सैन्य कार्रवाई राजनीतिक संकट का समाधान नहीं है: अराघची ने अमेरिका और यूएई को दी चेतावनी
तेहरान, 5 मई (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते दिन होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों के ट्रांजिट के लिए प्रोजेक्ट फ्रीडम की शुरुआत की। अमेरिका के इस मिशन को लेकर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि प्रोजेक्ट फ्रीडम ही प्रोजेक्ट डेडलॉक है। इसके अलावा ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात को चेतावनी देते हुए कहा कि सैन्य कार्रवाई किसी भी राजनीतिक संकट का हल नहीं है।
अमेरिका और यूएई को चेतावनी देते हुए अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, होर्मुज की घटनाओं से यह साफ हो गया है कि राजनीतिक संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है। पाकिस्तान की अच्छी कोशिश से बातचीत आगे बढ़ रही है। इसलिए अमेरिका को इस बात से सावधान रहना चाहिए कि उसके दुश्मन उसे फिर से दलदल में न घसीट लें। संयुक्त अरब अमीरात को भी ऐसा ही करना चाहिए। प्रोजेक्ट फ्रीडम ही प्रोजेक्ट डेडलॉक है।
इसके अलावा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह बताने से मना कर दिया कि यूएस और ईरान के बीच हुआ सीजफायर जारी रहेगा या नहीं। अमेरिकी मीडिया सीएनएन ने बताया कि कंजर्वेटिव रेडियो होस्ट ह्यूग हेविट ने जब पूछा कि क्या ईरान के साथ सीजफायर खत्म हो गया है और क्या सोमवार रात से हमले फिर से शुरू हो सकते हैं, तो ट्रंप ने कहा, “मैं आपको यह नहीं बता सकता।”
फॉक्स न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरानी सेना को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने स्ट्रेट या फारस की खाड़ी में अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश की तो वे धरती से मिट जाएंगे। बाद में इंटरव्यू में उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान के साथ युद्ध, मिलिट्री तौर पर, असल में खत्म हो चुका है।
वहीं डेनमार्क की शिपिंग और लॉजिस्टिक्स कंपनी मेर्सक ने सोमवार को कंफर्म किया कि उसका एक जहाज अमेरिकी मिलिट्री प्रोटेक्शन के साथ होर्मुज स्ट्रेट से गुजरा और उसके सभी क्रू मेंबर सुरक्षित हैं। लॉजिस्टिक्स कंपनी मेर्सक के एक बयान के मुताबिक, फरवरी में जब युद्ध शुरू हुआ, तब अलायंस फेयरफैक्स नाम का यह जहाज फारस की खाड़ी में था और जाने में असमर्थ था।
मेर्सक ने कहा कि अमेरिकी सेना ने हाल ही में उनसे संपर्क किया था। इसकी वजह से जहाज को अमेरिकी सेना की सुरक्षा में खाड़ी से बाहर निकलने का मौका मिला। मेर्सक के बयान के आखिर में कहा गया, “मेर्सक इस ऑपरेशन को मुमकिन बनाने में अमेरिकी सेना के प्रोफेशनलिज्म और असरदार सहयोग के लिए उनका शुक्रिया अदा करता है और कंपनी अलायंस फेयरफैक्स के अपनी नॉर्मल कमर्शियल सर्विस पर लौटने का इंतजार कर रही है।”
--आईएएनएस
केके/एएस
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बंगाल में पहली बार BJP सरकार: मुख्यमंत्री कौन होगा? रेस में 5 बड़े नाम, सबसे आगे कौन
पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। लंबे समय तक सत्ता में रहीं ममता बनर्जी की जगह अब नया चेहरा कौन होगा, इस पर चर्चाएं अपने चरम पर हैं। भारतीय जनता पार्टी की जीत के बाद पार्टी नेतृत्व पर यह जिम्मेदारी आ गई है कि वह ऐसा नेता चुने, जो न सिर्फ संगठन को मजबूत करे बल्कि बंगाल की जटिल सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों को भी संभाल सके।
