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2028 तक चांद पर वापसी का लक्ष्य, 'नासा' ने तय किए तीन बड़े मिशन

वाशिंगटन, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) ने आने वाले वर्षों के लिए अपनी नई स्पेस रणनीति के तीन बड़े लक्ष्य तय किए हैं, जिनमें 2028 तक इंसानों को फिर से चंद्रमा पर भेजना, वहां स्थायी बेस बनाना और लो-अर्थ ऑर्बिट में कमर्शियल गतिविधियों का विस्तार करना शामिल हैं।

नासा के प्रशासक जेरेड आइजकमैन ने कहा कि यह रणनीति अमेरिका की राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति के अनुरूप है और तेजी से बदलते वैश्विक प्रतिस्पर्धी माहौल में अमेरिका की लीडरशिप को मजबूत करने के लिए बनाई गई है।

आइजकमैन ने साफ शब्दों में कहा, हमारा लक्ष्य चंद्रमा पर वापसी करना, लॉन्च की संख्या बढ़ाना और 2028 तक अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर उतारना है। उन्होंने बताया कि यह नासा के निकट भविष्य के मिशनों का मुख्य फोकस है।

उन्होंने आगे कहा कि एजेंसी सिर्फ चंद्रमा तक पहुंचने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वहां लंबी अवधि के लिए इंसानी मौजूदगी स्थापित करने की योजना बना रही है। इसके लिए सरकार और निजी कंपनियां मिलकर काम करेंगी। इस योजना में लैंडर, रोवर, पावर सिस्टम और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी जैसी जरूरी चीजें शामिल होंगी, ताकि चंद्रमा पर लगातार ऑपरेशन संभव हो सके।

नासा की रणनीति का तीसरा अहम हिस्सा लो-अर्थ ऑर्बिट में कमर्शियल गतिविधियों को बढ़ाना है। इसके तहत प्राइवेट स्पेस स्टेशन को बढ़ावा दिया जाएगा और उद्योगों के लिए नए अवसर तैयार किए जाएंगे। आइजकमैन ने कहा, हम उद्योग के साथ मिलकर कमर्शियल एस्ट्रोनॉट मिशन और उससे जुड़ी कमाई के अवसरों को बढ़ाना चाहते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि नासा अब अपने संसाधनों के इस्तेमाल के तरीके में बदलाव कर रहा है। एजेंसी बड़े और महंगे प्रोजेक्ट्स से हटकर छोटे, फोकस्ड और परिणाम देने वाले निवेश पर ध्यान दे रही है। उन्होंने माना कि पहले कई मिशनों में लागत बढ़ने और देरी जैसी समस्याएं सामने आई हैं, जिससे सुधार की जरूरत महसूस हुई।

आइजकमैन ने कहा, हम ऐसे प्रोग्राम नहीं बना सकते जो इतने बड़े हों कि फेल न हो सकें, लेकिन इतने महंगे भी हों कि सफल ही न हो पाएं। उन्होंने कहा कि नासा को खर्च के बजाय परिणामों पर ध्यान देना होगा।

उन्होंने लॉन्च की संख्या बढ़ाने का भी जिक्र किया और कहा कि मिशनों के बीच ज्यादा अंतराल प्रगति को धीमा कर देता है। हाल ही में हुए आर्टेमिस II मिशन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब कार्यक्रम सही तरीके से लागू होते हैं, तो बड़े परिणाम सामने आते हैं। इस मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के चारों ओर घुमाकर सुरक्षित वापस लाया गया था।

उन्होंने कहा, हमने दुनिया को फिर से चंद्रमा दिखाया और इंसानियत को पृथ्वी का नया नजरिया दिया।

नई योजना के तहत नासा सैटेलाइट लॉन्च और अर्थ ऑब्जर्वेशन जैसे कामों के लिए निजी कंपनियों पर ज्यादा निर्भर करेगा, जबकि खुद डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन और न्यूक्लियर प्रोपल्शन जैसे जटिल मिशनों पर ध्यान केंद्रित करेगा।

हालांकि, इस रणनीति पर सांसदों ने कुछ चिंताएं भी जताई हैं। सुनवाई के दौरान बताया गया कि प्रस्तावित बजट में पिछले साल की तुलना में करीब 23 प्रतिशत की कटौती की गई है, जिससे इन लक्ष्यों को हासिल करना मुश्किल हो सकता है।

स्पेस कमेटी के चेयरमैन ब्रायन बैबिन ने चेतावनी दी कि कम फंडिंग से अमेरिका की स्पेस प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है, खासकर ऐसे समय में जब चीन तेजी से अपने चंद्र मिशनों को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा, नासा को कम फंड देना समझदारी नहीं है।

वहीं, रैंकिंग मेंबर जो लोफग्रेन ने कहा कि इस योजना से विज्ञान और तकनीक के कई अहम प्रोग्राम प्रभावित हो सकते हैं, खासकर वे क्षेत्र जो मानव अंतरिक्ष मिशनों से जुड़े नहीं हैं।

अन्य लॉमेकर्स ने वर्कफोर्स, अर्थ साइंस मिशन और एरोनॉटिक्स रिसर्च पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सवाल उठाए, साथ ही निजी कंपनियों पर बढ़ती निर्भरता को लेकर चिंता जताई।

इस पर आइजकमैन ने जवाब दिया कि नासा हमेशा कानून के अनुसार काम करेगा और संसाधनों के इस्तेमाल में पारदर्शिता रखेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि कम संसाधनों में भी बेहतर नतीजे हासिल किए जा सकते हैं, बशर्ते बेकार खर्च को खत्म कर मुख्य लक्ष्यों पर फोकस किया जाए।

