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जल्दी क्रेडिट कार्ड बिल भरने से बढ़ता है CIBIL स्कोर? जानिये क्या है सच

क्या आपने भी सुना है कि क्रेडिट कार्ड का बिल जल्दी भर देने से आपका क्रेडिट स्कोर तेजी से बढ़ जाता है? बात पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन पूरा सच भी नहीं है। असल में आपका स्कोर सिर्फ एक आदत से नहीं, बल्कि पूरी फाइनेंशियल डिसिप्लिन से बनता है

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West Bengal Elections: पश्चिम बंगाल की अहम मुस्लिम बहुल सीटों पर भी जीती भाजपा, सुवेंदु अधिकारी ने बताया पूरा प्लान

West Bengal Elections: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना जारी है. भाजपा बंगाल में करीब 190 सीटें जीत सकती है. सत्तारूढ़ टीएमसी इस बार 95 सीटों के आसपास सिमट गई है. इतनी बड़ी जीत के समीकरणों को देखते हुए हमारा ये जानना जरूर है कि बंगाल की मुस्लिम बहुल सीटों पर भाजपा का क्या हाल है. 

बंगाल में 30 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी वाली सीटें काफी ज्यादा अहम मानी जाती हैं. वहीं, टीएमसी के लिए मुस्लिम आबादी ही सत्ता की चाबी रही है. हालांकि, इस बार बदलाव देखने के लिए मिल सकता है. 

क्या है मुर्शिदाबाद का हाल?

बात सबसे पहले मुर्शिदाबाद की. इस बार भाजपा से गौरीशंकर घोष यहां से आगे चल रहे हैं. 15 राउंड के बाद 44 हजार से अधिक वोटों से बढ़त बनाए हुए हैं. टीएमसी की शाओनी सिंघा रॉय को जहां 49 हजार से अधिक वोच मिले हैं तो वहीं गौरी शंकर घोष को 93 हजार से अधिक वोट मिले हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुर्शिदाबाद में 66% - 68% मुस्लिम हैं तो वहीं, 31% - 33% हिंदू हैं.

क्या है हबीबपुर का हाल?

वहीं, हबीबपुर में भाजपा उम्मीदवार जॉयल मुर्मू इस सीट से आगे चल रहे हैं. भाजपा के जॉयल मुर्मू को 58,999 सीटें मिली हैं तो वहीं, टीएमसी के अमल किसकू को 25,149 सीटें हासिल हुई है. दोनों नेताओं के बीच जीत का अंतर 33,850 से अधिक है.

क्या है मानबाजार का हाल?

मानबाजार की बात करें तो भाजपा उम्मीदवार मयना मुर्मू ने 7511 से बढ़त बना रखी है. भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) उम्मीदवार संध्या रानी टुडू को 43,844 वोट तो मयना मुर्मू को 51,355 वोट मिले हैं. 

क्या है अलीपुरद्वार का हाल?

अलीपुरद्वार निर्वाचन क्षेत्र को मुस्लिम बहुल क्षेत्र माना जाता है. भाजपा यहां भी बढ़त बनाकर चल रही है. भाजपा उम्मीदवार परितोष दास 39,951 वोट तो टीएमसी के सुमन कांजीलाल ने 22,839 वोट हासिल किए हैं. दोनों पार्टियों के बीच छह राउंड के बाद 17,112 वोटों का अंतर है.

भाजपा को कैसे मिली मुस्लिम बहुल इलाकों में बढ़त

मुस्लिम बहुल इलाकों में पार्टी ने बढ़त बना रखी है. इसी बढ़त के बारे में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि दक्षिण बंगाल में मुस्लिम वोटों का विभाजन हुआ है. भाजपा को इसका फायदा मिला है. 

मुस्लिम वोटों का समीकरण

आंकड़ों के अनुसार, मुस्लिम बहुल मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में साफ-साफ बदलाव देखने के लिए मिल रहा है. 2021 और 2024 के चुनावों में जहां 90-95 प्रतिशत मुस्लिम वोट एकतरफा टीएमसी को मिला था वहीं, इस बार मुस्लिम वोट बटां दिख रहा है.

 

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  Sports

15 साल के Vaibhav Suryavanshi का IPL खेलना 'बाल श्रम'? Rajasthan Royals के खिलाफ FIR की उठी मांग

क्या वैभव सूर्यवंशी आईपीएल में खेलकर बाल श्रम कर रहे हैं? अगर सभी लोग नहीं तो कम से कम कर्नाटक के सामाजिक कार्यकर्ता सीएम शिवकुमार नायक तो यही सोच रहे हैं। क्रिकेट जगत को चौंका देने वाले एक कदम में, नायक ने राजस्थान रॉयल्स (आरआर) प्रबंधन के खिलाफ औपचारिक एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी है, जिस टीम का प्रतिनिधित्व बिहार में जन्मे सूर्यवंशी करते हैं। उनका तर्क है कि एक नाबालिग को आईपीएल के उच्च दबाव वाले व्यावसायिक माहौल में रखना बाल अधिकारों और श्रम कानूनों का उल्लंघन है।
 

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कन्नड़ समाचार चैनल पर एक बहस के दौरान बोलते हुए, नायक ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने किशोर अभिनेता को लेने के फ्रेंचाइजी के फैसले को शोषण का एक रूप बताया। नायक ने कहा कि राजस्थान रॉयल्स द्वारा वैभव सूर्यवंशी नामक इस 15 वर्षीय लड़के का शोषण किया जा रहा है। वह अभी बच्चा ही है और उसे आईपीएल जैसी पेशेवर लीग में लाया गया है। यह बाल श्रम के अलावा कुछ नहीं है। उसे इस कम उम्र में क्रिकेट खेलने के बजाय अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए और अपनी शिक्षा पूरी करनी चाहिए। कार्यकर्ता की मांग सीधी-सादी है: सूर्यवंशी की लीग में भागीदारी को तत्काल रोका जाए। उनका तर्क है कि किसी भी बच्चे को पेशेवर खेल की आड़ में अरबों डॉलर के उद्योग में काम नहीं करना चाहिए।

वैभव का 15 साल की उम्र में आईपीएल में खेलना इस बात पर बहस छेड़ सकता है कि एक नाबालिग इतने पैसे वाले लीग में कैसे खेल रहा है। बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम के अनुसार, “यह अधिनियम 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी व्यवसाय या प्रक्रिया में काम करने या रोजगार देने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है, और 14 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों को खतरनाक व्यवसायों और प्रक्रियाओं में काम करने से रोकता है। संशोधन में अधिनियम के उल्लंघन के लिए नियोक्ताओं को कड़ी सजा देने का प्रावधान भी किया गया है और इसे संज्ञेय अपराध बनाया गया है।”
 

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लेकिन पेशेवर खेल पारंपरिक रूप से खतरनाक श्रम की श्रेणी में नहीं आते हैं। युवा खिलाड़ी अक्सर माता-पिता की सहमति से संरचित समझौतों के तहत काम करते हैं और विनियमित वातावरण में कार्यरत होते हैं। अतीत के सबसे बड़े उदाहरणों में से एक सचिन तेंदुलकर हैं, जो महानतम भारतीय क्रिकेटरों में से एक हैं। उन्होंने कराची में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच में 16 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। अन्य उदाहरणों में पार्थिव पटेल (17 वर्ष), मनिंदर सिंह (17 वर्ष) और शेफाली वर्मा (15 वर्ष) जैसे क्रिकेटर शामिल हैं।
Wed, 06 May 2026 15:32:53 +0530

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