होर्मुज संकट का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा नकारात्मक असर: यूएन प्रमुख
संयुक्त राष्ट्र, 1 मई (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बाधित होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है। यूएन चीफ के अलावा सिंगापुर के पीएम और यूरोप यूनियन की भी यही राय है।
सोशल मीडिया पोस्ट में गुटेरेस ने कहा कि इस जलडमरूमध्य में अवरोध के कारण “ऊर्जा, परिवहन, विनिर्माण और खाद्य बाजार” प्रभावित हो रहे हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था “दम तोड़ रही है।”
उन्होंने मध्य-पूर्व संकट पर गहरी चिंता जताते हुए कहा, “हर गुजरते घंटे के साथ हालात और गंभीर होते जा रहे हैं।”
गुटेरेस ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने कहा, “हमें ऐसे समाधान चाहिए जो हमें इस खतरनाक स्थिति से वापस ले आएं।”
दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का व्यवधान अंतरराष्ट्रीय बाजारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग और यूरोपीय यूनियन ने भी इसे लेकर फिक्र जाहिर की है। ईयू की विदेश नीति प्रमुख काया कालास ने कहा है कि होर्मुज में बढ़ा तनाव अभी कम होता नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा अब इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस हालात से रूस को फायदा हो रहा है।
वहीं लॉरेंस वोंग ने चेतावनी दी कि ईरान पर युद्ध के कारण इस साल शहर-राज्य में आर्थिक विकास धीमा हो जाएगा। मई दिवस के मौके पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि युद्ध के जल्द खत्म होने की उम्मीद नहीं है, और आने वाले महीनों में स्थिति और भी खराब हो सकती है।
वोंग ने कहा, हम पर इसका असर पड़ेगा क्योंकि हम खाड़ी से ऊर्जा और दूसरी जरूरी सप्लाई के लिए बहुत ज्यादा निर्भर हैं।
उन्होंने आगाह किया कि दुनिया भर में, महंगाई बढ़ेगी। इसका असर एनर्जी से खाने और फिर दूसरी जरूरी चीजों पर पड़ेगा। कुछ देश मंदी झेल सकते हैं, और इसका सिंगापुर पर सीधा असर हो सकता है। वोंग ने चेतावनी दी कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल भी जाता है, तो भी हालात तुरंत सामान्य नहीं होंगे।
उन्होंने कहा, बंदरगाहों और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है। शिपिंग लेन को माइन मुक्त करना होगा।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
अमेरिका ने आईपी अधिकार उल्लंघन को लेकर भारत को प्रायोरिटी वॉच लिस्ट में शामिल किया
वाशिंगटन, 1 मई (आईएएनएस)। अमेरिका ने इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (आईपी) संबंधी चिंताओं के कारण भारत को एक बार फिर अपनी प्रायोरिटी वॉच लिस्ट में डाल दिया है। इसकी वजह प्रवर्तन में लगातार कमियां और पेटेंट संरक्षण में लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को बताया गया है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) द्वारा जारी 2026 स्पेशल 301 रिपोर्ट में भारत के साथ चीन, रूस और इंडोनेशिया को भी शामिल किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने अपनी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी अधिकारों को मजबूत करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। इनमें परीक्षकों की संख्या बढ़ाना और जागरूकता बढ़ाना शामिल है। लेकिन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रगति एकसमान नहीं है।
रिपोर्ट में कहा गया, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के संरक्षण और प्रवर्तन के मामले में भारत दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है।
पेटेंट संबंधी मुद्दे एक प्रमुख चिंता का विषय बने हुए हैं। रिपोर्ट में अनुमोदन में होने वाली लंबी देरी की ओर इशारा किया गया है। इसमें अत्यधिक रिपोर्टिंग आवश्यकताओं और लंबी विरोध प्रक्रियाओं का भी जिक्र किया गया है।
यूएसटीआर ने कहा कि पेटेंट योग्य विषयवस्तु पर प्रतिबंध, विशेष रूप से दवा क्षेत्र में, कंपनियों को प्रभावित करते रहते हैं।
रिपोर्ट में दवाओं और कृषि रसायनों के विपणन अनुमोदन प्राप्त करने के लिए उपयोग किए जाने वाले परीक्षण डेटा की सुरक्षा के लिए एक प्रभावी प्रणाली के अभाव पर भी चिंता व्यक्त की गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रवर्तन कमजोर बना हुआ है। अधिकारियों के समन्वय में कमियां हैं। दंड अकसर उल्लंघन को रोकने में प्रभावी नहीं होते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, भारत का समग्र आईपी प्रवर्तन अपर्याप्त बना हुआ है।
रिपोर्ट में कहा गया कि उच्च स्तर की पायरेसी और नकली सामान का प्रचलन जारी है। वहीं, अवैध स्ट्रीमिंग, सॉफ्टवेयर के उपयोग और नकली सामान को लगातार बने रहने को बड़ी समस्याओं के रूप में शामिल किया गया है। ट्रेडमार्क प्रवर्तन में भी देरी होती है। कंपनियां विरोध मामलों में लंबे समय से लंबित मामलों और जांच की गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त करती हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में व्यापार रहस्यों पर कोई समर्पित कानून नहीं है। कंपनियों को मालिकाना जानकारी की सुरक्षा में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
चिंताओं के बावजूद, अमेरिकी व्यापार मंत्री ने कुछ सकारात्मक कदमों का उल्लेख किया। भारत ने 2024 में पेटेंट नियमों में संशोधन किया। इन परिवर्तनों का उद्देश्य दक्षता में सुधार करना और बोझ कम करना है।
अमेरिका ने कहा कि वह व्यापार वार्ता और व्यापार नीति मंच के माध्यम से भारत के साथ बातचीत जारी रखेगा।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा, अनुचित व्यापार प्रथाओं से निपटने के लिए हमारे पास मौजूद सभी प्रवर्तन उपकरणों का उपयोग करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
राजदूत रिक स्विट्जर ने कहा, अमेरिकी नवप्रवर्तक, रचनाकार और ब्रांड मालिक मजबूत आईपी संरक्षण और प्रवर्तन पर निर्भर हैं।
स्पेशल 301 रिपोर्ट अमेरिकी व्यापार भागीदारों के बीच आईपी संरक्षण की वार्षिक समीक्षा है।
प्राथमिकता निगरानी सूची में शामिल देशों पर वाशिंगटन द्वारा कड़ी निगरानी रखी जाती है और उनसे संपर्क किया जाता है।
भारत को इस सूची में शामिल करना आईपी नीति पर दोनों देशों के बीच निरंतर मतभेदों को दर्शाता है। यह मुद्दा लंबे समय से व्यापारिक चर्चाओं का विषय रहा है, विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल्स और डिजिटल क्षेत्रों में।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation






















