ऊर्जा कीमतों में उछाल के बीच होर्मुज स्ट्रेट खुलने पर राहत की उम्मीद: यूएस ट्रांसपोर्टेशन सेक्रेटरी
वॉशिंगटन, 3 मई (आईएएनएस)। अमेरिका के ट्रांसपोर्टेशन सेक्रेटरी सीन डफी ने रविवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ चल रहे विवाद को संभालने के तरीके का बचाव किया, जबकि बढ़ती ईंधन कीमतों से आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
एबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में डफी ने कहा कि ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन भरोसा भी जताया कि जैसे ही सप्लाई के रास्ते ठीक होंगे, कीमतें गिर जाएंगी।
उन्होंने कहा, “जैसे ही होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा, आप देखेंगे कि कीमतें तुरंत नीचे आने लगेंगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि सब कुछ तुरंत सामान्य नहीं होगा। इसका असर कुछ समय तक रहेगा। हालात पहले जैसे होने में थोड़ा वक्त लगेगा।
इस समय अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 4.45 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जिसके चलते कई लोग ड्राइविंग और घर के खर्चों में कटौती कर रहे हैं।
डफी ने इस पूरे मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए ट्रंप के फैसले का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि हम एक परमाणु ताकत वाला ईरान नहीं चाहते। उन्होंने ईरान को पिछले 40 वर्षों में दुनिया को अस्थिर करने वाली सबसे बड़ी ताकत बताया।
उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस लंबे समय में दुनिया और अमेरिका को सुरक्षित बनाना है। राष्ट्रपति ट्रंप मजबूत और बड़े फैसले ले रहे हैं।
जब उनसे आम लोगों पर पड़ रहे आर्थिक असर के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने घरेलू नीतियों और अमेरिका की ऊर्जा उत्पादन क्षमता की बात की।
उन्होंने कहा कि अमेरिका में सप्लाई की कमी नहीं होगी, क्योंकि हम खुद काफी उत्पादन करते हैं।
उन्होंने टैक्स से जुड़ी राहत का भी जिक्र किया। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि इस टैक्स सीजन में अमेरिकियों को अच्छा खासा टैक्स रिफंड मिले।
आलोचनाओं के बावजूद डफी का कहना है कि जैसे ही समुद्री रास्ते फिर से खुलेंगे, ऊर्जा की कीमतें कम हो जाएंगी।
डफी ने बजट एयरलाइन स्पिरिट एयरलाइंस के बंद होने पर भी बात की और यह मानने से इनकार किया कि सिर्फ युद्ध इसकी वजह है। उन्होंने कहा कि वे पहले से ही घाटे में चल रहे थे और बताया कि कंपनी पहले ही दिवालिया होने की प्रक्रिया में थी और लंबे समय से आर्थिक दिक्कतों का सामना कर रही थी।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने दूसरी एयरलाइनों के साथ मिलकर यात्रियों और कर्मचारियों की मदद करने की कोशिश की है। यात्रियों और कर्मचारियों को इस स्थिति से निकालने के लिए एक संयुक्त अमेरिकी प्रयास किया गया है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट का दोबारा खुलना बहुत जरूरी है, तभी वैश्विक सप्लाई में सुधार आएगा। हालात पूरी तरह सामान्य होने में कुछ महीने लग सकते हैं।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पाकिस्तान के बच्चों में बढ़ता लेड खतरा, दस में से चार के खून में मिला सीसा
इस्लामाबाद, 3 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के सात हाई-रिस्क इलाकों में रहने वाले 12-36 महीने के बच्चों पर किए गए एक नए अध्ययन में हर 10 में से चार बच्चों के खून में लेड (सीसा) पाया गया। यह स्टडी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा, नियमन और समन्वय मंत्रालय और यूनिसेफ ने मिलकर की है।
यूनिसेफ के मुताबिक, लेड के संपर्क में आने से बच्चों की ग्रोथ रुक सकती है। खून की कमी हो सकती है और इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ सकता है। इसके अलावा, इससे आईक्यू कम हो सकता है, ध्यान देने की क्षमता घटती है और याददाश्त पर भी असर पड़ता है। इससे बच्चों में पढ़ाई में दिक्कतें और व्यवहार से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
स्टडी में लेड के संपर्क में आने के कई संभावित स्रोत पहचाने गए हैं, जैसे फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं, बैटरियों की अनौपचारिक रीसाइक्लिंग, लेड वाला पेंट, दूषित खाना, मसाले और पारंपरिक कॉस्मेटिक्स।
यूनिसेफ के अनुसार, इस स्टडी में 2,100 बच्चों के सैंपल लिए गए, जो जोहरिपुर, इस्लामाबाद, कराची, लाहौर, पेशावर, क्वेटा और रावलपिंडी जैसे इंडस्ट्रियल इलाकों में रहते हैं।
रिपोर्ट में बताया गया कि हत्तार और हरिपुर के 88 प्रतिशत बच्चों के खून में लेड का स्तर बहुत ज्यादा था, जो सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र हैं। वहीं, इस्लामाबाद में यह आंकड़ा सिर्फ एक प्रतिशत था।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान में करीब 10 में से 8 बच्चे लेड के असर में हो सकते हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। इससे बच्चों की सीखने की क्षमता कम होती है, जिसका देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता है। अनुमान है कि इससे हर साल जीडीपी का 6-8 प्रतिशत यानी लगभग 25-35 बिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है।
यूनिसेफ की पाकिस्तान प्रतिनिधि पर्निले आयरनसाइड ने कहा, “बच्चे बड़े लोगों की तुलना में पांच गुना ज्यादा लेड सोख सकते हैं, इसलिए वे ज्यादा खतरे में होते हैं। लेड शरीर के हर हिस्से को प्रभावित करता है, लेकिन दिमाग पर इसका असर बहुत गंभीर और हमेशा के लिए हो सकता है। बच्चों के लिए लेड का कोई भी स्तर सुरक्षित नहीं है और इसका नुकसान वापस ठीक नहीं हो सकता।”
यूनिसेफ के अनुसार, 2026 में एक राष्ट्रीय स्तर का सर्वे किया जाएगा ताकि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अन्य कमजोर समूहों में लेड के प्रभाव को और अच्छे से समझा जा सके।
पार्टनरशिप फॉर अ लेड-फ्री फ्यूचर के डायरेक्टर अब्दुल्ला फादिल ने कहा, “लेड पॉइजनिंग बच्चों की सेहत के लिए सबसे ज्यादा रोके जा सकने वाले खतरों में से एक है। इसके असर जिंदगी भर रहते हैं, खासकर सीखने और काम करने की क्षमता पर।”
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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