गर्मी की खास मिठास, बघेलखंड की पारंपरिक गुड़हा सेव, कई दिन नहीं होते खराब, चख लिया तो खाते चले जाएंगे आप
गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही बघेलखंड के गांवों में पारंपरिक स्वाद और बचपन की यादें फिर से जीवंत हो उठती हैं. दादी-नानी के आंगन में बनने वाली देसी मिठाइयों में गुड़हा सेव आज भी खास पहचान बनाए हुए है. भले ही समय के साथ बच्चों की पसंद फास्ट फूड की ओर बढ़ी हो, लेकिन गांवों और छोटे कस्बों में इस पारंपरिक मिठाई की लोकप्रियता कायम है. गुड़, आटा (या बेसन) और देसी घी से बनने वाला गुड़हा सेव स्वादिष्ट होने के साथ-साथ शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करता है. पहले के समय में इसे एनर्जी फूड के रूप में खाया जाता था और आज भी गर्मियों में इसका महत्व बरकरार है. छुट्टियों में ननिहाल या ददिहाल पहुंचने वाले बच्चों का स्वागत भी अक्सर इसी मिठाई से किया जाता है.
Madhubani News: मिथिलांचल में क्यों खास है चूरा-दही? साधु-संतों से जुड़ी है कहानी
भारत में जब भी मिथिलांचल की बात होती है, तो चूड़ा-दही का जिक्र जरूर होता है. पहले यह भोजन मुख्य रूप से पंडितों और साधु-संतों तक सीमित था, क्योंकि वे शुद्धता के कारण किसी के घर का पका हुआ भोजन या नमक नहीं खाते थे. इसी वजह से मिथिलांचल में चूड़ा-दही खाने की परंपरा शुरू हुई. समय के साथ यह परंपरा आम लोगों में भी लोकप्रिय हो गई और आज यहां लोग इसे सुबह से लेकर रात तक कभी भी खाते हैं.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News18


















/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)




