अगर धूप में अचानक सीने में भारीपन और पसीना आए, तो ‘हार्ट अटैक’ और ‘लू’ के बीच फर्क कैसे पहचानें?
कई बार लोगों को माइनर हार्ट अटैक आ जाता है, जिसे वह लू के लक्षण समझ लेते हैं और नजरअंदाज कर देते हैं. हालांकि, इस तरह की स्थिति से बचा जा सके, इसलिए इस स्टोरी में हम आपको दोनों के लक्षणों के बीच का फर्क बताएंगे.
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Bhaum Pradosh Vrat 2026: आज वैशाख मास के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत, नोट कर लें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व
Bhaum Pradosh Vrat 2026: भगवान शिव का प्रिय व्रत है प्रदोष व्रत. हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष में दो प्रदोष व्रत होते हैं. प्रदोष व्रत को दिन के अनुसार जाना जाता है. वैशाख मास के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत आज यानी 28 अप्रैल 2026, मंगलवार के दिन है. इसलिए इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा. प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में की जाती है. त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. इस व्रत को रखने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसके साथ ही जीवन के सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं. घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है. भौम प्रदोष व्रत रखने से मंगल दोष समाप्त होता है. विवाह की बाधाएं दूर होती हैं. कर्ज से छुटकारा मिल जाता है. आइए जानते हैं वैशाख शुक्ल प्रदोष व्रत पर किस मुहू्र्त में पूजा करना शुभ है.
वैशाख शुक्ल प्रदोष व्रत आज
पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 28 अप्रैल को शाम 06 बजकर 51 मिनट पर शुरु होगी. त्रयोदशी तिथि का समापन 29 अप्रैल को शाम 07 बजकर 51 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, प्रदोष व्रत आज यानी 28 अप्रैल मंगलवार को रखना शुभ माना जा रहा है. प्रदोष काल की पूजा का मुहूर्त इस साल 28 अप्रैल को मिलेगा.वैशाख मास के शुक्ल पक्ष के प्रदोष व्रत को मंगलवार के दिन होने की वजह से भौम प्रदोष कहा जाएगा.
भौम प्रदोष पूजा मुहूर्त (Bhaum Pradosh Vrat Puja Muhurat)
आज 28 अप्रैल को पूजा का मुहूर्त प्रदोष काल में शाम 06 बजकर 54 मिनट से रात 09 बजकर 04 मिनट तक रहेगा. इस मुहूर्त में पूजा करने से ही व्रत का पूरा फल प्राप्त होगा. सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी.
भौम प्रदोष व्रत पूजा विधि (Bhaum Pradosh Vrat Puja Vidhi)
आज भौम प्रदोष व्रत के दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर व्रत संकल्प लें.
भगवान शिव का सुबह रुद्राभिषेक करें.
पंचामृत से अभिषेक करना बेहद शुभ होता है.
शिव जी को बेलपत्र, तुलसी पत्र और शमी पत्र चढ़ाएं.
शिव जी का चंदन और सुगंधित फूलों से श्रंगार करें
ऋतु फल और दूध से बने पदार्थों का भोग लगाएं.
पूजा के बाद श्रद्धा भक्ति से आरती करें.
आरती के बाद आसन पर बैठकर ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करें.
महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें.
शिव चालीसा, शिव स्तोत्र का पाठ करें.
अपनी सामर्थ्य के अनुसार, ब्राह्मण और गरीबों को दान दें.
पूरा दिन शांत मन से व्यतीत करें.
शाम के समय प्रदोष काल के मुहूर्त में फिर से रुद्राभिषेक करें.
पूजा की पूरी विधि संपन्न करें.
भौम प्रदोष व्रत में न करें ये गलती
भौम प्रदोष व्रत के दिन घर में कलेश करने से बचें
क्रोध और गुस्सा भूलकर न करें.
चावल का सेवन करने से बचना चाहिए.
मांस-मदिरा का सेवन न करें.
लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन करने से बचें.
बाल और नाखून न काटें.
बड़ों का अपमान न करें.
ब्रह्मचर्य का पालन करें.
भौम प्रदोष व्रत का महत्व (Bhaum Pradosh Vrat Significance)
शास्त्रों के अनुसार, मंगलवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस प्रदोष व्रत को रखने से मंगल दोष में शांति प्राप्त होती है. कर्ज से मुक्ति मिलती है. प्रॉपर्टी से संबंधित विवाद समाप्त होते हैं. आत्मविश्वास और पराक्रम में वृद्धि होती है. आरोग्यता की प्राप्ति होती है. बीमारियों से छुटकारा मिल जाता है. इस व्रत को रखने से वैवाहिक जीवन की परेशानियां समाप्त होती हैं. विवाह में देरी हो रही हो तो शास्त्र विधि से भौम प्रदोष व्रत रखना चाहिए. इससे विवाह की बाधाएं दूर होती हैं, शीघ्र ही उत्तम जीवनसाथी की प्राप्ति होती है. भगवान शिव की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति होती है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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