भारतीय नौसेना प्रमुख ने म्यांमार दौरे पर आपसी सहयोग और प्रशिक्षण संबंध मजबूत करने पर की चर्चा
नेपीडॉ, 3 मई (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने रविवार को म्यांमार नौसेना के सेंट्रल नेवल कमांड प्रमुख रियर एडमिरल आंग आंग नाइंग और ट्रेनिंग कमांड प्रमुख रियर एडमिरल खुन आंग क्याव से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने नौसेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाने, रक्षा साझेदारी को मजबूत करने और संयुक्त परिचालन गतिविधियों को बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
भारतीय नौसेना ने बताया कि दोनों देशों ने प्रशिक्षण सहयोग को बेहतर बनाने और आगे नए क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी बात की। एडमिरल त्रिपाठी इस समय म्यांमार के चार दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं।
नौसेना के प्रवक्ता ने एक्स पोस्ट में बताया कि अपने दौरे के दौरान एडमिरल त्रिपाठी का यांगून स्थित सेंट्रल नेवल कमांड मुख्यालय में औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर के साथ स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने रियर एडमिरल आंग आंग नाइंग और रियर एडमिरल खुन आंग क्याव के साथ बातचीत की।
इस बातचीत में नौसेनाओं के बीच सहयोग को मजबूत करने, रक्षा साझेदारी बढ़ाने, संयुक्त अभ्यास, समुद्री सुरक्षा और एक सुरक्षित समुद्री वातावरण बनाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही प्रशिक्षण सहयोग और आगे के नए अवसरों पर भी विचार किया गया।
एडमिरल त्रिपाठी ने म्यांमार के नेवल ट्रेनिंग कमांड का भी दौरा किया, जहां उन्होंने भारत की मदद से किए गए कई प्रोजेक्ट्स सौंपे।
नेवल ट्रेनिंग कमांड में उन्हें म्यांमार नौसेना की ट्रेनिंग सुविधाओं और दोनों नौसेनाओं के बीच चल रहे सहयोग के बारे में जानकारी दी गई। इसमें मोबाइल ट्रेनिंग टीम की भूमिका भी शामिल थी, जो क्षमता निर्माण और पेशेवर प्रशिक्षण में मदद कर रही है।
उन्होंने भारत सरकार की सहायता से तैयार किए गए कई प्रोजेक्ट्स जैसे कंटेनराइज्ड स्मॉल आर्म्स सिम्युलेटर और रिगिड इन्फ्लेटेबल बोट भी आधिकारिक रूप से सौंपे। ये सभी बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दिए गए हैं, जो भारत की महासागर विजन के अनुरूप है।
इन बैठकों से दोनों देशों के बीच चल रहे समुद्री सहयोग की समीक्षा करने, परिचालन स्तर पर संबंधों को मजबूत करने और नए सहयोग के रास्ते तलाशने का मौका मिला है।
अपने दौरे के दौरान नौसेना प्रमुख म्यांमार सशस्त्र बलों के शहीद नायकों के स्मारक पर भी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत और म्यांमार की नौसेनाएं नियमित रूप से रक्षा सहयोग बैठक, स्टाफ टॉक्स, प्रशिक्षण आदान-प्रदान और संयुक्त अभ्यास जैसे भारत-म्यांमार नौसैनिक अभ्यास (आईएमएनईएक्स), इंडो-म्यांमार कोऑर्डिनेटेड पेट्रोल (आईएमसीओआर), बंदरगाह यात्राएं और हाइड्रोग्राफी सर्वे जैसी गतिविधियों में शामिल रहती हैं।
मंत्रालय ने कहा कि यह दौरा भारत और म्यांमार के बीच लंबे समय से चले आ रहे मित्रता संबंधों को और मजबूत करता है, जो आपसी भरोसे और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और स्थिरता के साझा लक्ष्य पर आधारित हैं।
--आईएएनएस
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“जो मुख्यमंत्री है वह गाय की रक्षा नहीं कर पा रहा..” शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी पर साधा निशाना, जानें और क्या कहा
गोरखपुर से शुरू हुई शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज की ‘गोविष्टि यात्रा’ कई बड़े बयानों और विवादों को जन्म दे रही है। यात्रा शुरू करने से पहले उन्हें धमकियां मिलीं, जिस पर उन्होंने सीधे सत्ता को चुनौती दे डाली। शंकराचार्य ने कहा कि किसी माई के लाल में हिम्मत नहीं है कि उन्हें मरवा दे, और अगर कोई पार्टी उन्हें मरवाने की कोशिश करेगी तो वह सत्ता से बेदखल हो जाएगी। उन्होंने इस दौरान गोरखपुर की जनता को निडर और डरा हुआ बताते हुए कहा कि उन्हें सत्ता और परम सत्ता दोनों द्वारा डराया जा रहा है। हालांकि, उनका कहना था कि परम सत्ता उनके साथ है, जैसा कि आज का मौसम भी दिखा रहा है।
शंकराचार्य ने गो-रक्षा के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि गाय को केवल माता कहकर पुकारा नहीं जा सकता, बल्कि उसका अनादर करना तो दूर, उसे मारना भी नहीं चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान में किसी मांग पर सरकार नहीं सुनेगी या ईसाईयों के देश में उनकी बात नहीं मानी जाएगी, लेकिन भारत में गोमाता की रक्षा की बात सरकार नहीं सुनती, जिसका मतलब है कि भारत हिंदू राष्ट्र नहीं है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि जो सरकार सत्ता में है, अगर वह सच में हिंदू पार्टी होती, तो गोमाता का संकल्प पूरा करती। उन्होंने मौजूदा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि इसमें तो ‘एक-दो-चार इंजन और इंजन ही इंजन हैं, जनता के लिए डब्बा कहां है?’ अगर है भी तो वह फर्स्ट क्लास का है, जिसमें सिर्फ उनके चापलूस बैठते हैं।
अविमुक्तेश्वरानंद महाराज की ‘गोविष्टि यात्रा’ शुरू
रविवार, 3 मई को गोरखपुर के सहारा स्टेट स्थित भारत माता मंदिर के समक्ष जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने गोविष्टि यात्रा को गोरखा झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर उन्होंने जनता से अपने भ्रम को दूर करने का आह्वान किया। शंकराचार्य ने कहा कि सरकार हमारी प्रतिनिधि नहीं है, बल्कि हम (जनता) ही सरकार हैं। जो जनता मतदान करती है, वह सत्ता में है, और जो नहीं करती, वह विपक्ष में है। उन्होंने लोगों से मतदान करने की अपील करते हुए कहा कि आप जो चाहेंगे, वही होगा, आप चाहेंगे तो गाय की रक्षा होगी, आप चाहेंगे तो उसकी हत्या होगी।
ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वेदों का हवाला देते हुए कहा कि गाय को मारने वाले असुर को मार दिया गया है और हमें भी गोमाता को सताने वाले असुरों को मारना होगा। इसके लिए पहली उंगली उठानी होगी। उन्होंने कहा कि गाय को राज्यमाता घोषित करने के लिए मुख्यमंत्री बनना पड़ेगा, क्योंकि जो मुख्यमंत्री है, वह गाय की रक्षा नहीं कर पा रहा है और इस मामले में कमजोर है। शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनके बारे में प्रचार है कि वे केंद्र की नहीं सुनते, अपने मन की करते हैं, लेकिन यह गलत है। अगर उनमें साहस होता तो वे गोरक्षनाथ जी की ओर हाथ करके केंद्र की परवाह किए बिना गोमाता को राज्य माता घोषित कर देते। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री ऐसा तेवर दिखाते तो लोग उनके कसीदे पढ़ रहे होते, लेकिन वे मुसलमान और गो-हत्यारों के वोट खोने के डर से ऐसा नहीं करते। शंकराचार्य ने हिमन्त बिस्वा का उदाहरण देते हुए कहा कि एक पत्रकार ने जब उनसे पूछा कि क्या उन्हें गो-हत्यारों का वोट चाहिए, तो भाजपा के मुख्यमंत्री ने ‘हां’ कहा।
भाजपा को वोट देने का मतलब गो-हत्यारों को समर्थन देना: शंकराचार्य
शंकराचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाजपा को वोट देने का मतलब गो-हत्यारों को समर्थन देना है। उन्होंने कहा कि आप भाजपा को वोट देंगे तो गो-हत्यारों और आपका वोट एक ही पात्र में रहेगा, गो-हत्यारों का वोट ईवीएम मशीन में जाएगा। क्या आप गाय का खून और दूध मिलाकर पिएंगे? उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बहुत डराने की कोशिश की गई, लेकिन वे किसी भी योद्धा को परास्त करने में देर नहीं लगाएंगे। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि हममें से बहुत से लोग इन्हें ही अपना समझ रहे हैं, जबकि 37 से ज्यादा कानून हिंदुओं के खिलाफ हैं, मंदिर तोड़े जा रहे हैं और भाजपा ने भगवान के गले में फंदे डालकर जेसीबी से खींचा है।
