228 रन बनाकर भी हारी LSG, वानखेड़े में आया रोहित-रिकेल्टन का तूफान, मुंबई इंडियंस ने 6 विकेट से जीता मैच
MI VS LSG: आईपीएल 2026 का 47वां मैच मुंबई इंडियंस और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच वानखेड़े स्टेडियम में खेला गया. इस मुकाबले में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने आई लखनऊ की टीम ने कमाल की बल्लेबाजी की और 229 रनों का लक्ष्य खड़ा कर दिया. मगर, मुंबई इंडियंस ने 2 विकेट के नुकसान पर 8 गेंदें शेष रहते हुए ही लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया. इसी के साथ मुंबई ने 6 विकेट से सीजन की तीसरी जीत दर्ज की.
रियान रिकेल्टन और रोहित शर्मा ने बनाई 143 रनों की साझेदारी
LSG के साथ खेले जा रहे मुकाबले में मुंबई इंडियंस की सलामी जोड़ी ने टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई. एक छोर से रियान रिकेल्टन ने LSG के गेंदबाजों की क्लास लगाई, तो दूसरे छोर से रोहित शर्मा ने पिटाई की. रिकेल्टन 32 गेंद पर 6 चौके और 8 छक्कों के साथ 83 रन बनाकर आउट हुए. तो वहीं, रोहित शर्मा 44 गेंदों में 6 चौके और 7 छक्कों की मदद से 84 रनों की पारी खेलकर आउट हुए.
मुंबई इंडियंस ने 6 विकेट से जीता मैच
मुंबई इंडियंस की पारी की बात करें, तो रयान रिकेल्टन और रोहित शर्मा की 143 रनों की पार्टनरशिप ने मजबूत शुरुआत दिलाई. रयान 83 और रोहित 84 रन बनाकर आउट हुए. फिर तिलक वर्मा 11 और सूर्यकुमार यादव 12 रन बनाकर पवेलियन लौटे.
Jacks finishes things off in ????????????????????, with 8 balls to spare! ????#MIvLSG pic.twitter.com/Fz9pb5QRWm
— Mumbai Indians (@mipaltan) May 4, 2026
आखिर में नमन धीर और विल जैक्स ने मुंबई इंडियंस की पारी को दहलीज पार कराई और टीम को जीत दिलाई. नमन धीर ने आखिरी गेंद पर छक्का लगाया, जो मुंबई के लिए विनिंग शॉट रहा. इसी के साथ मुंबई ने 8 गेंद शेष रहते हुए 6 विकेट से जीत दर्ज कर ली.
High, Handsome and 2⃣ points ????@mipaltan seal their highest run-chase in #TATAIPL history ✌️
— IndianPremierLeague (@IPL) May 4, 2026
Scorecard ▶️ https://t.co/elXSOvaeig #KhelBindaas | #MIvLSG pic.twitter.com/G5rSddXCbc
228 रन बनाकर भी हारी LSG
ऋषभ पंत की कप्तानी वाली लखनऊ सुपर जायंट्स की टीम के लिए ये एक शर्मनाक हार है. वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए मैच में लखनऊ सुपर जायंट्स की टीम ने बल्ले से शानदार खेल दिखाया था और 228 रन बोर्ड पर लगाए थे. LSG की ओर से निकोलस पूरन ने 63 रनों की आतिशी पारी खेली थी. उनके अलावा मिचेल मार्श ने 44, एडेन मार्कम ने 31 और हिम्मत सिंह ने 40 रन बनाए थे. मगर, बल्लेबाजों की मेहनत पर गेंदबाजों ने पानी फेर दिया और लखनऊ को 6 विकेट से हार मिली.
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पाकिस्तान में घटती आजादी और कमजोर होती न्यायपालिका पर एचआरसीपी ने जताई चिंता
इस्लामाबाद, 4 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने सोमवार को चिंता जताई कि पिछले एक साल में देश में नागरिक आजादी का दायरा लगातार घटा है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता कमजोर हुई है और असुरक्षा की स्थिति बढ़ी है।
ताजा रिपोर्ट ‘स्टेट ऑफ ह्यूमन राइट्स 2025’ में एचआरसीपी ने बताया कि 2025 में पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की आजादी को काफी हद तक दबा दिया गया। इसका कानून के राज और बुनियादी आजादी पर बड़ा असर पड़ा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि चिंता की बात यह है कि असहमति को दबाने के लिए कानूनी और संस्थागत तरीकों का ज्यादा इस्तेमाल किया गया। इलेक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम कानून (पीईसीए) में बदलाव और देशद्रोह और आतंकवाद-रोधी कानूनों के इस्तेमाल से पत्रकारों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं, एक्टिविस्ट्स और वकीलों को निशाना बनाया गया। डराने-धमकाने, जबरन गायब किए जाने और आवाजाही पर रोक जैसे मामलों ने डर का माहौल पैदा कर दिया, जिससे लोग खुलकर अपनी बात नहीं कह पा रहे और मानवाधिकार उल्लंघन की बातें दब जाती हैं।
एचआरसीपी ने बताया कि आतंकवाद-रोधी कानून 1997 में किए गए बदलाव, खासकर बलूचिस्तान में कानून लागू करने वाली एजेंसियों और यहां तक कि सेना को भी यह अधिकार देते हैं कि वे किसी भी व्यक्ति को बिना आरोप और बिना अदालत की निगरानी के तीन महीने तक हिरासत में रख सकें। इससे मनमानी गिरफ्तारी का खतरा बढ़ गया है और लोगों की आजादी और कानूनी प्रक्रिया के अधिकार कमजोर हुए हैं।
रिपोर्ट में पाकिस्तान में न्यायपालिका की स्वतंत्रता में आई गिरावट को भी उजागर किया गया है, खासकर 27वें संवैधानिक संशोधन के बाद, जिसने जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया को बदल दिया और सरकार का प्रभाव बढ़ा दिया।
रिपोर्ट में कहा गया कि 2025 में अदालतों के कुछ अहम फैसलों ने लोकतांत्रिक दायरे को और सीमित कर दिया। इनमें वे फैसले शामिल हैं, जिनमें आम नागरिकों पर सैन्य अदालतों में मुकदमा चलाने की इजाजत दी गई और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) को 2024 में मिली आरक्षित सीटों से वंचित कर दिया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों ने भी मानवाधिकार उल्लंघनों को बढ़ाया है। उग्रवाद और आतंकवाद-रोधी अभियानों का सबसे ज्यादा असर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में देखने को मिला, जहां आम लोगों और सुरक्षाबलों दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
रिपोर्ट में कहा गया कि जबरन गायब किए जाने, फर्जी मुठभेड़ों और सामूहिक सजा जैसे मामले जारी रहे। वहीं महिलाएं, बच्चे, धार्मिक अल्पसंख्यक और ट्रांसजेंडर समुदाय जैसे कमजोर वर्ग अब भी हिंसा और भेदभाव का सामना कर रहे हैं और उन्हें पर्याप्त न्याय नहीं मिल रहा।
खास तौर पर खदानों में काम करने वाले मजदूर और सफाई कर्मचारी भी हादसों के खतरे में रहते हैं, और उनकी सुरक्षा में सुधार के लिए ज्यादा प्रगति नहीं हुई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जलवायु से जुड़ी आपदाओं, खासकर पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में कई लोगों की जान ली और ढांचा भी बर्बाद हुआ। वहीं, सरकार की प्रतिक्रिया ज्यादातर तुरंत कार्रवाई तक सीमित रही, लंबी अवधि के समाधान पर कम ध्यान दिया गया।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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