एक ऐसा फैसला जिसने नेपाल की सियासत को हिला दिया है और सीमा पार तक हलचल मचा दी है। कुछ ही हफ्तों पहले जिसे जनता का समर्थन हासिल था। आज उसी नेतृत्व के खिलाफ विरोध की लहर उठती दिख रही है और कहानी यहीं खत्म नहीं होती। ठीक 1 महीने पहले नेपाल की जिस जजी ने बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनाया था वही जजी अब बालेन शाह के खिलाफ उतर आई है। कुछ दिन पहले नेपाल में सीमा और व्यापार से जुड़े कुछ नए नियम लागू किए गए जिनके बाद हालात धीरे-धीरे बदलने लगे। वहीं दूसरी तरफ भारत नेपाल बॉर्डर पर भी कुछ व्यवस्थाओं में बदलाव देखने को मिला। जिससे आम लोगों की आवाजाही और रोजमर्रा की जिंदगी पर भारी असर पड़ने लगा। अब हालात ऐसे बनते नजर आ रहे हैं कि नेपाल के भीतर राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। जहां एक तरफ सरकार अपने फैसले को जरूरी बता रही है, वहीं दूसरी तरफ जनता के एक वर्ग में असंतोष और नाराजगी की आवाजें तेज हो रही हैं। कुछ दिन पहले नेपाल की बालेन शाह सरकार ने भारत को अकर दिखाने की कोशिश की थी। लेकिन भारत ने 48 घंटों में नेपाल का इलाज कर दिया।
भारत कभी नहीं चाहेगा कि नेपाल के साथ उसके रिश्ते पर कभी भी आ जाए। लेकिन अगर नेपाल की सरकार अकड़ दिखाएगी तो गद्दारी का बदला लिया जाएगा और इस बार भारत ने 48 घंटों के अंदर ही नेपाल की सरकार को गद्दारी की सजा भी दे दी है। दरअसल भारत की तरफ से एक बड़ा कदम सामने आया है। बिहार के सीमावर्ती जिलों पूर्णिया, किशनगंज, सुफोल और कटिहार में अब नेपाली नंबर प्लेट वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल देने पर रोक लगा दी गई है। यह फैसला सामने आते ही पूरे सीमा क्षेत्र में हलचल मच गई है। आपको याद होगा कि कुछ दिन पहले नेपाल की बालनशाह सरकार ने एक ऐलान किया था। इस ऐलान के तहत नेपाल के लोग अगर भारत से 100 से ज्यादा का सामान खरीद लेते हैं तो इन पर नेपाली लोगों को कस्टम ड्यूटी देना ही होगा। कहा जा रहा है कि इन फैसलों के बाद नेपाल में हलचल और बढ़ गई। कुछ लोग इसे रणनीतिक दबाव मान रहे हैं तो कुछ इसे प्रशासनिक कदम बता रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि इसका असर आम जनता पर साफ दिखने लगा है।
नेपाल पहले ही महंगाई और ईंधन संकट से जूझ रहा था। तराई क्षेत्रों में पेट्रोल डीजल की कीमतें भारत से काफी ज्यादा है। जिससे लोग सीमावर्ती इलाकों पर निर्भर रहते थे। लेकिन हाल में बदलावों ने उनकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। जहां एक तरफ सरकार अपने फैसलों पर कायम है, वहीं दूसरी तरफ विरोध और असंतोष की आवाजें भी उठने लगी हैं। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर तक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ नीतियों का टकराव है या फिर नेपाल की राजनीतिक एक बड़े बदलाव की तरफ बढ़ रही है।
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मई महीने में भोपाल से जोधपुर यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल में स्थित कनकपुरा स्टेशन के यार्ड में नॉन-इंटरलॉकिंग (ट्रैक मेंटेनेंस) कार्य किया जा रहा है, जिसके कारण भोपाल और जोधपुर के बीच चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेन के कई फेरे रद्द किए गए हैं।
भोपाल-जोधपुर एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 14814)
भोपाल से प्रस्थान करने वाली यह ट्रेन मई महीने में कुल 7 दिन निरस्त रहेगी। यह ट्रेन 3, 4, 5, 8, 12, 13 और 14 मई 2026 को भोपाल से नहीं चलेगी।
जोधपुर-भोपाल एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 14813)
जोधपुर से भोपाल की ओर आने वाली ट्रेन भी 7 ट्रिप के लिए रद्द की गई है। 2, 3, 4, 7, 11, 12 और 13 मई 2026 को यह गाड़ी जोधपुर से रवाना नहीं होगी।
जबलपुर-अजमेर-जबलपुर एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन भी आंशिक रूप से प्रभावित
जबलपुर-अजमेर एक्सप्रेस (12181/12182) ट्रेन 4 से 15 मई के बीच अलग-अलग तारीखों पर अजमेर और जयपुर के बीच आंशिक रूप से रद्द रहेगी। यह ट्रेन केवल जयपुर तक ही जाएगी और वहीं से वापस आएगी। गाड़ी संख्या 12181 जबलपुर-अजमेर एक्सप्रेस 3 से 5 मई, 8 मई और 11 से 14 मई तक जबलपुर से चलकर केवल जयपुर तक ही जाएगी। इस दौरान जयपुर और अजमेर के बीच यह ट्रेन नहीं चलेगी। गाड़ी संख्या 12182 अजमेर-जबलपुर एक्सप्रेस 4 से 6 मई, 9 मई और 12 से 15 मई तक अजमेर के स्थान पर जयपुर से चलेगी।
यदि आपने इन तारीखों में टिकट बुक किया है, तो यात्रा पर निकलने से पहले 139 पर कॉल करके या रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट www.enquiry.indianrail.gov.in या NTES App पर अपनी ट्रेन का करंट स्टेटस जरूर चेक कर लें। रेल प्रशासन ने यात्रियों से असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है।
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