फ्रांस ने अमेरिका के प्रोजेक्ट फ्रीडम में भागीदारी से किया इनकार, होर्मुज खोलने की अपील
पेरिस, 4 मई (आईएएनएस)। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को कहा कि यूरोप अपना सिक्योरिटी सॉल्यूशन बना रहा है और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के ऑपरेशन में हिस्सा नहीं लेगा। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने इसे अस्पष्ट फ्रेमवर्क बताया और बातचीत के जरिए स्ट्रेट को फिर से खोलने की मांग दोहराई।
इमैनुएल मैक्रों ने येरेवन, आर्मेनिया में सोमवार से शुरू हुई यूरोपीय पॉलिटिकल कम्युनिटी की 8वीं बैठक में कहा, यूरोपीय संघ हमारे सिक्योरिटी सॉल्यूशन बना रहा है। यूरोपीय संघ अपनी किस्मत अपने हाथों में ले रहा है, रक्षा व सुरक्षा पर खर्च बढ़ा रहा है और कॉमन सॉल्यूशन बना रहा है।
फ्रांस के राष्ट्रपति ने सोमवार को येरेवन, आर्मेनिया में यूरोपीय राजनीतिक समुदाय समिट में बोलते हुए ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज स्ट्रेट को मिलकर फिर से खोलने की बात कही।
मैक्रों ने प्रोजेक्ट फ्रीडम में फ्रांस के शामिल होने से मना कर दिया। यह प्रोजेक्ट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट से नेविगेशन फिर से शुरू करने के लिए शुरू किया था। फ्रांस के प्रेसिडेंट ने कहा, हम ऐसी किसी चीज में हिस्सा नहीं लेंगे जो साफ नहीं है।
उन्होंने कहा कि यूरोपीय सुरक्षा नीति 2022 से यूरोपियन पॉलिटिकल कम्युनिटी, कोएलिशन ऑफ द विलिंग कंट्रीज के जरिए यूक्रेन का समर्थन और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी कोशिश जैसी पहल के जरिए बनाई गई है।
उन्होंने कहा कि फ्रांस स्ट्रेट को फिर से खोलने का समर्थन करता है लेकिन इस बात पर जोर दिया कि वह एक साफ फ्रेमवर्क के बाहर किसी भी फोर्स-बेस्ड ऑपरेशन में हिस्सा नहीं लेगा।
उन्होंने कहा, “अगर अमेरिका होर्मुज को फिर से खोलने के लिए तैयार है, तो यह बहुत अच्छा है। हम शुरू से यही मांग कर रहे हैं।” मैक्रों ने कहा कि फ्रांस ईरान और अमेरिका के बीच कोऑर्डिनेटेड रीओपनिंग के पक्ष में है। यह बिना किसी रोक और बिना टोल के फ्री नेविगेशन सुनिश्चित करने का एकमात्र सस्टेनेबल सॉल्यूशन है।
उन्होंने लेबनान में सीजफायर का सम्मान करने की अहमियत पर भी जोर दिया और सभी पार्टियों से अपने वादे निभाने की अपील की। 28 फरवरी से इस इलाके में तनाव बढ़ गया है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए, जिसके बाद तेहरान ने भी इजरायली ठिकानों और खाड़ी में अमेरिका के एयरबेस और संपत्ति पर जवाबी हमले किए।
--आईएएनएस
केके/पीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
नए चीनी मिशन की शुरुआत: नव-नियुक्त राजदूत विक्रम दोराईस्वामी पहुंचे बीजिंग
नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। विक्रम दोराईस्वामी को चीन का नया राजदूत नियुक्त किया गया है। नई जिम्मेदारी संभालने के लिए वो बीजिंग पहुंचे। उनकी यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशें जारी हैं। उनके अनुभव और कूटनीतिक कौशल से द्विपक्षीय रिश्तों में नई गति आ सकती है।
भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चीन में भारत के राजदूत-नामित, विक्रम दोराईस्वामी बीजिंग पहुंचे। विदेश मंत्रालय में एशियाई मामलों के विभाग के उप-निदेशक, ली जियानबो ने उनका स्वागत किया।
दोराईस्वामी शनिवार को शंघाई पहुंचे थे, जहां उनका स्वागत शंघाई स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास के महावाणिज्यदूत प्रतीक माथुर और अन्य अधिकारियों ने किया था। इसके बाद वह बीजिंग के लिए रवाना हुए थे।
नए भारतीय राजदूत दोराईस्वामी ने अपने लिए एक चीनी नाम ‘वेई जियामेंग’ चुना है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने एक प्रेस वार्ता (20 मार्च) में इसकी तारीफ की थी। लिन ने कहा, ‘‘भारत के नए राजदूत वेई जियामेंग का चीन स्वागत करता है। उन्हें चीन में अपना पदभार ग्रहण करने के लिए हर संभव सुविधा प्रदान करने के लिए उस्तुक है।’’
मंदारिन भाषा में वेई जियामेंग नाम का सामान्य अनुवाद वेई है, जो एक आम चीनी उपनाम है और जिसका उच्चारण विक्रम के ‘वी’ से मिलता-जुलता है। बहुत पहले, चीनी इतिहास के युद्धरत राज्यों के काल में वेई एक शक्तिशाली राज्य था। वहीं, जिया का अर्थ शुभ या प्रशंसा योग्य, और मेंग का अर्थ गठबंधन है, जिसका व्यापक अर्थ एक शुभ या प्रशंसनीय सहयोगी है।
इन सभी शब्दों का संयुक्त अभिप्राय है, ‘‘एक ऐसा व्यक्ति जो एक उत्कृष्ट गठबंधन बनाता है।’’ इसका भारत-चीन संबंधों के वर्तमान संदर्भ में कूटनीतिक महत्व है।
भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी दोराईस्वामी 1992 बैच के हैं, और वह प्रदीप कुमार रावत की जगह लेंगे। उन्हें जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संभालने का व्यापक अनुभव है। इससे पहले, वे कई महत्वपूर्ण देशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
बीजिंग से पहले, दोराईस्वामी यूनाइटेड किंगडम में भारत के हाई कमिश्नर के तौर पर काम कर चुके हैं।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और अन्य मुद्दों को लेकर तनाव रहा है, लेकिन हाल के महीनों में संवाद के जरिए संबंधों को सुधारने की दिशा में प्रयास तेज हुए हैं।
भारत और चीन के बीच व्यापार, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे काफी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में एक अनुभवी राजनयिक के रूप में दोराईस्वामी की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि वे दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली, संवाद को मजबूत करने और सहयोग के नए अवसर तलाशने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
--आईएएनएस
केआर/
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