Responsive Scrollable Menu

Russia ने बेचा 22000 किलोग्राम का बंपर सोना, क्या करेगा भारत

दुनिया की सबसे बड़ी जियोपॉलिटिकल टेंशन रूस, यूक्रेन वॉर अब अपने पांचवें साल में पहुंचने वाली है और इसका असर सिर्फ युद्ध भूमि तक सीमित नहीं है। इसका असर सीधा अब रूस की अर्थव्यवस्था और खासकर उसके खजाने पर साफ दिखने लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सेंट्रल बैंक ऑफ रशिया ने साल 2026 की शुरुआत में अब तक करीब 22,000 किलोग्राम यानी कि 21.8 टन सोना बाजार में बेच दिया है। इसकी कीमत करीब ₹33,440 करोड़ बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है आखिर पुतिन को इतना बड़ा कदम क्यों उठाना पड़ा? बता दें रूस का बजट घाटा मार्च 2026 तक 61.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। इसका मतलब है कि सरकार जितना कमा रही है उससे कहीं ज्यादा खर्च कर रही है और खर्चा कहां हो रहा है? सबसे बड़ा हिस्सा जा रहा है युद्ध पर हथियार पर। सैनिक, लॉजिस्टिक और टेक्नोलॉजी पर। युद्ध जितना लंबा खिसता जा रहा है उतना ही महंगा होता जा रहा है। इसके अलावा पश्चिम देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने रूस की अर्थव्यवस्था को झटका दिया है। हालांकि भारत ने उसे संभालने की कोशिश की है। इंटरनेशनल ट्रेड सीमित हो गया है। विदेशी निवेश कम हो गया है और रूसी करेंसी रूबल पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे में सरकार के पास दो ही बड़े रास्ते बचते हैं। या तो कर्ज ले या फिर अपने रिजर्व का इस्तेमाल करें और रूस ने चुना है दूसरा रास्ता सोना बेचना। अब किटको की रिपोर्ट के अनुसार 1 अप्रैल 2026 तक रूस का कुल गोल्ड रिजर्व घटकर 2304.76 टन रह गया है। सिर्फ मार्च महीने में ही इसमें 6.22 टन की गिरावट आई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि रूस दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड होल्डर्स में से एक रहा है।

इसे भी पढ़ें: Tehran की सड़कों पर Iran ने कराई अपनी खतरनाक मिसाइलों की परेड, खाड़ी देश सहमे, अमेरिका को आया पसीना!

लेकिन धीरे-धीरे यह रिजर्व कम हो रहा है जो कि बड़ा संकेत है कि आर्थिक दबाव बढ़ रहा है रूस पर। अब सवाल है कि क्या यह रूस के लिए खतरे की घंटी है? सीधा जवाब है हां, लेकिन पूरी कहानी इससे थोड़ी ज्यादा जटिल है। सोना किसी भी देश के लिए इमरजेंसी फंड जैसा होता है। जब स्थिति खराब होती है तो देश इसे बेचकर कैश फ्लो बढ़ाते हैं। लेकिन लगातार सोना बेचना इस बात का संकेत भी देता है कि नकदी की समस्या गंभीर होती जा रही है। अगर यही ट्रेंड रहता है तो भविष्य में रूस के पास आर्थिक संकट से निपटने के लिए कम विकल्प बचेंगे। लेकिन आम लोग क्यों खरीद रहे हैं सोना? यह जान लीजिए। यही कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है कि जहां एक तरफ सरकार सोना बेच रही है, वहीं दूसरी तरफ रूस के आम नागरिक इसे खरीदने के लिए टूट पड़े हैं। मॉस्को एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 में गोल्ड ट्रेंडिंग में 350% का उछाल आया है। 

इसे भी पढ़ें: F-22 से खतरनाक रूस का SU-57 M1, खरीदेगा भारत?

