पश्चिम एशिया में तनाव के बीच केंद्र सक्रिय, पीयूष गोयल 27 अप्रैल को निर्यातकों से मिलेंगे
नई दिल्ली, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सोमवार को निर्यात प्रोत्साहन परिषदों और उद्योग निकायों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे, जिसमें घटते निर्यात और भू-राजनीतिक व्यवधानों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच निर्यात को बढ़ावा देने की रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी।
यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है, जब पश्चिम एशिया में तनाव के चलते भारतीय निर्यातकों को अपना सामान निर्यात करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।
इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण मध्यू पूर्व की स्थिति तनाव पूर्ण बनी हुई है और शिपिंग कंपनियां इस क्षेत्र में संचालन को लेकर पीछे हट रही है। यह क्षेत्र भारतीय निर्यातकों के लिए एक प्रमुख गंतव्य स्थान है।
भारत मंडपम में भारत और न्यूजीलैंड के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर होने के तुरंत बाद निर्यातकों के साथ बातचीत होगी।
टॉड मैक्ले एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ पहले से ही भारत में हैं और भारतीय उद्योग जगत के नेताओं से बातचीत कर रहे हैं।
औपचारिक बैठक से पहले, गोयल रविवार को आगरा में भारतीय और न्यूजीलैंड के व्यापारिक नेताओं के साथ चर्चा कर रहे हैं, जो व्यापारिक संबंधों को गहरा करने और नए बाजार अवसरों की खोज करने के प्रयासों का संकेत है।
सोमवार की बैठक में चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, खेल सामग्री और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है।
वैश्विक व्यापार अनिश्चितता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के कारण मार्च में निर्यात 7.44 प्रतिशत गिरकर 38.92 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले पांच महीनों में सबसे बड़ी गिरावट है।
पश्चिम एशिया को निर्यात विशेष रूप से प्रभावित हुआ, जो इस महीने 50 प्रतिशत से अधिक कम हो गया।
कच्चे तेल और सोने की आवक में कमी के कारण आयात भी मार्च में 6.51 प्रतिशत गिरकर 59.59 अरब डॉलर रह गया।
इसके परिणामस्वरूप, व्यापार घाटा घटकर नौ महीनों के निचले स्तर 20.67 अरब डॉलर पर आ गया।
हालांकि, व्यापक रुझान चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि मध्य पूर्व को भारत का निर्यात लगभग 58 प्रतिशत और खाड़ी देशों से आयात 51 प्रतिशत से अधिक गिर गया है।
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए, भारत के माल निर्यात में 0.93 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई और यह 441.78 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।
हालांकि, आयात में 7.45 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 775 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे व्यापार घाटा बढ़कर 333.2 अरब डॉलर हो गया। इसका मुख्य कारण सोने और चांदी के आयात में भारी उछाल था।
कुल मिलाकर, देश के वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में 4.22 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 2025-26 में 860.09 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
--आईएएनएस
एबीएस/
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यूपी को मिलने वाली है एक और एक्सप्रेसवे की सौगात, पीएम मोदी 29 अप्रैल को करेंगे लोकार्पण
UP News: उत्तर प्रदेश में राज्य और केंद्र सरकार एक्सप्रेसवे और सड़कों का जाल फैला रही है. जिससे राज्य के विकास को तेज रफ्तार मिल सके. इसी कड़ी में राज्य में एक और एक्सप्रेसवे वाहनों के फर्राटा भरने को तैयार है. जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार यानी 29 अप्रैल 2026 को करने वाले हैं. जो एशिया का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे होगा. दरअसल, हम बात कर रहे हैं पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाले एक्सप्रेस वे गंगा एक्सप्रेसवे के बारे में. मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अप्रैल को हरदोई जिले के मल्लावां से शुभारंभ करेंगे.
