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Uncovered with Manoj Gairola: सुवेंदु अधिकारी या दिलीप घोष… Bengal में CM पद की रेस में सबसे आगे कौन?

Uncovered with Manoj Gairola: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल है कि वहां मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा. 9 मई को नई सरकार बन जाएगी. लेकिन इससे पहले बीजेपी विधायक दल के नेता को चुनने की खानापूर्ति होगी और इस खास मीटिंग के लिए ऑब्जर्वर बनकर खुद अमित शाह कोलकाता जाएंगे. ऐसा शायद पहली बार होगा कि अमित शाह ऑब्जर्वर बने हों. ऐसा इसलिए कि बंगाल यूनिट में सीएम के नाम को लेकर एक राय नहीं है. अनकवर्ड के आज के एपिसोड में हम आपको बताएंगे कि बंगाल बीजेपी में किस नेता की दावेदारी में कितना दम है? और कौन सीएम की रेस में आगे निकल सकता है.

बीजेपी में CM पद के लिए कई उम्मीदवार

वैसे तो बंगाल बीजेपी में CM पद के लिए कई काबिल नेता हैं और बीजेपी सरप्राइज सीएम चुनने के लिए भी जानी जाती है. लेकिन फिर भी, एक नाम ऐसा है जो इस रेस में सबसे आगे है. खास बात ये है कि बीजेपी में इस नेता का इतिहास 6 साल से पुराना नहीं है. आपने सही अंदाजा लगाया हम बात कर रहे हैं सुवेंदु अधिकारी की. लेकिन उनकी दावेदारी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बंगाल बीजेपी के ही एक पुराने नेता हैं, जिनका नाम है दिलीप घोष.

दिलीप घोष भी हैं बड़े दावेदार

पिछले एक दशक की राजनीति को देखें तो बंगाल में बीजेपी के सबसे बड़े नेता हैं दिलीप घोष. दिलीप घोष की जड़ें RSS से जुड़ी हैं और बंगाल में बीजेपी को खड़ा करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई है. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने जब बंगाल में 18 सीटें जीतकर अपना बेस्ट परफोर्मेंस दिया था, तब दिलीप घोष ही बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष थे. उनके ही कार्यकाल में बीजेपी 2021 के विधानसभा चुनाव में 77 सीटें जीतकर पहली बार मुख्य विपक्षी दल बनी थी. और यहीं से बंगाल में ये मैसेज गया था कि टीएमसी को टक्कर देने वाली पार्टी, बीजेपी ही है. इस बार के विधानसभा चुनाव में खड़गपुर सदर सीट से दिलीप घोष 30 हजार से ज्यादा वोटों से जीते हैं. ऐसे में वो मुख्यमंत्री पद के स्वाभाविक दावेदार हैं.

सुवेंदु अधिकारी CM की रेस में सबसे आगे

वहीं सुवेंदु अधिकारी को बीजेपी में आए सिर्फ 6 साल ही हुए हैं लेकिन इन 6 सालों में वो ममता बनर्जी को सीधी टक्कर देने वाले लीडर के तौर पर स्थापित हुए हैं. बता दें कि साल 2020 में वो टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे. उन्हें ममता बनर्जी का राइट हैंड माना जाता था. ममता को सत्ता दिलाने में 2007 के नंदीग्राम आंदोलन का बड़ा रोल था और सुवेंदु अधिकारी इस पूरे आंदोलन के सूत्रधार थे. नंदीग्राम सुवेंदु का गढ़ था और इस आंदोलन के बाद टीएमसी में सुवेंदु का कद लगातार बढ़ता गया. लेकिन जब ममता ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को ज्यादा पावर देनी शुरू की तो सुवेंदु साइड लाइन होते चले गए और 2021 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हो गए. सुवेंदु की बगावत से ममता इतनी नाराज हुईं कि खुद उनके खिलाफ चुनाव लड़ने नंदीग्राम पहुंच गईं. सुवेंदु ने जमकर टक्कर दी और चुनाव भी जीता.

सुवेंदु ने खुद को किया साबित

ममता को हराने के बाद सुवेंदु ने बीजेपी में अपने आप को साबित कर दिया था. बीजेपी ने भी उनकी उपयोगिता को समझते हुए उन्हें विधानसभा में नेता विपक्ष बनाया. इसके बाद वो पांच साल तक ममता को टक्कर देते रहे. इस बार के चुनाव में ममता की हिम्मत नहीं हुई कि वो नंदीग्राम में फिर से सुवेंदु से टकराएं.  लेकिन सुवेंदु ममता से टकराने के लिए उनके गढ़ भवानीपुर पहुंच गए और उन्हें 15 हजार वोटों से हरा दिया.

बीजेपी का क्या होगा दांव?

एक तरह से बंगाल में ममता के खिलाफ बीजेपी की लड़ाई का चेहरा सुवेंदु ही बने. अब सवाल उठता है कि क्या बीजेपी किसी दूसरी पार्टी से आए नेता को सीएम बनाने का दांव चलेगी? क्या इससे पार्टी कैडर को निराशा नहीं होगी? तो इसका जवाब है कि बीजेपी ऐसा दांव चलने से अब परहेज नहीं करती है. वो दौर अलग था जब बीजेपी में संघ या पार्टी कैडर से जुड़े लोगों को ही सीएम बनाया जाता था. लेकिन अब बीजेपी बदल चुकी है और उसके लिए जीत ही सबसे बड़ा पैमाना है.

पार्टी की साफ रणनीति

असम में 2016 में बीजेपी ने AGP से आए सर्वानंद सोनोवाल को सीएम बनाया था और 5 साल बाद कांग्रेस से आए हिमंता बिस्वा सरमा सीएम बना दिए गए .उन्हीं की लीडरशिप में अब बीजेपी ने असम में बेहतरीन प्रदर्शन किया है. यही नहीं बिहार के जाति समीकरणों को साधने के लिए बीजेपी ने अपने पुराने नेताओं को नजरअंदाज किया और RJD-JDU से आए सम्राट चौधरी को सीएम बना दिया. इन बातों से पता चलता है कि बीजेपी को किसी आउटसाइडर को सीएम बनाने में कोई दिक्कत नहीं है. बशर्ते वो किसी भी तरीके से जीत दिलाने में सक्षम हो.

सुवेंदु के लिए क्या है चुनौती?

बंगाल में इस लिहाज से सुवेंदु का दावा मजबूत है. लेकिन बीजेपी में उनके विरोधी भी हैं. इनमें सबसे पहला नाम आता है मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य का. ये बीजेपी के पुराने नेता हैं और संगठन पर इनकी मजबूत पकड़ है.

महिला उम्मीदवार भी रेस में

बंगाल की राजनीति में महिला फैक्टर भी एक बड़ा रोल निभाता आया है. इसीलिए महिला नेताओं के नाम भी सीएम की रेस में हैं. महाभारत में द्रौपदी का किरदार निभा चुकीं रूपा गांगुली ने सोनारपुर साउथ से जीत हासिल की है और अग्निमित्रा पॉल आसनसोल साउथ से विधायक बनीं हैं. ऐसे में इन दोनों के नाम भी दावेदारों में शामिल हैं. हमने आपको बंगाल के सीएम पद के दावेदारों के संभावित नाम बताए है. लेकिन जिसे सीएम बनना है वो नाम तो अमित शाह के दिमाग में होगा ही. वो इसी नाम का खुलासा करने के लिए कोलकाता जा रहे हैं ताकि उनकी मौजूदगी में बाकी दावेदार भी इस नाम को स्वीकार करें.

यह भी पढ़ें- Uncovered with Manoj Gairola: Pakistan को US का सपोर्ट क्यों? ट्रंप के बयानों से खुली अमेरिका की असली नीति; India के लिए खतरा!