क्योंकि जब देश की करेंसी कमजोर होती है तो लोग अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए सोना खरीदते हैं। रूबल की वैल्यू गिर रही है इसलिए लोग कैश की बजाय गोल्ड में निवेश कर रहे हैं। युद्ध और अनिश्चितता के समय में सोना हमेशा सेफ हेवन माना जाता है। यानी सरकार बेच रही है मजबूरी में और जनता खरीद रही है डर के कारण। अब भारत के लिए इसका क्या मतलब है? देखिए भारत के लिए इसका बहुत बड़ा मतलब है? देखिए इसको हम कई पॉइंट्स में बताएंगे। पहला गोल्ड प्राइस पर असर। भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड उपभोक्ताओं में से एक है। अगर रूस जैसे बड़े देश मार्केट में सोना बेचते हैं तो ग्लोबल सप्लाई बढ़ती है जिससे कीमतों पर दबाव आ सकता है। दूसरी तरफ अगर दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है तो गोल्ड की डिमांड बढ़ती है जो कीमतों को ऊपर ले जाती है। यानी भारत में सोने की कीमतें आने वाले समय में वलाटाइल रह सकती हैं। इसके अलावा रुपया और ट्रेड देखिए रूस और भारत के बीच ट्रेड में पिछले कुछ सालों में तेजी आई है। खासकर तेल और डिफेंस सेक्टर में अगर रूस की अर्थव्यवस्था कमजोर होती है तो इसका असर भारत रूस व्यापार पर पड़ सकता है। साथ ही रुपए रूबल ट्रेंडिंग मैकेनिज्म पर भी दबाव आ सकता है। इसके अलावा ऊर्जा कीमतों की बात करें तो रूस अमेरिका के सबसे बड़े तेल और गैस सप्लायर्स में से एक है। अगर उसकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती है तो वह ज्यादा रेवेन्यू के लिए ऊर्जा निर्यात बढ़ा सकता है या कीमतों में बदलाव कर सकता है। यानी इसका सीधा असर भारत के पेट्रोल डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि भारत हमेशा एक बैलेंसिंग एक्ट करता आया है। 

Continue reading on the app

NATO को सजा, यूरोप को तोड़ देंगे ट्रंप? अमेरिका का प्लान लीक

अमेरिका ईरान से जंग में है और अब अमेरिका से जुड़ी जो जानकारी सामने आ रही है वह आपको हैरान कर देगी क्योंकि ईरान के खिलाफ तो अमेरिका जो कारवाई कर रहा है वो कर ही रहा है। इसके अतिरिक्त जो ईरान के साथ करेगा वो तो करेगा ही लेकिन अब वो अपने निशाने पर किसी और को नहीं बल्कि नाटो देशों को लेने की तैयारी कर रहा है।  दरअसल अमेरिका और स्पेन का टकराव जगजाहिर हो चुका है। स्पेन ने अपने एयर स्पेस का इस्तेमाल नहीं होने दिया। स्पेन ने अपने लड़ाकू बेसिस का इस्तेमाल नहीं होने दिया। कहा कि हमारी धरती से कोई हमला नहीं होगा। हम युद्ध के खिलाफ हैं। अमेरिका चिढ़ गया। इसके बाद अब नाटो की गर्दन अमेरिका जो है वो पकड़ रहा है। एक अमेरिकी अधिकारी ने रटर्स को बताया कि पेंटागन के एक आंतरिक ईमेल में उन विकल्पों की रूप रेखा दी गई है जिसके तहत संयुक्त राज्य अमेरिका उन नाटो सहयोगियों को दंडित कर सकता है जिनके बारे में उनका मानना है कि उन्होंने ईरान के साथ युद्ध में अमेरिकी अभियानों का समर्थन करने में विफल रहे हैं। जिसमें स्पेन को गठबंधन से निलंबित करना, फॉकलैंड द्वीप समूह पर ब्रिटेन के दावे पर अमेरिकी स्थिति की समीक्षा करना शामिल है। नाम ना छापने की शर्त पर ईमेल का जानकारी देने वाले अधिकारी ने बताया कि नीतिगत विकल्पों का विस्तृत विवरण एक नोट में दिया गया है। जिसमें ईरान युद्ध के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका को पहुंच सैन्य अड्डे, हवाई उड़ान के अधिकार जो है वो देने के लिए कुछ सहयोगियों की कथित इच्छा और इनकार पर निराशा व्यक्त की गई है। 

इसे भी पढ़ें: ईरान-अमेरिका के बीच टूटा सीजफायर, होर्मुज को लेकर कुछ बड़ा हो सकता है?