1958 में स्थापित नासा लंबे समय से अंतरिक्ष खोज में दुनिया का नेतृत्व करता रहा है, चाहे वह अपोलो कार्यक्रम के तहत चंद्रमा पर लैंडिंग हो या इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का निर्माण। हाल के वर्षों में, खासकर चीन के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण, चंद्रमा मिशनों और पृथ्वी से बाहर मानव मौजूदगी पर फिर से जोर बढ़ा है।

इसी दिशा में आर्टेमिस कार्यक्रम एक अहम पहल है, जिसका उद्देश्य 1972 के बाद पहली बार इंसानों को चंद्रमा पर वापस भेजना है।

--आईएएनएस

वीकेयू/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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'मेरा पति लाइन पर तो आया', शिल्पा शेट्टी ने राज कुंद्रा को लेकर कही ये बात, हसबैंड ने किया खुलासा

Shilpa Shetty on Raj Kundra: बॉलीवुड के जाने माने कपल राज कुंद्रा (Raj Kundra) और शिल्पा शेट्टी (Shilpa Shetty) अक्सर किसी न किसी वजह से सुर्खियों में बने रहते हैं. जी हां, ये कपल कभी अपनी पर्सनल लाइफ तो कभी प्रोफेशनल लाइफ को लेकर चर्चा में आ ही जाता है. ऐसे में अब एक बार फिर शिल्पा और राज सोशल मीडिया पर चर्चाओं में आ गए हैं. इस बार वजह उनकी पर्सनल लाइफ और आध्यात्मिकता (spirituality) से जुड़ी दिलचस्प बातचीत है, जिसमें राज कुंद्रा ने अपने जीवन के एक अहम बदलाव के बारे में खुलकर बात की. तो चलिए आपको बताते हैं उन्होंने क्या कुछ कहा? 

सफेद पगड़ी में नजर आए राज कुंद्रा

हाल ही में एक बातचीत के दौरान राज कुंद्रा सफेद पगड़ी में नजर आए, जिससे उनके सिख धर्म के प्रति झुकाव की चर्चा तेज हो गई. जब उनसे पूछा गया कि उनके इस आध्यात्मिक बदलाव पर शिल्पा शेट्टी का क्या रिएक्शन था, तो उन्होंने बेहद हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब दिया. राज ने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब वो “बॉर्डरलाइन एथिस्ट” यानी लगभग नास्तिक थे और भगवान में विश्वास नहीं करते थे. उनका मानना था कि जीवन केवल कर्म के आधार पर चलता है और इसमें किसी ईश्वर की भूमिका नहीं है.

'मेरा पति लाइन पर तो आया'

लेकिन समय के साथ उनके विचारों में बदलाव आया. सिख धर्म से जुड़ने के बाद उन्हें एक अलग तरह का अपनापन और गहरा कनेक्शन महसूस हुआ. उन्होंने कहा कि इस बदलाव से शिल्पा शेट्टी को खुशी हुई. मजाकिया अंदाज में उन्होंने बताया कि शिल्पा का रिएक्शन कुछ ऐसा था- “चलो, मेरा पति लाइन पर तो आया.” इस बात से ये साफ झलकता है कि शिल्पा उनके इस आध्यात्मिक सफर को सकारात्मक नजरिए से देखती हैं.

शिल्पा शेट्टी के धार्मिक विश्वासों की तारीफ

राज कुंद्रा ने आगे शिल्पा शेट्टी के धार्मिक विश्वासों की भी तारीफ की. उन्होंने कहा कि शिल्पा हर तरह के धार्मिक रिवाजों को पूरी श्रद्धा से निभाती हैं और भगवान में गहरा विश्वास रखती हैं. वहीं, राज खुद भी हिंदू परंपराओं का सम्मान करते हैं, लेकिन सिख धर्म में उन्हें जो आत्मिक शांति और जुड़ाव मिला, वही उन्हें इस राह पर लेकर आया.

मां विंध्यवासिनी मंदिर के दर्शन

आपको बता दें कि शिल्पा शेट्टी ने हाल ही में मां विंध्यवासिनी मंदिर के दर्शन किए थे. इस दौरान मंदिर परिसर में लोगों की खूब भीड़ देखने को मिली थी. हर कोई उनकी एक झलक पाने के लिए उत्साहित नजर आया. शिल्पा शेट्टी ने मंदिर पहुंचकर पूरे विधि-विधान के साथ मां विंध्यवासिनी के दर्शन किए. उन्होंने मां के चरणों में माथा टेका और अपने परिवार के साथ-साथ देश की खुशहाली की प्रार्थना की.इस दौरान मंदिर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. 

दोनों की लव स्टोरी

वहीं अगर दोनों की लव स्टोरी की बात करें, तो ये भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. साल 2007 में उनकी पहली मुलाकात हुई थी, जो धीरे-धीरे दोस्ती और फिर प्यार में बदल गई. करीब दो साल तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद इस कपल ने 22 नवंबर 2009 को शादी कर ली. उस समय उनकी शादी काफी चर्चा में रही थी और आज भी दोनों की जोड़ी बॉलीवुड की चर्चित जोड़ियों में गिनी जाती है.

वहीं, शिल्पा शेट्टी अपने फिटनेस रूटीन और योगा के लिए भी जानी जाती हैं. एक्ट्रेस सोशल मीडिया पर अक्सर अपने वर्कआउट और हेल्दी लाइफस्टाइल से जुड़े पोस्ट शेयर करती रहती हैं, जिससे उनके फैंस काफी प्रेरित होते हैं.

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