु साइड लाइन होते चले गए और 2021 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हो गए. सुवेंदु की बगावत से ममता इतनी नाराज हुईं कि खुद उनके खिलाफ चुनाव लड़ने नंदीग्राम पहुंच गईं. सुवेंदु ने जमकर टक्कर दी और चुनाव भी जीता.
सुवेंदु ने खुद को किया साबित
ममता को हराने के बाद सुवेंदु ने बीजेपी में अपने आप को साबित कर दिया था. बीजेपी ने भी उनकी उपयोगिता को समझते हुए उन्हें विधानसभा में नेता विपक्ष बनाया. इसके बाद वो पांच साल तक ममता को टक्कर देते रहे. इस बार के चुनाव में ममता की हिम्मत नहीं हुई कि वो नंदीग्राम में फिर से सुवेंदु से टकराएं. लेकिन सुवेंदु ममता से टकराने के लिए उनके गढ़ भवानीपुर पहुंच गए और उन्हें 15 हजार वोटों से हरा दिया.
बीजेपी का क्या होगा दांव?
एक तरह से बंगाल में ममता के खिलाफ बीजेपी की लड़ाई का चेहरा सुवेंदु ही बने. अब सवाल उठता है कि क्या बीजेपी किसी दूसरी पार्टी से आए नेता को सीएम बनाने का दांव चलेगी? क्या इससे पार्टी कैडर को निराशा नहीं होगी? तो इसका जवाब है कि बीजेपी ऐसा दांव चलने से अब परहेज नहीं करती है. वो दौर अलग था जब बीजेपी में संघ या पार्टी कैडर से जुड़े लोगों को ही सीएम बनाया जाता था. लेकिन अब बीजेपी बदल चुकी है और उसके लिए जीत ही सबसे बड़ा पैमाना है.
पार्टी की साफ रणनीति
असम में 2016 में बीजेपी ने AGP से आए सर्वानंद सोनोवाल को सीएम बनाया था और 5 साल बाद कांग्रेस से आए हिमंता बिस्वा सरमा सीएम बना दिए गए .उन्हीं की लीडरशिप में अब बीजेपी ने असम में बेहतरीन प्रदर्शन किया है. यही नहीं बिहार के जाति समीकरणों को साधने के लिए बीजेपी ने अपने पुराने नेताओं को नजरअंदाज किया और RJD-JDU से आए सम्राट चौधरी को सीएम बना दिया. इन बातों से पता चलता है कि बीजेपी को किसी आउटसाइडर को सीएम बनाने में कोई दिक्कत नहीं है. बशर्ते वो किसी भी तरीके से जीत दिलाने में सक्षम हो.
सुवेंदु के लिए क्या है चुनौती?
बंगाल में इस लिहाज से सुवेंदु का दावा मजबूत है. लेकिन बीजेपी में उनके विरोधी भी हैं. इनमें सबसे पहला नाम आता है मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य का. ये बीजेपी के पुराने नेता हैं और संगठन पर इनकी मजबूत पकड़ है.
महिला उम्मीदवार भी रेस में
बंगाल की राजनीति में महिला फैक्टर भी एक बड़ा रोल निभाता आया है. इसीलिए महिला नेताओं के नाम भी सीएम की रेस में हैं. महाभारत में द्रौपदी का किरदार निभा चुकीं रूपा गांगुली ने सोनारपुर साउथ से जीत हासिल की है और अग्निमित्रा पॉल आसनसोल साउथ से विधायक बनीं हैं. ऐसे में इन दोनों के नाम भी दावेदारों में शामिल हैं. हमने आपको बंगाल के सीएम पद के दावेदारों के संभावित नाम बताए है. लेकिन जिसे सीएम बनना है वो नाम तो अमित शाह के दिमाग में होगा ही. वो इसी नाम का खुलासा करने के लिए कोलकाता जा रहे हैं ताकि उनकी मौजूदगी में बाकी दावेदार भी इस नाम को स्वीकार करें.
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