संविधान बदलने की कोशिशों पर भी शंकराचार्य ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समलैंगिकता अब अपराध नहीं रह गई है और अंबेडकर के भक्त भी उनके संविधान को बदल रहे हैं। उन्होंने पूरे विश्व को यह संदेश दिया कि अगर गाय राष्ट्रमाता नहीं बन सकती तो कम से कम हम उसे अपनी माता तो कह ही सकते हैं। उन्होंने गोरक्षा और रामाधाम के नाम पर ‘एक नोट, एक वोट’ देने की अपील की। शंकराचार्य ने हर विधानसभा में गोरक्षा के लिए बनने वाले रामाधाम के लिए वोट देने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि तीसरे चरण में बूचड़खानों पर धावा बोलेंगे। उन्होंने कहा कि भारत का मुसलमान और ईसाई धार्मिक होता है, जबकि भारत का हिंदू सेकुलर हो जाता है। उन्होंने अपनी ’81 दिन में 81 युद्ध’ की चर्चा का भी जिक्र किया और बताया कि गोविष्टि यात्रा का शुभारंभ गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा से हो रहा है।
उत्तर प्रदेश के सभी तीर्थ स्थलों की परिक्रमा का दावा
अपनी यात्रा के बारे में बताते हुए शंकराचार्य ने कहा कि क्या कोई माई का लाल है जिसने उत्तर प्रदेश के सभी तीर्थ स्थलों की परिक्रमा की हो? वे यह करके आएंगे और कहेंगे कि उन्होंने किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका सत्ता या विपक्ष में रहने वाली किसी पार्टी से कोई संबंध नहीं है। शंकराचार्य को किसी पार्टी का मोहताज होने की जरूरत नहीं है, वे अगर उत्तर प्रदेश में कहीं भी 5-7 किलोमीटर की पदयात्रा करेंगे तो सनातन धर्मी सड़क पर फूल बिछा देंगे।
उनसे यह सवाल भी पूछा गया कि जब बाकी शंकराचार्य नहीं बोल रहे तो वे ही क्यों बोल रहे हैं। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि यह उनकी अकेले की आवाज नहीं है और न ही उनका अकेले का आंदोलन। उन्होंने बताया कि चारों शंकराचार्य मिलकर इस आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं। जैसे किसी पार्टी का एक प्रवक्ता होता है, वैसे ही चार शंकराचार्यों में उन्हें आगे किया गया है ताकि वे गौ माता की आवाज उठा सकें। उनकी आवाज चारों शंकराचार्यों की आवाज है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश उत्तर भारत के शंकराचार्य का प्रदेश है, इसलिए यहां पर उत्तर भारत के शंकराचार्य को बोलने का अधिकार है। पश्चिम के शंकराचार्य ने भी इस गोविष्टि यात्रा में सम्मिलित होने की बात कही है।
अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने चारों शंकराचार्यों के आगमन का किया संकेत
शंकराचार्य ने कहा कि अगर गोरखपुर सच में गोरखपुर हो जाए तो चारों शंकराचार्य यहां पधार सकते हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि वे योगी आदित्यनाथ को चिढ़ाने के लिए गोरखपुर नहीं आए हैं। वे जिस भी शहर जाएंगे, वहां की एलआईयू पूरे उत्तर प्रदेश में है, वह पता कर लेगी। वे गोरखनाथ मंदिर में पहले भी जा चुके हैं और बाबा के सानिध्य में बैठकर प्रार्थना कर चुके हैं। यात्रा पूरी होने के बाद वे फिर जाएंगे। उन्होंने दोहराया कि गोरखपुर आने से पहले उन्हें धमकी मिली थी और बहुत से लोगों ने यात्रा न करने या ‘अलनीनो’ का डर दिखाया, लेकिन वे नहीं माने। उन्होंने फिर कहा कि किसी माई के लाल में हिम्मत नहीं कि उन्हें मार दे और अगर पार्टियां ऐसा करती हैं तो वे सत्ता से बेदखल हो जाएंगी। उन्होंने गांधीजी का उदाहरण दिया कि गोडसे ने मारा था, आज दाग धुल गया। शंकराचार्य ने कहा कि कोई मरना नहीं चाहता, वे भी गोसेवा के संकल्प के लिए ऐसा चाहते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मुस्लिम और ईसाई समुदाय ने भी उनके इस अभियान का समर्थन किया है।
शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध योगी का नहीं, बल्कि गलती का है। उन्होंने भविष्यवाणी की कि वह दिन दूर नहीं जब सभी पार्टियां गो भक्त होंगी, और इसमें वोट से फर्क पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हर विधानसभा में एक हजार वोट इधर-उधर कर दिए जाएं तो फर्क पड़ जाएगा और तब इन्हें समझ में आ जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री के 8 हजार करोड़ के विमान पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर वे किराए पर चलें तो देश को कुछ रेवेन्यू मिलेगा।
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