12 जिलों को जोड़ेगा ये एक्सप्रेसवे
बता दें कि ये एक्सप्रेसवे राज्य के 12 जिलो को आपस में जोड़ेगा. जो मेरठ से प्रयागराज तक जाएगा. ये एक्सप्रेसवे रायबरेली जिले में कुल 77.3 किलोमीटर की दूरी तय करता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रायबरेली में बुधवार को इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे. जिसके लिए जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका ने एसपी रवि कुमार, सीडीओ अंजुलता, एडीएम प्रशासन सिद्धार्थ के साथ जगतपुर थाना क्षेत्र के गोकुलपुर रोझईया इंट्री प्वाइंट का निरीक्षण किया. जहां अभी सफाई का काम चल रहा है.
रायबरेली में बनाए गए हैं दो एंट्री और एग्जिट प्वाइंट
मेरठ से प्रयागराज तक जाने वाले इस एक्सप्रेसवे पर गंगा एक्सप्रेस वे अथॉरिटी ने रायबरेली में गंगा एक्सप्रेस वे के लिए दो एंट्री और एग्जिट प्वाइंट बनाए हैं. इनमें एक एंट्री पॉइंट लालगंज तहसील के एहार गांव में बनाया गया है. जबकि दूसरा एंट्री पॉइंट ऊंचाहार तहसील के जगतपुर थाना क्षेत्र के गोकुलपुर रोझईया में बनाया गया है. ये एक्सप्रेसवे रायबरेली के 77 किमी लंबा होगा जहां दो रेस्ट एरिया और दो टोल प्लाजा बनाए गए हैं.
इसके अलावा व्यापारिक गतिविधियों के लिए रायबरेली के ऊंचाहार में 200 एकड़ का इंडस्ट्रियल कॉरिडोर भी बनाया गया है. एक्सप्रेस वे पर होने वाले सड़क हादसों को देखते हुए रोड के दोनों तरफ ढाई मीटर की दूरी पर रंबल स्ट्रिप बनाई गई है. जिससे हादसों को रोका जा सके.
हर किलोमीटर पर लगाए गए हैं सीसीटीवी
रायबरेली में गंगा एक्सप्रेस वे का निर्माण सेम इंडिया ने किया है. सेम इंडिया के प्रशासनिक अधिकारी अनिल पूनिया ने कहा कि एक्सप्रेसवे सुरक्षा की दृष्टि से दूसरे एक्सप्रेसवे से बेहतर है. उन्होंने कहा कि इ, एक्सप्रेसवे पर हर किलोमीटर पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. जबकि हर 10 किलोमीटर पर स्पीडोमीटर लगाए गए हैं. उन्होंने बताया कि सीसीटीवी कैमरा और स्पीडोमीटर की निगरानी के लिए इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम बनाया गया है. ऐसे में अगर कोई हादसा या दुर्घटना होती है तो बहुत जल्द क्रेन आदि की व्यवस्था की जा सकेगी. साथ ही घायलों को भी तुरंत इजाल के लिए अस्पताल भेजा जा सकेगा.
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बदायूं में भी तैयारियां तेज
इसके साथ ही बदायूं में भी इसको ले तैयारियां तेज हैं. जनपद के बिनावर कस्बे के एग्जिट पॉइंट पर बुधवा को एक कार्यक्रम का आयोजन होगा. बदायूं जनपद में गंगा एक्सप्रेस लगभग 92 किलोमीटर लंबा है जोकि इस एक्सप्रेसवे के सबसे बड़े एरिये से गुजर रहा है. इसमें मुख्य रूप से बनकोटा, बिनाबर,और पापड़ के पास 3 इंटरचेंज बनाए गए हैं. बिनाबर और दातागंज के पास 269 एकड़ में औद्योगिक गलियारा विकसित किया जा रहा है. घटपुरी के पास मेन्युफेक्चरिंग कलस्टर बनाया जा रहा है कि जो बरेली-मथुरा NH-21 के साथ कनेक्टिविटी प्रदान करेगा.
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