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Uncovered with Manoj Gairola: 70 साल पुराने F-5 जेट के अमेरिकी बेस पर हमले ने क्या तोड़ दिया ट्रंप का घमंड?

Uncovered with Manoj Gairola: अगर हम आपको कहें कि ईरान ने 70 साल पुराने एक फाइटर जेट से मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे पर हमला किया और अमेरिका का वर्ल्ड फेमस एयर डिफेंस सिस्टम कुछ नहीं कर पाया तो क्या आप हमारी बात मानेंगे? शायद नहीं. ये हम समझ सकते हैं कि आपके लिए भी इस बात पर यकीन करना मुश्किल है, क्योंकि अगर इसकी जानकारी हमें नहीं मिली होती तो हमारे मन में भी वही सवाल उठते जो अभी आपके मन में होंगे.

पहला सवाल- जिस 70 साल पुराने F-5 जेट का यहां जिक्र हो रहा है उसे पुराना होने के कारण संसार के सभी देशों ने Active Service से हटा दिया है और कुछ देश इसे सिर्फ ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, ऐसा जेट कैसे अमेरिका को इतना नुकसान पहुंचा सकता है?

दूसरा सवाल- अमेरिका के एयर डिफेंस सिस्टम की Reputation इतनी Solid है कि कोई इसे भेदने के बारे में सोच भी नहीं सकताऔर खासतौर से इतने पुराने फाइटर जेट से तो बिलकुल भी नहीं ये सवाल भी वाजिब है.

तीसरा सवाल-  दूसरे विश्व युद्ध के बाद से अब तक, किसी भी अमेरिकी सैन्य अड्डे पर फाइटर जेट से हमला नहीं हुआ हैऐसा ईरान युद्ध में कैसे संभव हो गया?

अनकवर्ड के हमारे आज के एपिसोड में हम आपको इन्हीं सवालों के जवाब देने की कोशिश करेंगे.

अमेरिका के बड़े मीडिया हाउस एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट ने पूरे संसार के मिलिट्री एक्सपर्ट्स को चौंका दिया है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे ईरान का एक फाइटर जेट अमेरिका के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर कुवैत के 'कैंप बुहेरिंग' एयरबेस पर कयामत की तरह टूट पड़ा.   

कैंप बुहेरिंग एयरबेस पर सिक्योरिटी टाइट

आपको बता दें, कि 'कैंप बुहेरिंग एयरबेस' मिडिल ईस्ट में सबसे Strategic लोकेशन पर मौजूद है. ऐसे में इसकी सिक्योरिटी के इंतजाम भी तगड़े रहे होंगेइसमें अमेरिका की खतरनाक पैट्रिएट मिसाइल सिस्टम भी शामिल हैंयहां एक मल्टीलेयर एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव थाअब हम आपको बताते हैं कि कैसे ईरान के F-5 जेट ने इस सिस्टम को भेद दिया.

कैसा है अमेरिका का डिफेंस सिस्टम?

दरअसल, अमेरिका का पूरा डिफेंस सिस्टम ऊंचाई से आने वाले हमले को रोकने के लिए बनाया गया थालेकिन ईरान ने इसके ठीक उलट, स्ट्रैटेजी बनाईईरान का फाइटर जेट, इतनी कम ऊंचाई पर उड़ा कि अमेरिकी रडार उसे पकड़ ही नहीं सकेइसने पैट्रिएट मिसाइलों के साथ-साथ, शॉर्ट रेंज मिसाइल्स, एडवांस रडार सिस्टम्स और रीजनल सर्विलेंस नेटवर्क को मात दे दी. ईरान के इस हमले का साइकोलॉजिकल असर ये हुआ.. कि कुवैत की आर्मी ने Confusion में, तीन अमेरिकी जेट्स को मार गिराया.

अमेरिका का हुआ सबसे बड़ा नुकसान

कुवैत पर हमला करने वाले, ईरान के इस जेट का क्या हुआ ये तो पता नहीं चल सका, लेकिन युद्ध के शुरुआती दिनों में हीइस हमले ने डोनाल्ड ट्रंप के दावों की हवा निकाल दी. ट्रंप ने कहा था कि ईरान की एयरफोर्स को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, लेकिन एफ-5 जेट के इस हमले ने एक अलग ही तस्वीर सामने रख दी. इस हमले ने अमेरिका का सबसे बड़ा नुकसान ये किया कि पूरी दुनिया में अमेरिका की साख गिर गई और  ये संदेश गया कि अमेरिका की मॉर्डन और खतरनाक आर्मी कोएक अच्छी रणनीति के साथ, पुराने जहाज से भी चोट पहुंचाई जा सकती है.

13 अमेरिकी सैनिकों को भी मार गिराया

वैसे इस युद्ध में ईरान ने अमेरिकी फौज को इतना नुकसान पहुंचाया है कि ट्रंप इसे लगातार छुपाने की कोशिश में लगे हैं. युद्ध के शुरुआती दिनों में ही ईरान ने अपने ड्रोन्स और मिसाइलों के जरिए अमेरिकी फौजी अड्डों को बहुत डैमेज किया. ईरानी हमलों में मिडिल ईस्ट में मौजूद, अमेरिकी अड्डों पर खड़े दर्जनों एयरक्राफ्ट्स वेयरहाउसेज, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर्स रनवेज, एडवांस रडार सिस्टम्स और सैटेलाइट कम्यूनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर्स को भारी नुकसान पहुंचाया. 

