स्कूली बच्चों की फीस को लेकर दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, शिक्षा निदेशालय ने जारी किया ये आदेश
Delhi School: अगर आप राजदानी दिल्ली में रहते हैं और आप अपने बच्चों की स्कूल फीस को लेकर परेशान हैं तो चिंता की कोई बात नहीं है. क्योंकि दिल्ली के स्कूलों में अब आपको एक बार में एक महीने से अधिक की फीस नहीं देनी होगी. ये बाद दिल्ली सरकार ने कही है. दिल्ली सरकार ने आदेश दिया है कि स्कूल छात्रों के अभिभावकों को एक बार में एक महीने से अधिक की फीस देने के लिए बाध्य नहीं कर सकते.
शिक्षा निदेशालय ने जारी किया आदेश
इस संबंध में शिक्षा निदेशालय (DOE) ने शुक्रवार को एक आदेश जारी किया. जिसमें कहा गया कि दिल्ली में कोई भी निजी गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त स्कूल किसी भी अभिभावक या संरक्षक को एक कैलेंडर महीने से अधिक की अवधि के लिए स्कूल फीस एक ही किस्त में भुगतान करने के लिए बाध्य, आवश्यक या अनिवार्य नहीं कर सकता है.
शिक्षा विभाग (DoE) ने अपने आदेश में कुछ निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों द्वारा अभिभावकों को दो महीने या तीन महीने की या फिर एडवांस में फीस जमा करने के लिए मजबूर करने के संबंध में अभिभावकों और संरक्षकों की बार-बार की शिकायतों का हवाला दिया.
शिक्षा विभाग के आदेश में कहा गया है, "यह नियम अभिभावकों, विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वर्ग के अभिभावकों पर अनुचित वित्तीय बोझ डालती है और शिक्षा तक समान और समावेशी पहुंच सुनिश्चित करने के मूल उद्देश्य के विपरीत है." आदेश में कहा गया है कि यह नियम उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों और शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप नहीं है.
आदेश में क्या कहा गया?
शिक्षा विभाग ने 15 फरवरी, 2019 के अपने परिपत्र का भी हवाला दिया, जिसमें निजी गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त स्कूलों को 10 अप्रैल, 2013 को "श्री राहुल चड्ढा और अन्य बनाम समर फील्ड स्कूल और अन्य" मामले में उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में मासिक आधार पर शुल्क वसूलने का निर्देश दिया गया था.
स्वेच्छा से एक महीने से ज्यादा की फीस दे सकते हैं पेरेंट्स
यह स्पष्ट करने के लिए कि शिक्षा विभाग के आदेश में यह साफ किया गया है कि यदि कोई माता-पिता या अभिभावक एक महीने से अधिक की फीस एक ही किश्त में देना चाहते हैं, तो उन्हें ऐसा करने की अनुमति दी जा सकती है. इस आदेश में स्कूलों को माता-पिता और अभिभावकों को एक बार में एक महीने से अधिक की फीस जमा करने के लिए मजबूर करने से भी प्रतिबंधित किया गया है, जिसे "प्रवेश, नामांकन जारी रखने, या छात्र को दिए जाने वाले किसी अन्य लाभ या सेवा" के लिए एक शर्त के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए.
नोटिस बोर्ड और अपनी वेबसाइट पर देना होगा संदेश
इसके साथ ही शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को कहा है कि उन्हें यह आदेश अपने नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करने और सात दिनों के भीतर इसे अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है. साथ ही विभाग ने कहा है कि अगर आदेश का पालन नहीं किया गया तो दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 और दिल्ली स्कूल शिक्षा नियम, 1973 के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का दावा, 'भारत के डिजिटल सुधारों से छोटे उद्यमों की उत्पादकता बढ़ी'
वाशिंगटन, 2 मई (आईएएनएस)। भारत में सार्वजनिक प्रशासन के डिजिटलीकरण ने सूक्ष्म उद्यमों (माइक्रो एंटरप्राइजेज) की उत्पादकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के एक वर्किंग पेपर में यह निष्कर्ष सामने आया है।
अध्ययन के अनुसार, 2010 से 2015 के बीच राज्यों में चरणबद्ध तरीके से लागू किए गए डिजिटल सुधारों ने छोटे कारोबारों की कार्यक्षमता में सुधार किया। यह विश्लेषण 2010-11 और 2015-16 के राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के फर्म-स्तरीय आंकड़ों पर आधारित है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन राज्यों ने कर प्रणाली, परमिट, निरीक्षण और विवाद निपटान जैसे क्षेत्रों में अधिक डिजिटल सुधार किए, वहां उत्पादकता वृद्धि ज्यादा देखी गई और कंपनियों के बीच प्रदर्शन का अंतर कम हुआ।
शोध में पाया गया, “जो राज्य सार्वजनिक प्रशासन के डिजिटलीकरण को अधिक अपनाते हैं, वहां फर्मों की उत्पादकता तेजी से बढ़ती है और उनके बीच असमानता घटती है।”
ये सुधार व्यापक कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने के प्रयासों का हिस्सा थे। 2014 में राज्यों ने 98-बिंदु कार्ययोजना पर सहमति जताई थी, जिसका उद्देश्य नियमों को सरल बनाना और डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना था।
अध्ययन में सुधारों को छह प्रमुख क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है—टैक्स सिस्टम, निर्माण परमिट, पर्यावरण व श्रम अनुपालन, निरीक्षण, वाणिज्यिक विवाद और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस। जिन राज्यों ने इन क्षेत्रों में अधिक प्रगति की, वहां कुल कारक उत्पादकता (टोटल फैक्टर प्रोडक्टिविटी) में अधिक वृद्धि दर्ज की गई।
डिजिटल टूल्स ने खासतौर पर छोटे कारोबारों पर प्रशासनिक बोझ कम किया। रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन टैक्स फाइलिंग और स्वचालित अनुमोदन जैसी प्रणालियों ने पारदर्शिता बढ़ाई, देरी घटाई और अनौपचारिक लागतों को कम किया।
रिपोर्ट में कहा गया, “प्रक्रियाओं को स्वचालित और पारदर्शी बनाकर डिजिटलीकरण सभी व्यवसायों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करता है।”
अध्ययन में यह भी पाया गया कि सुधार-उन्मुख राज्यों में कंपनियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा। साथ ही, सुधारों के शुरुआती चरण में लाभ अधिक मिला, जबकि समय के साथ इनका प्रभाव कुछ कम होता गया।
भारत का सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रिपोर्ट के अनुसार, यह क्षेत्र विनिर्माण उत्पादन का लगभग 35 प्रतिशत योगदान देता है और करीब 11 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता है।
आईएमएफ का यह अध्ययन संकेत देता है कि डिजिटल गवर्नेंस और प्रशासनिक सुधारों ने खासकर छोटे कारोबारों के लिए कारोबारी माहौल को अधिक सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने में ठोस योगदान दिया है।
--आईएएनएस
केआर/
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