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव से वैश्विक व्यापार पर असर, हजारों जहाज फंसे

वॉशिंगटन, 5 मई (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ गया है, जिसकी वजह से हजारों कमर्शियल जहाज फंस गए हैं। इससे दुनिया भर का व्यापार प्रभावित हो रहा है और ऊर्जा सप्लाई पर भी खतरा मंडरा रहा है। इसका असर भारत जैसे उन देशों पर भी पड़ सकता है जो ज्‍यादातर सामान और तेल आयात पर निर्भर हैं।

अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि 1,550 से ज्यादा कमर्शियल जहाजों पर सवार लगभग 22,500 नाविक इस समय इस इलाके से आगे नहीं जा पा रहे हैं, क्योंकि ईरान की तरफ से हमलों और समुद्री जहाजों को लेकर धमकियों का खतरा बना हुआ है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच एक बहुत ही संकरा लेकिन बेहद अहम समुद्री रास्ता है। यहां से दुनिया के लगभग 20 प्रत‍िशत तेल की खपत गुजरती है, इसलिए इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक माना जाता है।

इस स्थिति की वजह से तेल टैंकरों और कार्गो जहाजों की भारी कतार लग गई है। इससे तेल की सप्लाई में देरी और पूरी सप्लाई चेन पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है। शिपिंग कंपनियां और बीमा कंपनियां भी अब जोखिम को दोबारा आंक रही हैं, जिससे माल ढुलाई और बीमा की लागत बढ़ सकती है।

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह नागरिक जहाजों को परेशान कर रहा है। हर देश के नाविकों को धमका रहा है और एक अहम समुद्री रास्ते को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय दबाव या वसूली जैसा तरीका बताया।

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने प्रोजेक्ट फ्रीडम शुरू किया है, जिसका मकसद समुद्री व्यापार को फिर से सामान्य बनाना है। इसके तहत अमेरिकी नौसेना और वायुसेना के संसाधन जहाजों को इस रास्ते से सुरक्षित निकलने में मदद कर रहे हैं।

दो अमेरिकी झंडे वाले कमर्शियल जहाज पहले ही अमेरिकी डेस्ट्रॉयर जहाजों की सुरक्षा में इस रास्ते से गुजर चुके हैं। इससे यह दिखाया गया है कि रास्ता खुला है और अब दुनिया भर के सैकड़ों जहाज आगे बढ़ने की तैयारी में हैं।

जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन एयर फ़ोर्स जनरल डैन केन ने कहा कि पिछले सात हफ्तों में ईरान ने बार-बार कमर्शियल शिपिंग को धमकाया और हमला किया है, ताकि समुद्री व्यापार को लगभग रोककर वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया जा सके।

उन्होंने बताया कि ईरान ने सीजफायर के बाद भी नौ बार कमर्शियल जहाजों पर हमला किया है। दो कंटेनर जहाजों को जब्त किया है और अमेरिकी बलों पर दस से ज्यादा हमले किए हैं। हालांकि ये हमले अभी बड़े युद्ध की सीमा तक नहीं पहुंचे हैं।

अमेरिका ने इस इलाके में 15,000 से ज्यादा सैनिक, युद्धपोत, हेलिकॉप्टर और 100 से अधिक विमान तैनात किए हैं, ताकि एक सुरक्षित समुद्री गलियारा बनाया जा सके और जहाजों की सुरक्षा की जा सके।

हेगसेथ ने कहा कि सीजफायर खत्म नहीं हुआ है और इस मिशन को उन्होंने रक्षात्मक कदम बताया, जिसका मकसद सिर्फ समुद्री रास्ते को सुरक्षित रखना है।

भारत जो खाड़ी देशों से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल आयात करता है। अगर यह रुकावट लंबे समय तक चलती है तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। आयात खर्च बढ़ेगा और महंगाई का दबाव भी महसूस हो सकता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय से एक बड़ा भू-राजनीतिक तनाव वाला क्षेत्र रहा है, लेकिन मौजूदा संकट हाल के हफ्तों में बढ़े तनाव और एक कमजोर सीजफायर के बाद सामने आया है जो अभी भी लागू है।

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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