अधिकारी कहते हैं कि ईमेल में कहा गया है कि एबीओ नाटो के लिए बिल्कुल बुनियादी मानक है और यह भी कहा गया है कि पेंटागन में उच्च स्तर पर इन विकल्पों पर बात हो रहा है। अधिकारी ने बताया कि ईमेल में एक विकल्प यह है कि मुश्किल देशों को नाटो में महत्वपूर्ण या प्रतिष्ठित पदों से निलंबित कर दिया जाए। इसके अलावा अधिकारी ने बताया कि ईमेल में एक विकल्प यह भी है कि मुश्किल देशों को जो कारवाई है उनके खिलाफ सख्त होनी चाहिए ताकि दूसरे देश भी यह बात समझ पाए कि भैया ऐसे तो काम नहीं चल सकता। ऐसे सहयोग नहीं होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो सहयोगियों की इस बात के लिए भी एक कड़ी आलोचना पहले भी की है कि उन्होंने हारमूद जलडमरू मध्य को खोलने में मदद करने में अपनी नौसेनाएं नहीं भेजी। 28 फरवरी को हवाई युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक जहाज रानी के लिए बंद कर दिया गया था वो। उन्होंने यह भी घोषणा की है कि वह गठबंधन से हटने पर विचार कर सकते हैं जो कि एक जाहिर बयान है। उन्होंने ट्रंप ने जो है 1 अप्रैल को एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर आप मेरी जगह होते तो क्या करते? यानी कि आप नाटो को छोड़ते नहीं अगर नाटो इस तरह का व्यवहार कर रहा होता तो। इसी को लेकर माना यह जा रहा है कि अमेरिका उस विकल्प पर विचार कर रहा है। हालांकि बार-बार बात स्पेन की आ रही है।  

इसे भी पढ़ें: America में H-1B वीज़ा का बड़ा 'Ghost Jobs' स्कैम, तेलुगू जोड़ी को होगी 5 साल की जेल

ऐसे में स्पेन की तरफ से भी जवाब आया है। स्पेन का कहना है कि नाटो से हमें निकाल देना कोई मजाक बात नहीं है। इतना आसान नहीं है। क्या कहा गया है स्पेन की तरफ से? आपको पहले सुनवाते हैं। को तो एक तरफ अमेरिका की तैयारी है। दूसरी तरफ स्पेन का पलटवार है और भी बताएंगे कि कैसे नाटो दूसरे देश भी जो है अमेरिका की तरफ शक की सुई घुमा रहे हैं। लेकिन यह जो पेंटागन का मेल था एक जो हाई प्रोफाइल मेल था उसमें जो है बताया जा रहा है जो अधिकारी सूत्रों के हवाले से कह रहे हैं कि किस तरह का एक्शन हो यह कोई सुझाव नहीं दिया गया है और साथ ही यूरोप में सैन्य अड्डे क्या बंद कर देने चाहिए अमेरिका को इसका भी कोई प्रस्ताव नहीं है। अधिकारी ने हालांकि यह बताने से इंकार कर दिया कि विकल्पों में यूरोप से कुछ अमेरिकी सैनिक सेनाओं की व्यापक रूप से अपेक्षित वापसी शामिल है या नहीं। यानी कि अमेरिकी सेना जो यूरोप में मौजूद है वह वापस आ सकती है क्या? तो ऐसे में भी बड़ा मुश्किल स्थिति हो सकता है। ऐसे में ईमेल पर जो कई लोग हैं जिन्होंने पेंटागन को लेकर एक सवाल पूछा पेंटागन से तो उसके जवाब में पेंटागन ने कहा है कि जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ने हमारे नाटो सहयोगियों के लिए जो कुछ भी किया है उसके बावजूद वह हमारे लिए मौजूद नहीं थे। यह भी कहा गया है पेंटागन की तरफ से कि युद्ध विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि राष्ट्रपति के पास ऐसे विश्वसनीय विकल्प हो जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि हमारे सहयोगी अब केवल कागजी शेर बनकर ना रह जाए बल्कि अपनी भूमिका निभाएं। इस संबंध में चल रही किसी भी आंतरिक चर्चा पर हमारी कोई टिप्पणी नहीं है। 

