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दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति बोले, 'दास प्रथा की क्षतिपूर्ति होनी चाहिए, सदियों तक हुई लूटपाट ने हमें कर्जदार बनाया'

जोहान्सबर्ग, 4 मई (आईएएनएस)। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने अफ्रीका माह के अवसर पर दास प्रथा के लिए क्षतिपूर्ति (रिपेरेशन्स) की मांग को दोहराते हुए कहा है कि सदियों के शोषण और अफ्रीकी संसाधनों की व्यवस्थित लूट का असर आज भी महाद्वीप की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा हुआ है।

सोमवार को अपने साप्ताहिक न्यूजलेटर में राष्ट्रपति ने कहा कि क्षतिपूर्ति केवल आर्थिक मुआवजे तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें प्रभावित अफ्रीकी देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में वृद्धि और बाजारों तक बेहतर पहुंच भी शामिल होनी चाहिए।

सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, रामाफोसा ने प्रौद्योगिकी और कौशल हस्तांतरण के साथ-साथ सदियों पहले लूटे गए सांस्कृतिक धरोहरों की बिना शर्त वापसी की भी मांग की।

उन्होंने कहा कि क्षतिपूर्ति अफ्रीकी देशों के विकास लक्ष्यों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है और बढ़ते कर्ज के बोझ को कम करने में मदद कर सकती है। उनके अनुसार यह कर्ज बोझ भी दास प्रथा और औपनिवेशिक शोषण की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा हुआ है।

रामाफोसा ने कहा, “न केवल लाखों अफ्रीकियों को गुलाम बनाया गया, बल्कि औपनिवेशिक शक्तियां अफ्रीकी भूमि पर कब्जा और संसाधनों के दोहन से समृद्ध हुईं।”

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दास प्रथा केवल लोगों की गुलामी तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक ऐसी व्यवस्था थी जिससे पूर्व दास मालिकों ने अमानवीय तरीकों से भारी संपत्ति अर्जित की। यह संपत्ति सांस्कृतिक वस्तुओं की लूट से भी बढ़ी, जिनमें से कई आज भी यूरोप के संग्रहालयों में प्रदर्शित हैं।

राष्ट्रपति की यह टिप्पणी मार्च में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा पारित उस प्रस्ताव के बाद आई है, जिसमें दास प्रथा को “मानवता के खिलाफ सबसे गंभीर अपराध” माना गया। इस प्रस्ताव का अधिकांश देशों ने समर्थन किया, जबकि अमेरिका, इजरायल और अर्जेंटीना ने इसका विरोध किया तथा यूरोपीय संघ के सदस्य देशों ने मतदान से परहेज किया।

रामाफोसा ने कहा, “स्लेव ट्रेड बर्बरता का सबसे चरम रूप था, जिसे यूरोपीय साम्राज्य- सहारा और उत्तर अफ्रीका के स्लेव ट्रेड नेटवर्क संग मिलकर अंतरमहाद्वीपीय दास व्यापार को अंजाम देते थे ।”

उन्होंने कहा कि एक सदी से अधिक समय तक लाखों अफ्रीकी पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को शिकार बनाकर पकड़ा गया और उन्हें इंसान नहीं, बल्कि वस्तु के रूप में खरीदा-बेचा गया।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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पश्चिम बंगाल में स्थिर भाजपा सरकार निवेशकों का बढ़ा सकती है भरोसा: संजीव गोयनका

नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। भारतीय उद्योगपति और निवेशक संजीव गोयनका ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के बदलते राजनीतिक परिदृश्य को लेकर उम्मीद जताते हुए कहा कि अगर राज्य में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व में स्थिर सरकार बनती है, तो इससे निवेशकों का भरोसा बहाल हो सकता है और राज्य में नए निवेश आकर्षित हो सकते हैं।

चुनावी रुझान सामने आने के बाद एनडीटीवी से बातचीत में आरपीएसजी ग्रुप के चेयरमैन संजीव गोयनका ने कहा कि अब ध्यान बंगालियों के बाहर पलायन की चिंता से हटाकर ऐसा माहौल बनाने पर होना चाहिए, जो प्रतिभा और पूंजी दोनों को राज्य में आकर्षित करे।

उन्होंने कहा कि एक ऐसा कारोबारी अनुकूल वातावरण तैयार करने की जरूरत है, जहां व्यक्ति और कंपनियां निवेश करने और बसने के लिए प्रोत्साहित महसूस करें।

कोलकाता में जन्मे और पले-बढ़े गोयनका ने कहा कि राज्य के विकास में उनकी व्यक्तिगत हिस्सेदारी है और वह इसके विकास में योगदान देना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि उद्योग के लिए नीतिगत स्थिरता बेहद जरूरी है और बार-बार नियमों में बदलाव या पलटाव लंबी अवधि के निवेश फैसलों को प्रभावित करता है।

उन्होंने संरचनात्मक सुधारों की जरूरत पर भी जोर दिया और शहरी भूमि सीमा जैसे पुराने नियमों की आलोचना करते हुए उन्हें अप्रासंगिक और विकास में बाधा बताया।

उन्होंने कहा, शासन में स्पष्टता और निरंतरता निवेशकों का भरोसा दोबारा बनाने के लिए बेहद जरूरी होगी।

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ती दिख रही है।

वर्तमान में सत्तारूढ़ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कर रही हैं, रुझानों में पीछे चल रही है, जिससे पिछले चुनावी परिणामों के उलट स्थिति बनने के संकेत मिल रहे हैं।

संभावित सत्ता परिवर्तन के साथ ही यह चर्चा भी तेज हो गई है कि यदि बीजेपी पहली बार राज्य में सरकार बनाती है तो मुख्यमंत्री कौन होगा।

मुख्य दावेदारों में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी का नाम शामिल है, जो नंदीग्राम और भवानीपुर से चुनाव लड़ रहे हैं।

इसके अलावा राज्य बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के नामों पर भी चर्चा हो रही है।

वहीं, निसिथ प्रमाणिक, अग्निमित्रा पॉल, रूपा गांगुली और शंकर घोष जैसे नेताओं के नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं।

--आईएएनएस

डीबीपी

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