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“वह विधानसभा कैसे जाएंगी? अब वह विधायक नहीं हैं..” ममता बनर्जी के इस्तीफे नहीं देने वाले बयान पर संबित पात्रा तीखा कटाक्ष
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों ने ऐसी सियासी आग लगाई है, जिसकी लपटें अब भी शांत होने का नाम नहीं ले रही हैं। नतीजों के बाद, राज्य का सियासी पारा अप्रत्याशित रूप से चढ़ गया है, जहाँ निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी हार के बावजूद झुकने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगी, मानो यह किसी निर्णायक युद्ध की अंतिम घोषणा हो। उनके इस अडिग बयान ने भारतीय जनता पार्टी को हमलावर होने का पूरा मौका दे दिया है, जिसने तुरंत ही ममता बनर्जी की मंशा और उनके संवैधानिक दर्जे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भाजपा के तेज-तर्रार सांसद संबित पात्रा ने ममता बनर्जी के बयान पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि ममता जी कह रही हैं कि वह विधानसभा भी नहीं जाएंगी। पात्रा ने चुभते हुए सवाल दागे, “वह अब वहां कैसे जाएंगी? वह भवानीपुर सीट से चुनाव हार चुकी हैं। अब वह विधायक नहीं हैं।” पात्रा ने लोकतंत्र के मूल सिद्धांत पर प्रहार करते हुए कहा कि जनता के जनादेश से लोकतांत्रिक रूप से हारने के बाद, विधानसभा में प्रवेश का अधिकार स्वाभाविक रूप से समाप्त हो जाता है। यह टिप्पणी सीधे तौर पर ममता के संवैधानिक अधिकार पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
ममता बनर्जी ने अपनी हार को किया अस्वीकार
दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने अपनी हार को स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दो टूक कहा, “मैं इस्तीफा नहीं दूंगी, मैं हारी नहीं हूं।” उन्होंने चुनाव परिणामों को एक गहरी साजिश का हिस्सा करार दिया, जिसका सीधा आरोप चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर मढ़ा गया। ममता बनर्जी ने दावा किया कि इन दोनों संस्थाओं ने मिलकर पूरी चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया है। खुद को ‘फ्री बर्ड’ बताते हुए उन्होंने एक नया मोर्चा खोलने का ऐलान किया। उनका कहना था कि अब वह राष्ट्रीय स्तर पर ‘इंडिया गठबंधन’ को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेंगी, मानो यह हार एक नई राजनीतिक उड़ान का आगाज हो।
संबित पात्रा का ‘इंडिया गठबंधन’ पर तंज
संबित पात्रा ने यहीं नहीं रुके, उन्होंने ‘इंडिया गठबंधन’ की अंदरूनी कलह पर भी तंज कसने का कोई मौका नहीं छोड़ा। पात्रा ने ममता बनर्जी के इस दावे पर सवाल उठाया कि उन्होंने गठबंधन में सबसे बात की है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही थी। पात्रा के अनुसार, पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान राहुल गांधी खुलेआम ममता बनर्जी के खिलाफ बयानबाजी कर रहे थे, और ममता भी कांग्रेस पर हमला बोलने से बाज नहीं आ रही थीं। उन्होंने ममता बनर्जी के इन बयानों को ‘अराजकता’ की संज्ञा देते हुए कहा कि हार के बाद ऐसी बातें करना भारतीय लोकतंत्र के लिए कतई सही नहीं है। यह सिर्फ राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया के सम्मान पर भी सीधा आघात है।
राजनीतिक गलियारों में इस बयानबाजी ने एक नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां हार के बावजूद कुर्सी छोड़ने से इनकार करना संवैधानिक परंपराओं पर सवाल उठाता है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल इसे जनादेश का अपमान बता रहे हैं। ममता बनर्जी का खुद को ‘फ्री बर्ड’ कहना और राष्ट्रीय राजनीति में नई भूमिका तलाशना, उनकी भविष्य की रणनीति का संकेत है, लेकिन फिलहाल राज्य में यह सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। जनता महंगाई की मार झेलने के साथ-साथ अब इस सियासी खींचतान को भी देख रही है, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय बन चुका है। चुनाव परिणाम भले ही घोषित हो गए हों, पर पश्चिम बंगाल की राजनीति में उठा तूफान अभी शांत होता नहीं दिख रहा है, और यह देश के सियासी समीकरणों पर भी गहरा असर डाल सकता है।
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