इसके साथ ही अमेरिका के 13 सैनिक भी मार दिए और 400 से ज्यादा को घायल कर दिया. इनमें से 10 परसेंट तो गंभीर रूप से घायल हैं. ये तो वो नुकसान है जो ईरान ने अमेरिका के फौजी अड्डों पर किया है. इसके अलावा उसके एफ-35 जैसे सबसे मॉर्डन जेट को निशाना बनाकर साबित कर दिया कि ईरान का एयरस्पेस अमेरिका के लिए अब भी खतरनाक है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का कब्जा बरकरार

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का कब्जा बरकरार है. हर तरह की धमकियों के बावजूद, ट्रंप इसे अभी तक खुलवा नहीं सके. ईरान के पास उसके ड्रोन्स और मिसाइलों का जखीरा अब भी बरकरार है और इतनी बड़ी संख्या में है कि वो 6 महीने तक युद्ध जारी रख सकता है. दूसरी तरफ अमेरिका की अटैक मिसाइल्स और इंटरसेप्टर  मिसाइल्स का स्टॉक लगभग आधा खत्म हो चुका है. 

इसलिए ईरान से ट्रंप संधि वार्ता के लिए है बेचैन

यही वजह है कि ट्रंप ईरान के साथ संधि वार्ता के लिए इतने ज्यादा बेचैन हैं. उनका Desperation लेवल इतना ज्यादा है कि शनिवार को उनके दो दूतस्टीव विटकॉफ और जार्ड कुश्नर इंतजार करते रहे कि कब पाकिस्तान से फोन आए और वो ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बात करने के लिए इस्लामाबाद जाएं, लेकिन अराघची ने उन्हें Ignore किया और ऐसा एक हफ्ते में दूसरी बार हुआ है. यानी ईरान अब इंटरनेशनल मंच पर ट्रंप को सरेआम बेइज्जत कर रहा है.

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आईडीएफ ने उत्तरी गाजा में 14 किलोमीटर लंबी सुरंगें नष्ट कीं, हथियार और ठिकाने भी मिले

जेरूसलम, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने सोमवार को बताया कि उसने उत्तरी गाजा पट्टी में 14 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंगों को नष्ट कर दिया है।

आईडीएफ ने कहा कि डिवीजन 252 के तहत नॉर्दर्न ब्रिगेड की सेनाएं और यहालाम यूनिट पिछले कुछ महीनों से एक खास अभियान में लगी हुई हैं, जिसका मकसद हमास के भूमिगत ढांचे को खत्म करना है। यह ऑपरेशन खासकर उत्तरी गाजा और येलो लाइन के पूर्व में बेत हनून इलाके में चल रहा है।

आईडीएफ के मुताबिक, इस अभियान के दौरान ब्रिगेड की सेनाओं ने यहालाम यूनिट के साथ मिलकर अब तक करीब 14 किलोमीटर लंबी सुरंगें नष्ट कर दी हैं। इन सुरंगों के अंदर सोने के कमरे और कई हथियार भी मिले हैं। सेना अभी भी इस इलाके को साफ करने के मिशन में लगी हुई है।

आईडीएफ के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में उत्तरी ब्रिगेड की सेनाओं ने करीब 70 लड़ाकों को मार गिराया है, जिन्होंने सीजफायर समझौते का उल्लंघन किया था और जो सैनिकों के लिए तुरंत खतरा बने हुए थे।

इसके साथ ही आईडीएफ ने अपनी डिफेंस पॉलिसी भी अपडेट की है। होम फ्रंट कमांड के हालात के आकलन के बाद यह तय किया गया कि कॉनफ्रंटेशन लाइन वाले इलाकों और मेरोन, बार योखाई, ओर हागानुज और सफसुफा जैसी बस्तियों में एक साथ अधिकतम 1,500 लोगों के इकट्ठा होने की सीमा लागू होगी।

आईडीएफ ने यह भी बताया कि उसने लेबनान में हिजबुल्लाह संगठन के कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया है, जो उसके अनुसार उसके सैनिकों के लिए खतरा थे। इनमें बिंट जबीएल इलाके में स्थित संगठन का मुख्यालय और कुछ अन्य सैन्य इमारतें शामिल हैं। हमलों के बाद वहां सेकेंडरी विस्फोट भी देखे गए, जिससे पता चला कि वहां हथियार मौजूद थे।

इजरायली सेना ने अपने आधिकारिक एक्‍स अकाउंट पर लिखा कि उसने लेबनान के बेका क्षेत्र और दक्षिण लेबनान के कई इलाकों में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमला शुरू कर दिया है।

पिछले हफ्ते इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने आईडीएफ को लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर और तेज हमले करने का आदेश दिया था।

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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