इसे भी पढ़ें: जर्मनी ने भारत को दिया बाहुबली..मोदी-राजनाथ का तगड़ा खेल, चीन-अमेरिका हैरान

ट्रंप प्रशासन को यूरोपीय लोगों में अधिकार की भावना जो है वो कहा जा रहा है कि दिखाई दे रहा है। विश्लेषकों और राजनीयिकों का कहना है कि ईरान के साथ अमेरिका इजराइली युद्ध ने 76 साल पुराने गुट के भविष्य के बारे में गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस बात को लेकर अभूतपूर्व चिंता पैदा हो रही है कि अगर यूरोपीय सहयोगियों पर हमला होता है तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे नहीं आएगा। ब्रिटेन, फ्रांस और अन्य देशों का कहना है कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी में शामिल होना युद्ध में प्रवेश करने के बराबर होगा। लेकिन एक स्थाई युद्ध विराम होने या संघर्ष समाप्त होने तक वो जलडमरू मध्य को खुला रखने में मदद करने के लिए तैयार होंगे। लेकिन कुल मिलाकर अमेरिका की तरफ से जो है साफ तौर पर कहा गया कि ये लोग साथ नहीं दे रहे हैं। इधर-उधर की बात कर रहे हैं और यही वजह है कि ये नाराजगी है। वहीं स्पेन कह रहा है कि बॉस हम पे खीज निकालने का कोई मतलब नहीं क्योंकि हमको तो तुम नाइट्रो से निकाल नहीं सकते हो क्योंकि ऐसा कोई प्रावधान भी नहीं है कि हमको तुम निकाल पाओ और स्पेन के प्रति जो निराशा व्यक्त की गई थी उसके बाद से ही ये कयास लगने लगे थे कि कुछ ना कुछ तो टकराव जो है वो होगा और सबसे बड़ी बात यह है कि स्पेन की जमीन पर दो बहुत अहम सैन्य अड्डे हैं अमेरिका के जो जिसमें से एक रोटा नौसेना स्टेशन है और दूसरा मोरोन हवाई अड्डा है।

Continue reading on the app

  Sports

VIDEO: वृंदावन में दर्शन करने पहुंचे अभिषेक शर्मा की चप्पल चोरी, गुस्से से हुए लाल, नंगे पैर भागते आए नजर

भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज और सनराइजर्स हैदराबाद के विस्फोटक ओपनर अभिषेक शर्मा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. जानकारी के मुताबिक अपनी मां के साथ अभिषेक वृंदावन में बांके बिहारी जी के दर्शन करने गए थे. इस दौरान उनका चप्पल चोरी हो गया. Sat, 25 Apr 2026 11:06:46 +0530

  Videos
See all

Tamil Nadu Election Robot Welcome: कोयंबटूर में रोबोट ने पारंपरिक अंदाज में किया स्वागत | #viral #tmktech #vivo #v29pro
2026-04-25T07:11:19+00:00

Gaziabad के एक घर में चोरी करने पहुंचा था, लेकिन लोहे की ग्रिल में फंस गया | #thieft #gaziabad #news #tmktech #vivo #v29pro
2026-04-25T07:08:28+00:00

एस्केलेटर पर चढ़ रही थी, बैलेंसे बिगड़ गया और गिरने लगी महिला तो पुलिसकर्मी ने बचाया | #jaipurmetro #tmktech #vivo #v29pro
2026-04-25T07:11:01+00:00

News Ki Pathshala | Sushant Sinha: टूटेगी AAP या Punjab में सरकार पर बड़ा संकट ? BJP | Raghav Chadha #tmktech #vivo #v29pro
2026-04-25T07:12:54+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers