“जो मुख्यमंत्री है वह गाय की रक्षा नहीं कर पा रहा..” शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी पर साधा निशाना, जानें और क्या कहा
गोरखपुर से शुरू हुई शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज की ‘गोविष्टि यात्रा’ कई बड़े बयानों और विवादों को जन्म दे रही है। यात्रा शुरू करने से पहले उन्हें धमकियां मिलीं, जिस पर उन्होंने सीधे सत्ता को चुनौती दे डाली। शंकराचार्य ने कहा कि किसी माई के लाल में हिम्मत नहीं है कि उन्हें मरवा दे, और अगर कोई पार्टी उन्हें मरवाने की कोशिश करेगी तो वह सत्ता से बेदखल हो जाएगी। उन्होंने इस दौरान गोरखपुर की जनता को निडर और डरा हुआ बताते हुए कहा कि उन्हें सत्ता और परम सत्ता दोनों द्वारा डराया जा रहा है। हालांकि, उनका कहना था कि परम सत्ता उनके साथ है, जैसा कि आज का मौसम भी दिखा रहा है।
शंकराचार्य ने गो-रक्षा के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि गाय को केवल माता कहकर पुकारा नहीं जा सकता, बल्कि उसका अनादर करना तो दूर, उसे मारना भी नहीं चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान में किसी मांग पर सरकार नहीं सुनेगी या ईसाईयों के देश में उनकी बात नहीं मानी जाएगी, लेकिन भारत में गोमाता की रक्षा की बात सरकार नहीं सुनती, जिसका मतलब है कि भारत हिंदू राष्ट्र नहीं है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि जो सरकार सत्ता में है, अगर वह सच में हिंदू पार्टी होती, तो गोमाता का संकल्प पूरा करती। उन्होंने मौजूदा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि इसमें तो ‘एक-दो-चार इंजन और इंजन ही इंजन हैं, जनता के लिए डब्बा कहां है?’ अगर है भी तो वह फर्स्ट क्लास का है, जिसमें सिर्फ उनके चापलूस बैठते हैं।
अविमुक्तेश्वरानंद महाराज की ‘गोविष्टि यात्रा’ शुरू
रविवार, 3 मई को गोरखपुर के सहारा स्टेट स्थित भारत माता मंदिर के समक्ष जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने गोविष्टि यात्रा को गोरखा झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर उन्होंने जनता से अपने भ्रम को दूर करने का आह्वान किया। शंकराचार्य ने कहा कि सरकार हमारी प्रतिनिधि नहीं है, बल्कि हम (जनता) ही सरकार हैं। जो जनता मतदान करती है, वह सत्ता में है, और जो नहीं करती, वह विपक्ष में है। उन्होंने लोगों से मतदान करने की अपील करते हुए कहा कि आप जो चाहेंगे, वही होगा, आप चाहेंगे तो गाय की रक्षा होगी, आप चाहेंगे तो उसकी हत्या होगी।
ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वेदों का हवाला देते हुए कहा कि गाय को मारने वाले असुर को मार दिया गया है और हमें भी गोमाता को सताने वाले असुरों को मारना होगा। इसके लिए पहली उंगली उठानी होगी। उन्होंने कहा कि गाय को राज्यमाता घोषित करने के लिए मुख्यमंत्री बनना पड़ेगा, क्योंकि जो मुख्यमंत्री है, वह गाय की रक्षा नहीं कर पा रहा है और इस मामले में कमजोर है। शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनके बारे में प्रचार है कि वे केंद्र की नहीं सुनते, अपने मन की करते हैं, लेकिन यह गलत है। अगर उनमें साहस होता तो वे गोरक्षनाथ जी की ओर हाथ करके केंद्र की परवाह किए बिना गोमाता को राज्य माता घोषित कर देते। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री ऐसा तेवर दिखाते तो लोग उनके कसीदे पढ़ रहे होते, लेकिन वे मुसलमान और गो-हत्यारों के वोट खोने के डर से ऐसा नहीं करते। शंकराचार्य ने हिमन्त बिस्वा का उदाहरण देते हुए कहा कि एक पत्रकार ने जब उनसे पूछा कि क्या उन्हें गो-हत्यारों का वोट चाहिए, तो भाजपा के मुख्यमंत्री ने ‘हां’ कहा।
भाजपा को वोट देने का मतलब गो-हत्यारों को समर्थन देना: शंकराचार्य
शंकराचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाजपा को वोट देने का मतलब गो-हत्यारों को समर्थन देना है। उन्होंने कहा कि आप भाजपा को वोट देंगे तो गो-हत्यारों और आपका वोट एक ही पात्र में रहेगा, गो-हत्यारों का वोट ईवीएम मशीन में जाएगा। क्या आप गाय का खून और दूध मिलाकर पिएंगे? उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बहुत डराने की कोशिश की गई, लेकिन वे किसी भी योद्धा को परास्त करने में देर नहीं लगाएंगे। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि हममें से बहुत से लोग इन्हें ही अपना समझ रहे हैं, जबकि 37 से ज्यादा कानून हिंदुओं के खिलाफ हैं, मंदिर तोड़े जा रहे हैं और भाजपा ने भगवान के गले में फंदे डालकर जेसीबी से खींचा है।
संविधान बदलने की कोशिशों पर भी शंकराचार्य ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समलैंगिकता अब अपराध नहीं रह गई है और अंबेडकर के भक्त भी उनके संविधान को बदल रहे हैं। उन्होंने पूरे विश्व को यह संदेश दिया कि अगर गाय राष्ट्रमाता नहीं बन सकती तो कम से कम हम उसे अपनी माता तो कह ही सकते हैं। उन्होंने गोरक्षा और रामाधाम के नाम पर ‘एक नोट, एक वोट’ देने की अपील की। शंकराचार्य ने हर विधानसभा में गोरक्षा के लिए बनने वाले रामाधाम के लिए वोट देने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि तीसरे चरण में बूचड़खानों पर धावा बोलेंगे। उन्होंने कहा कि भारत का मुसलमान और ईसाई धार्मिक होता है, जबकि भारत का हिंदू सेकुलर हो जाता है। उन्होंने अपनी ’81 दिन में 81 युद्ध’ की चर्चा का भी जिक्र किया और बताया कि गोविष्टि यात्रा का शुभारंभ गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा से हो रहा है।
उत्तर प्रदेश के सभी तीर्थ स्थलों की परिक्रमा का दावा
अपनी यात्रा के बारे में बताते हुए शंकराचार्य ने कहा कि क्या कोई माई का लाल है जिसने उत्तर प्रदेश के सभी तीर्थ स्थलों की परिक्रमा की हो? वे यह करके आएंगे और कहेंगे कि उन्होंने किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका सत्ता या विपक्ष में रहने वाली किसी पार्टी से कोई संबंध नहीं है। शंकराचार्य को किसी पार्टी का मोहताज होने की जरूरत नहीं है, वे अगर उत्तर प्रदेश में कहीं भी 5-7 किलोमीटर की पदयात्रा करेंगे तो सनातन धर्मी सड़क पर फूल बिछा देंगे।
उनसे यह सवाल भी पूछा गया कि जब बाकी शंकराचार्य नहीं बोल रहे तो वे ही क्यों बोल रहे हैं। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि यह उनकी अकेले की आवाज नहीं है और न ही उनका अकेले का आंदोलन। उन्होंने बताया कि चारों शंकराचार्य मिलकर इस आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं। जैसे किसी पार्टी का एक प्रवक्ता होता है, वैसे ही चार शंकराचार्यों में उन्हें आगे किया गया है ताकि वे गौ माता की आवाज उठा सकें। उनकी आवाज चारों शंकराचार्यों की आवाज है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश उत्तर भारत के शंकराचार्य का प्रदेश है, इसलिए यहां पर उत्तर भारत के शंकराचार्य को बोलने का अधिकार है। पश्चिम के शंकराचार्य ने भी इस गोविष्टि यात्रा में सम्मिलित होने की बात कही है।
अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने चारों शंकराचार्यों के आगमन का किया संकेत
शंकराचार्य ने कहा कि अगर गोरखपुर सच में गोरखपुर हो जाए तो चारों शंकराचार्य यहां पधार सकते हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि वे योगी आदित्यनाथ को चिढ़ाने के लिए गोरखपुर नहीं आए हैं। वे जिस भी शहर जाएंगे, वहां की एलआईयू पूरे उत्तर प्रदेश में है, वह पता कर लेगी। वे गोरखनाथ मंदिर में पहले भी जा चुके हैं और बाबा के सानिध्य में बैठकर प्रार्थना कर चुके हैं। यात्रा पूरी होने के बाद वे फिर जाएंगे। उन्होंने दोहराया कि गोरखपुर आने से पहले उन्हें धमकी मिली थी और बहुत से लोगों ने यात्रा न करने या ‘अलनीनो’ का डर दिखाया, लेकिन वे नहीं माने। उन्होंने फिर कहा कि किसी माई के लाल में हिम्मत नहीं कि उन्हें मार दे और अगर पार्टियां ऐसा करती हैं तो वे सत्ता से बेदखल हो जाएंगी। उन्होंने गांधीजी का उदाहरण दिया कि गोडसे ने मारा था, आज दाग धुल गया। शंकराचार्य ने कहा कि कोई मरना नहीं चाहता, वे भी गोसेवा के संकल्प के लिए ऐसा चाहते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मुस्लिम और ईसाई समुदाय ने भी उनके इस अभियान का समर्थन किया है।
शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध योगी का नहीं, बल्कि गलती का है। उन्होंने भविष्यवाणी की कि वह दिन दूर नहीं जब सभी पार्टियां गो भक्त होंगी, और इसमें वोट से फर्क पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हर विधानसभा में एक हजार वोट इधर-उधर कर दिए जाएं तो फर्क पड़ जाएगा और तब इन्हें समझ में आ जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री के 8 हजार करोड़ के विमान पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर वे किराए पर चलें तो देश को कुछ रेवेन्यू मिलेगा।
चेन्नई सुपर किंग्स को लगा बड़ा झटका, इस धाकड़ ऑलराउंडर का टूटा पैर, IPL 2026 से हुआ बाहर
चेन्नई सुपर किंग्स के लिए रामकृष्ण घोष का आईपीएल डेब्यू यादगार तो रहा, लेकिन शायद उस तरह से नहीं जैसा उन्होंने सोचा होगा। दरअसल मुंबई इंडियंस के खिलाफ अपने पहले ही मैच में इस युवा ऑलराउंडर ने अपनी प्रतिभा की झलक दिखाई, लेकिन मैदान पर ही उन्हें दाहिने पैर में फ्रैक्चर का सामना करना पड़ा। अब सीएसके ने आधिकारिक तौर पर सोशल मीडिया के माध्यम से पुष्टि कर दी है कि रामकृष्ण घोष को इस चोट के कारण पूरे आईपीएल 2026 सीजन से बाहर होना पड़ा है। यह खबर चेन्नई सुपर किंग्स के लिए एक और बड़ा झटका है, खासकर ऐसे समय में जब टीम पहले से ही चोटिल खिलाड़ियों की लंबी सूची से जूझ रही है।
दरअसल घोष ने अपने आईपीएल डेब्यू मैच को कई मायनों में खास बनाया था। उन्होंने मुंबई इंडियंस के खिलाफ खेलते हुए, अनुभवी बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव को अपना शिकार बनाकर आईपीएल करियर का पहला विकेट झटका था। यह पल उनके लिए और टीम के लिए शानदार था। इसके अलावा, उन्होंने विल जैक्स का एक शानदार कैच भी लपका था, जिसने मैदान पर उनकी फुर्ती और खेल भावना को दिखाया। ये पल उनके लिए यादगार लम्हे थे, जो अब उन्हें मैदान से बाहर बैठकर ही याद करने होंगे। कोच स्टीफन फ्लेमिंग ने भी इस चोट को टीम के लिए “बहुत बड़ा झटका” माना है, जो घोष की अहमियत को बताता है।
आईपीएल 2025 के मेगा ऑक्शन में CSK ने ख़रीदा था
वहीं रामकृष्ण घोष को चेन्नई सुपर किंग्स ने आईपीएल 2025 के मेगा ऑक्शन में बड़ी उम्मीदों के साथ अपनी टीम में शामिल किया था। उनके ऑलराउंड प्रदर्शन की क्षमता को देखते हुए, टीम ने उन्हें आईपीएल 2026 सीजन के लिए भी रिटेन किया था। वह बल्ले और गेंद दोनों से टीम के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे सकते थे, जिससे टीम को संतुलन मिलता। एक बेहतरीन ऑलराउंडर होने के नाते, उनकी अनुपस्थिति टीम के मध्यक्रम और गेंदबाजी विकल्पों पर सीधा असर डालेगी। जिस तरह से उन्होंने डेब्यू में प्रदर्शन किया था, उससे लग रहा था कि वह इस सीजन में टीम के लिए एक अहम खोज साबित होंगे, लेकिन चोट ने उनके पहले पूरे सीजन की संभावनाओं पर पानी फेर दिया है।
OFFICIAL ANNOUNCEMENT:
Ramakrishna Ghosh sustained a fracture to his right foot during the CSK v MI match at Chepauk.
He will take no further part in IPL 2026.
Get well soon, Rambo. pic.twitter.com/CQve4zLixG— Chennai Super Kings (@ChennaiIPL) May 3, 2026
नाथन एलिस भी चोट के कारण बाहर हो गए थे
चेन्नई सुपर किंग्स के लिए चोटों का यह सिलसिला वाकई चिंताजनक है और थमने का नाम नहीं ले रहा है। सीजन शुरू होने से पहले ही टीम को ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज नाथन एलिस के बाहर होने का झटका लगा था। हाल ही में, अनुभवी तेज गेंदबाज खलील अहमद भी चोटिल होकर सीजन से बाहर हो गए हैं। इसके अलावा, सलामी बल्लेबाज आयुष म्हात्रे भी हैमस्ट्रिंग की चोट के चलते पूरे आईपीएल 2026 सीजन के लिए अनुपलब्ध हैं।
MS धोनी भी नहीं खेल रहे
इन सभी झटकों के बीच, टीम को सबसे ज्यादा कमी अपने करिश्माई कप्तान एमएस धोनी की खल रही है। काफ इंजरी के कारण धोनी अब तक आईपीएल 2026 में एक भी मैच नहीं खेले हैं। उनकी अनुपस्थिति में टीम को न केवल उनके अनुभव और कुशल नेतृत्व की कमी खल रही है, बल्कि मैच के अहम पलों में उनके फिनिशिंग टच की भी कमी साफ महसूस हो रही है। एक के बाद एक खिलाड़ियों का चोटिल होना चेन्नई सुपर किंग्स के लिए मौजूदा सीजन में एक बड़ी चुनौती बन गया है। अब टीम प्रबंधन को इन मुश्किल परिस्थितियों से निपटने और बाकी बचे मैचों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए नए सिरे से रणनीति बनानी होगी।
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