बीजेपी ने चुनाव के दौरान किसी एक मुख्यमंत्री चेहरे को आगे नहीं किया था। प्रचार पूरी तरह नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लड़ा गया। वहीं अमित शाह ने भी बार-बार यह संकेत दिया था कि मुख्यमंत्री “बंगाली चेहरा” ही होगा। अब नतीजों के बाद पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती सही नाम तय करने की है।
सबसे मजबूत दावेदार: सुवेंदु अधिकारी
बीजेपी के भीतर अगर किसी एक नाम को सबसे आगे माना जा रहा है, तो वह सुवेंदु अधिकारी हैं। तृणमूल कांग्रेस से बीजेपी में आए अधिकारी ने 2021 में नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को हराकर खुद को बड़े नेता के रूप में स्थापित किया था। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका मजबूत जमीनी नेटवर्क और खासकर मिदनापुर क्षेत्र में प्रभाव है। संगठन के लिहाज से भी वे बीजेपी के सबसे सक्रिय और आक्रामक नेताओं में गिने जाते हैं। हालांकि, नारदा स्टिंग जैसे पुराने विवाद उनके नाम के साथ जुड़े रहे हैं, जो उनके रास्ते में चुनौती बन सकते हैं।
महिला कार्ड: अग्निमित्रा पॉल और रूपा गांगुली
बीजेपी इस बार “महिला मुख्यमंत्री” का दांव भी खेल सकती है। चुनाव प्रचार के दौरान महिलाओं की सुरक्षा बड़ा मुद्दा रहा, ऐसे में पार्टी इस संदेश को मजबूत करने के लिए महिला चेहरा आगे कर सकती है।
अग्निमित्रा पॉल: फैशन डिजाइनर से नेता बनीं पॉल तेज़ी से पार्टी में उभरी हैं और उनकी आक्रामक शैली उन्हें अलग पहचान देती है।
रूपा गांगुली: ‘महाभारत’ में द्रौपदी की भूमिका से लोकप्रिय हुईं रूपा गांगुली का शहरी क्षेत्रों में अच्छा प्रभाव है और महिला वोट बैंक में पकड़ मजबूत मानी जाती है।
डार्क हॉर्स: दिलीप घोष
बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 2021 में पार्टी के प्रदर्शन को मजबूत करने का श्रेय उन्हें ही दिया जाता है।
उनकी आक्रामक शैली और संगठन पर पकड़ उन्हें “डार्क हॉर्स” बनाती है, हालांकि उनके विवादित बयानों की छवि पार्टी के लिए जोखिम भी बन सकती है।
संगठन का चेहरा: समिक भट्टाचार्य
प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य को संगठन का संतुलित और सहमति बनाने वाला चेहरा माना जाता है। RSS पृष्ठभूमि से आने वाले भट्टाचार्य पर्दे के पीछे रहकर काम करने के लिए जाने जाते हैं।
पार्टी के भीतर कई वर्गों को साथ लेकर चलने की उनकी क्षमता उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है, खासकर तब जब बीजेपी संतुलित और विवाद-मुक्त चेहरा चुनना चाहे।
क्या संकेत मिल रहे हैं?
बीजेपी के अब तक के फैसलों को देखें तो पार्टी आमतौर पर चौंकाने वाले नाम भी सामने लाती रही है। लेकिन बंगाल जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में पार्टी किसी ऐसे चेहरे को चुनना चाहेगी, जो—
- बंगाली पहचान रखता हो
- संगठन और जनता दोनों में स्वीकार्य हो
- केंद्र नेतृत्व के साथ तालमेल बिठा सके
इन सभी मानकों पर फिलहाल सुवेंदु अधिकारी सबसे आगे दिखाई देते हैं, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा।
निष्कर्ष:
पश्चिम बंगाल का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका औपचारिक ऐलान अभी बाकी है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में मुकाबला मुख्य रूप से सुवेंदु अधिकारी, समिक भट्टाचार्य और महिला चेहरों के बीच सिमटा हुआ नजर आता है। पार्टी अगर राजनीतिक संदेश देना चाहती है, तो महिला मुख्यमंत्री भी बड़ा सरप्राइज हो सकता है।
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