जर्मन एयरलाइन लुफ्थांसा ने 20 हजार फ्लाइट्स रद्द कीं:ईरान जंग से ईंधन महंगा; यूरोप में सिर्फ 6 हफ्ते का जेट फ्यूल बाकी
जर्मनी की एयरलाइन लुफ्थांसा ने मई से अक्टूबर तक 20 हजार शॉर्ट-हॉल फ्लाइट्स रद्द करने का फैसला लिया है। ईरान जंग के कारण यूरोप में जेट फ्यूल की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। कंपनी के मुताबिक इससे करीब 40 हजार टन जेट फ्यूल की बचत होगी। कंपनी ने सोमवार से रोजाना करीब 120 उड़ानें घटाई हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहने से तेल सप्लाई प्रभावित हुई और यूरोप में जेट फ्यूल सप्लाई की चिंता बढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने चेतावनी दी है कि यूरोप के पास केवल 6 हफ्तों का जेट फ्यूल बचा है। नेटवर्क में बड़े बदलाव, घाटे वाले रूट बंद लुफ्थांसा ने मंगलवार को कहा कि वह अपने छोटे रूट के नेटवर्क में बदलाव करके गर्मियों का फ्लाइट शेड्यूल स्थिर रखेगी। कंपनी अप्रैल के आखिर या मई की शुरुआत में पूरी योजना जारी करेगी। कंपनी ने अपने नेटवर्क में बड़े बदलाव किए हैं। फ्रैंकफर्ट और म्यूनिख से घाटे वाले रूट बंद किए जा रहे हैं, जबकि ज्यूरिख, ब्रसेल्स और वियना से उड़ानें बढ़ाई जाएंगी। इससे यात्रियों को लंबी दूरी की उड़ानों से बेहतर कनेक्शन मिलेगा। गर्मियों के अंत तक लंबी दूरी की उड़ानों की क्षमता थोड़ी कम की जाएगी। 6 बड़े विमान हटाए जाएंगे, 2 बोइंग 747 सर्दियों में नहीं उड़ेंगे और 4 एयरबस A340-600 विमान अक्टूबर में हमेशा के लिए बंद कर दिए जाएंगे। खर्च कम करने के लिए कंपनी अपने सिटीलाइन बेड़े के 27 विमान भी बंद कर रही है। इसके पीछे महंगा ईंधन और कर्मचारियों से जुड़े विवाद मुख्य वजह बताए गए हैं। यूरोप में जेट फ्यूल की किल्लत ईरान जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट पर शुरुआत से तनाव बना हुआ है। इससे ईंधन और गैस सप्लाई प्रभावित हुआ है। हालांकि, यूरोप के ट्रांसपोर्ट मंत्री जेट फ्यूल की कमी से निपटने के उपायों पर चर्चा कर रहे हैं। यूरोपीय संघ (EU) वैकल्पिक अमेरिकी जेट फ्यूल और बाहर से ज्यादा फ्यूल भरने की अनुमति जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है। यूरोप की रयानएयर एयरलाइन के प्रमुख माइकल ओ लेरी ने चेतावनी दी कि अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद रहा तो मई से सप्लाई बाधित हो सकती है। दुनिया भर की एयरलाइंस पर असर, टिकट महंगे दुनिया भर की एयरलाइंस पर इसका असर दिख रहा है। अमेरिका की डेल्टा एयरलाइंस ने करीब 3.5% नेटवर्क में कटौती कर 1 बिलियन डॉलर बचाने की योजना बनाई है। हांगकांग की कैथे पैसिफिक, मलेशिया की एयर एशिया X और न्यूजीलैंड की एयर न्यूजीलैंड जैसी एयरलाइंस भी रूट कम कर रही हैं। कई एयरलाइंस ने टिकट महंगे किए हैं या फ्यूल सरचार्ज लगाया है। यूरोप की ईजीजेट ने ईंधन महंगा होने से ज्यादा घाटे की चेतावनी दी है। जबकि ब्रिटिश एयरलाइन वर्जिन अटलांटिक ने कहा कि कीमतें बढ़ाने के बावजूद इस साल मुनाफा मुश्किल रहेगा। जेट फ्यूल महंगाई से यात्रियों पर असर जेट फ्यूल महंगा होने का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ रहा है। एयरलाइंस की कुल लागत में फ्यूल का हिस्सा 25% से 40% तक होता है। फ्यूल कीमतें बढ़ते ही कंपनियां टिकट महंगे करती हैं या फ्लाइट्स घटाती हैं। रूट नेटवर्क में बदलाव का मतलब है कि कई डायरेक्ट फ्लाइट्स बंद हो सकती हैं। यात्रियों को कनेक्टिंग फ्लाइट्स लेनी पड़ सकती हैं, जिससे यात्रा का समय और ट्रांजिट का झंझट बढ़ेगा। ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… ईरान युद्ध के कारण यूरोप में जेट फ्यूल का संकट:6 हफ्ते का स्टॉक बचा; दुनियाभर में रद्द हो सकती हैं फ्लाइट्स, हवाई सफर महंगा होगा ईरान युद्ध और होर्मुज रूट बंद होने से यूरोप और एशिया में जेट फ्यूल की भारी कमी होने वाली है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के मुताबिक, यूरोप के पास अब सिर्फ 6 हफ्ते का तेल बचा है। अगर सप्लाई जल्द शुरू नहीं हुई, तो गर्मियों की छुट्टियों के सीजन में फ्लाइट्स रद्द होंगी और टिकट के दाम बढ़ेंगे। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के डायरेक्टर फातिह बिरोल ने एक इंटरव्यू में बताया कि ग्लोबल इकोनॉमी अब तक के सबसे बड़े ऊर्जा संकट का सामना कर रही है। यूरोप के कुछ देशों के पास आमतौर पर कई महीनों का जेट फ्यूल स्टॉक होता है, लेकिन युद्ध की वजह से अब यह तेजी से घट रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
पंजाबी महिला अमेरिका की जेल में कैद:35 साल बाद अचानक गिरफ्तार, एयरपोर्ट पर हथकड़ी लगाई; बेटा US आर्मी में अफसर
अमेरिका के टेक्सास में रहने वाली पंजाबी मूल की कोर्ट इंटरप्रेटर मीनू बत्रा को 35 साल बाद अचानक गिरफ्तार कर लिया गया। अमेरिकन इमिग्रेशन एजेंसी ने उन्हें एयरपोर्ट पर हथकड़ी लगाकर हिरासत में लिया और जेल भेज दिया। मीनू पर इमिग्रेशन कानून का उल्लंघन कर अमेरिका में रहने का आरोप है, जिसके चलते अब उनके डिपोर्टेशन की तैयारी की जा रही है। हालांकि उनके वकीलों का दावा है कि मीनू को ‘विदहोल्डिंग ऑफ रिमूवल’ की कानूनी सुरक्षा मिली हुई है और कोर्ट पहले ही उन्हें भारत न भेजने की बात स्पष्ट कर चुका है। हालांकि कोर्ट ने अभी तक उनके डिपोर्टेशन को लेकर कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया है। मीनू टेक्सास कोर्ट में पंजाबी, हिंदी और उर्दू की इंटरप्रेटर हैं और उनका बड़ा बेटा अमेरिकी सेना में अधिकारी है। कब क्या हुआ और क्यों फंसीं मीनू, सिलसिलेवार जानिए… सोशल मीडिया के लिए खिंचवाई फोटो मीनू बत्रा के वकील दीपक आहलूवालिया ने कहा कि अधिकारियों ने उनके साथ बहुत बुरा व्यवहार किया। उन्होंने जबरन मीनू के हाथ पीछे करवाकर फोटो खिंचवाई ताकि वह अपराधी लगें और कहा कि यह सोशल मीडिया के लिए है। जेल के अंदर मीनू अब अन्य महिलाओं की मदद कर रही हैं, जो अंग्रेजी नहीं जानतीं। वे बताती हैं कि वहां लोग डिप्रेशन में हैं और कई ने आत्महत्या की कोशिश भी की है। सरकार का तर्क, मीनू के पास नहीं है नागरिकता कोर्ट में डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) का कहना है कि मीनू के पास 2000 का फाइनल रिमूवल ऑर्डर है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्क परमिट होने का मतलब यह नहीं है कि कोई अमेरिका में कानूनी रूप से हमेशा रह सकता है। सरकार अब प्रवासियों को सेल्फ डिपोर्ट के लिए कह रही है। कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया दीपक आहलूवालिया का कहना है कि विदहोल्डिंग ऑफ रिमूवल मिलने के बाद इसे दो तरीकों से ही वापस लिया जा सकता है। यदि किसी ने अपराध किया हो तो आईसीई यह मोशन फाइल कर सकती है कि इसे वापस लिया जाए। दूसरा है 'कंट्री कंडीशन' फाइल किया जाना, जिसमें कहा जाता है कि हालात अब बदल गए हैं और मीनू को अपने मूल देश में कोई खतरा नहीं है। उनका कहना है कि इमिग्रेशन अधिकारियों द्वारा ऐसा कोई भी मोशन फाइल नहीं किया गया और न ही 26 वर्षों के दौरान आईसीई द्वारा उन्हें कोई नोटिस भेजा गया। मीनू बत्रा के पक्ष में आए ये लोग अमेरिकन ट्रांसलेटर्स एसोसिएशन पर मौजूद मीनू बत्रा की प्रोफाइल के मुताबिक उनके पास टेक्सास स्टेट से मास्टर लेवल कोर्ट इंटरप्रेटर का लाइसेंस मौजूद है। स्थानीय राजनेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अनुवादकों के संगठनों ने भी मीनू को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ आवाज उठाई है। मीनू बत्रा टेक्सास एसोसिएशन ऑफ ज्यूडिशियरी इंटरप्रेटर्स एंड ट्रांसलेटर्स' (TAJIT) की बोर्ड मेंबर भी रह चुकी हैं।
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