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Iran में फटा अमेरिकी बम, मारे गए IRGC के 14 सैनिक

ईरान में हुए एक जबरदस्त धमाके से हाहाकार मच गया। यह धमाका एक शक्तिशाली बम के फटने का था। इस धमाके में आईआरजीसी यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्डकोर के 14 सैनिकों की मौत हो गई। यह जानकारी ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी फोर्स न्यूज़ ने जारी की है। यह बम धमाका शुक्रवार को उत्तर पश्चिमी प्रांत झंझन में हुआ। यहां आईआरजीसी के सैनिक सफाई अभियान चला रहे थे। ईरानी मीडिया के मुताबिक उत्तर पश्चिमी ईरान में बम निष्क्रिय करने के अभियान के दौरान यह धमाका हुआ है। इसमें आईआरजीसी के 14 सदस्य मारे गए जबकि दो अन्य घायल हो गए हैं। 

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फर्स्ट न्यूज़ एजेंसी ने बताया कि यह हादसा जांजन प्रांत में हुआ। जब एक खास क्लीयरेंस मिशन के दौरान अचानक बम फट गया। मारे गए लोग उस यूनिट का हिस्सा थे जिसे इलाके में बचे हुए बमों को हटाने और बेअसर करने का काम सौंपा गया था। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि इससे ईरानी आवाम और खेती की जमीन को लगातार खतरा बना हुआ है। जिंदा बमों की मौजूदगी की वजह से इलाके में लगभग 1200 हेक्टेयर खेती की जमीन खतरे में है। आईआरजीसी की अंसार अल महदी यूनिट ने इस बारे में एक बयान जारी किया है। इस बयान के मुताबिक यह बम धमाका युद्ध के समय फैले अज्ञात गोला बारूद की वजह से हुआ। इस धमाके में मारे गए 14 सैनिक यूनिट के सबसे अनुभवी और विशेषज्ञ सैनिक माने जाते थे। माना जा रहा है कि इलाके में मिला गोला बारूद युद्ध के दौरान इस्तेमाल किए गए क्लस्टर बम और फाइटर जेट से गिराए गए बारूदी माइंस की वजह से वहां मौजूद था। इस धमाके में घायल हुए दोनों सैनिकों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां दोनों का इलाज चल रहा है। 

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केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने सीएम योगी को लिखा पत्र: एनसीआर में श्रमिकों की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त

लखनऊ, 2 मई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के मंच ने एक विस्तृत पत्र लिखकर औद्योगिक क्षेत्रों, खासकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में काम कर रहे श्रमिकों की बदतर स्थिति का मुद्दा उठाया है। पत्र में श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी, लंबे काम के घंटे, सुरक्षा, यूनियन अधिकार और पुलिस कार्रवाई जैसे गंभीर मुद्दों पर ध्यान देने की मांग की गई है।

पत्र में कहा गया है कि पिछले 10 वर्षों से न्यूनतम मजदूरी में कोई संशोधन नहीं किया गया है, जबकि न्यूनतम मजदूरी अधिनियम में इसके लिए स्पष्ट प्रावधान हैं। महंगाई के कारण जरूरी वस्तुओं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे श्रमिकों का जीवन और कठिन हो गया है।

ट्रेड यूनियनों ने आरोप लगाया कि कई औद्योगिक इकाइयों में कार्यस्थल पर सुरक्षा के न्यूनतम उपाय भी नहीं किए जा रहे हैं। श्रमिकों को बिना ओवरटाइम भुगतान के 12-13 घंटे काम करने को मजबूर किया जाता है। महिला श्रमिकों सहित श्रमिकों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें आम हैं। कार्यस्थलों पर बुनियादी सुविधाएं जैसे शौचालय, पीने का पानी और विश्राम कक्ष तक उपलब्ध नहीं हैं। छुट्टियों के प्रावधानों की भी अनदेखी हो रही है।

पत्र में सबसे गंभीर मुद्दा यह उठाया गया है कि श्रमिकों को यूनियन बनाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। यदि कोई श्रमिक यूनियन बनाने का प्रयास करता है तो उसे नौकरी से निकाल दिए जाने का खतरा रहता है। सामूहिक सौदेबाजी की पूरी तरह अनुपस्थिति से श्रमिकों में हताशा और निराशा बढ़ रही है।

ट्रेड यूनियनों ने आरोप लगाया कि जब श्रमिकों ने अपनी शिकायतें दर्ज कराईं तो प्रशासन ने उनके नेताओं को नजरबंद कर दिया। प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों पर पुलिस द्वारा अत्याचार, गिरफ्तारियां और कड़ी धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए। महिला श्रमिकों का अपमान भी किया गया। कई परिवार अपने गिरफ्तार सदस्यों का पता लगाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं और जमानत याचिकाएं भी खारिज हो रही हैं।

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह किया है कि वे श्रमिकों के प्रति नरम रुख अपनाएं, गिरफ्तार श्रमिकों को रिहा करवाएं और उनके परिवारों को राहत दें। उन्होंने कहा कि औद्योगिक अशांति का कारण श्रमिक नहीं, बल्कि नियोक्ताओं द्वारा कानूनों का पालन न करना है।

यूनियनों ने मांग की है कि तत्काल प्रभाव से न्यूनतम मजदूरी समिति या बोर्ड का गठन किया जाए, जिसमें वैज्ञानिक आधार पर मजदूरी तय की जा सके। साथ ही केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों और उत्तर प्रदेश के नेताओं के साथ बैठक बुलाकर श्रमिकों के मुद्दों पर चर्चा की जाए।

ट्रेड यूनियनों ने चेतावनी दी है कि वैश्विक ऊर्जा संकट की स्थिति में यदि श्रमिकों की समस्याओं को नजरअंदाज किया गया तो उनकी बेचैनी और बढ़ेगी, जिससे औद्योगिक शांति प्रभावित हो सकती है।

--आईएएनएस

एससीएच

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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