राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने विश्वास जताया है कि ममता बनर्जी लगातार चौथी बार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनेंगी।
तेजस्वी उत्तर 24 परगना जिले में सत्तारूढ़ दल के रोड शो में शामिल हुए।
यादव शुक्रवार को यहां पहुंचे और जगद्दल, भाटपाड़ा तथा खड़दह विधानसभा क्षेत्रों में रोड शो में शामिल हुए।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘उत्तर 24 परगना जिले के बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र के तहत भाटपाड़ा विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार अमित गुप्ता और जगद्दल से तृणमूल उम्मीदवार सोमनाथ श्याम के समर्थन में उत्साह एवं जोश के साथ रोड शो किया।’’
खड़दह विधानसभा सीट से तृणमूल उम्मीदवार देवदीप पुरोहित के समर्थन में रैली में शामिल होने के बाद राजद नेता ने कहा, ‘‘लोगों का अटूट प्रेम, दृढ़ विश्वास और व्यापक जनसमर्थन स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि पश्चिम बंगाल की जनता ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लगातार चौथी बार प्रचंड बहुमत से आशीर्वाद देने का मन बना लिया है।’’
यादव के कोलकाता पहुंचने के बाद उनसे राघव चड्ढा के आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने को लेकर टिप्पणी के लिए कहा गया जिसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग समझौता कर लेते हैं। वह डर या लालच के कारण भाजपा में शामिल हुए होंगे।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित पीडीएस घोटाला मामले में धन शोधन की जांच के तहत शनिवार को पश्चिम बंगाल में कई स्थानों पर छापेमारी की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि कोलकाता, बर्धमान और हाबरा में निरंजन चंद्र साहा समेत आपूर्तिकर्ताओं और निर्यातकों के लगभग नौ परिसरों पर तलाशी अभियान जारी है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत की जा रही है। केंद्रीय एजेंसी ने इस मामले में पहले भी छापेमारी की थी। राज्य में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान होना है। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को हुआ था।
धन शोधन का यह मामला अक्टूबर 2020 में बसीरहाट पुलिस द्वारा घोजाडांगा स्थित सीमा शुल्क उपायुक्त (भूमि सीमा शुल्क स्टेशन) की शिकायत पर दर्ज की गई प्राथमिकी से जुड़ा है। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि कल्याणकारी योजनाओं के लिए निर्धारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गेहूं की बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है। गेहूं को आपूर्तिकर्ताओं, लाइसेंस प्राप्त वितरकों, डीलर और बिचौलियों की मिलीभगत से अवैध माध्यमों से कम कीमत पर खरीदा गया। ईडी का दावा है कि आपूर्ति श्रृंखला से बड़ी मात्रा में गेहूं को अवैध रूप से निकालकर कई स्थानों पर जमा किया गया था।
अनाज को मूल रूप से कहां से प्राप्त किया गया, इसकी जानकारी छिपाने के लिए आरोपियों ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य सरकार के चिह्नों वाले मूल बोरे हटा दिए या उलट दिए और उन्हें फिर से भर दिया और इस तरह पहचान संबंधी चिह्नों को छिपाकर पीडीएस के गेहूं को खुले बाजार में बेचने या निर्यात करने के लिए वैध भंडार के रूप में पेश किया गया। इस मामले में पश्चिम बंगाल के पूर्व खाद्य मंत्री ज्योति प्रिय मलिक और कुछ अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
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