पश्चिम बंगाल की मानिकतला सीट पर रोचक और कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। बता दें कि मानिकतला सीट पर 4 उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। साल 2011 से लगातार चार बार समेत कुल पांच बार यहां से तृणमूल कांग्रेस ने जीत हासिल की है। इस सीट पर 29 अप्रैल 2026 को मतदान होने हैं और वहीं 04 मई 2026 को मतगणना होगी। यह सीट साल 1951 में बनी थी। तब से इस सीट पर 18 विधानसभा चुनाव हुए हैं।
मुख्य मुकाबला
विधानसभा चुनाव में मानिकतला सीट से भारतीय जनता पार्टी ने तापस रॉय को चुनावी रण में उतारा है। वहीं टीएमसी ने श्रेया पांडे को चुनावी मैदान में उतारा है। वहीं सीपीआई ने मौसमी घोष और कांग्रेस पार्टी ने सुगातो रॉय चौधरी पर भरोसा जताया है। इस सीट पर लेफ्ट पार्टियों ने 12 बार जीत हासिल की है। ऐसे में इस सीट पर लेफ्ट पार्टियों का दबदबा माना जाता है। वहीं सीपीआई ने इस सीट पर 10 बार और CPI(M) ने दो बार जीत हासिल की है।
पश्चिम बंगाल की मानिकतला विधानसभा सीट पर मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और सीपीआई के बीच माना जा रहा है। यह मौका जहां भाजपा के लिए राज्य में अपनी जमीन तलाश को पूरी करने का मौका होगा। वहीं टीएमसी के लिए यह मुकाबला अपनी सत्ता को बरकरार रखने की चुनौती होगी।
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पश्चिम बंगाल की नोआपाड़ा विधानसभा सीट पर इस बार बेहद दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है। नाओपाड़ा सीट पर दूसरे चरण में 29 अप्रैल 2026 को मतदान होना है। इस सीट पर चार मुख्य दलों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। जिससे मुकाबला चतुष्कोणीय होने की उम्मीद है। बता दें कि इस सीट से भाजपा के अर्जुन सिंह, टीएमसी की तरफ से त्रिणांकुर भट्टाचार्य, सीपीएम की उम्मीदवार गार्गी चटर्जी और कांग्रेस की ओर से अशोक भट्टाचार्य चुनावी रण में हैं।
प्रतिष्ठा की लड़ाई
नोआपाड़ा विधानसभा सीट पर भाजपा के अर्जुन सिंह अपनी मजबूत सियासी पहचान और संगठन के बल पर जीत हासिल करने की कोशिश में हैं। इस क्षेत्र में वह पहले भी प्रभाव रखते हैं। वहीं भाजपा के लिए यह सीट जीतना उनके लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है। दूसरी ओर सत्तारूढ़ TMC ने त्रिणांकुर भट्टाचार्य लोकल स्तर पर काफी सक्रिय हैं। त्रिणांकुर भट्टाचार्य पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक को साधने का प्रयास कर रहे हैं।
दिलचस्प बना मुकाबला
लेफ्ट की तरफ से गार्गी चटर्जी इस विधानसभा चुनाव को जमीनी मुद्दों से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं। बेरोजगारी, महंगाई और श्रमिक वर्ग की समस्याओं पर गार्गी चटर्जी फोकस है। वहीं कांग्रेस के प्रत्याशी अशोक भट्टाचार्य भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए इस मुकाबले को दिलचस्प बना रहे हैं। इससे वोटों में बिखराव हो सकता है।
कुल मिलाकर देखा जाए, तो नोआपाड़ा सीट पर कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। किसी भी एक पार्टी को स्पष्ट बढ़ती मिलती नहीं दिख रही है। ऐसे में इस सीट का चुनाव परिणाम काफी हद तक मतदाताओं के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा, जोकि राज्य की राजनीति में अहम होगा।
वहीं, लेफ्ट की ओर से गार्गी चटर्जी इस विधानसभा चुनाव को जमीनी मुद्दों से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। महंगाई, बेरोजगारी और श्रमिक वर्ग की समस्याओं पर उनका फोकस है। वहीं, कांग्रेस के उम्मीदवार अशोक भट्टाचार्य भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए चुनावी मुकाबले को खासा दिलचस्प बनाने में जुटे हुए हैं, जिससे वोटों का बिखराव भी अहम हो सकता है।
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