वैश्विक ऊर्जा बाजार में मचे हड़कंप के बीच अमेरिका ने एक बार फिर अपने सख्त इरादे साफ कर दिए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को स्पष्ट किया कि अमेरिका अब ईरानी और रूसी तेल की खरीद पर दी गई किसी भी तरह की छूट (Waivers) को दोबारा लागू नहीं करेगा। यह फैसला वॉशिंगटन की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह प्रतिबंधों के जरिए दुश्मन देशों की आर्थिक कमर तोड़ना चाहता है।
व्हाइट हाउस में हुई एक ब्रीफिंग के दौरान बोलते हुए, बेसेंट ने इस बात की पुष्टि की कि प्रशासन इन दोनों ही तरह की छूट को खत्म कर देगा। उन्होंने कहा, "हम रूसी तेल के लिए जारी सामान्य लाइसेंस को दोबारा लागू नहीं करेंगे, और न ही हम ईरानी तेल के लिए जारी सामान्य लाइसेंस को दोबारा लागू करेंगे। यह वह तेल था जो 11 मार्च से पहले ही समुद्र में (जहाजों में) आ चुका था। इसलिए, उस सारे तेल का इस्तेमाल अब तक हो चुका है।"
यह फैसला उन पहले मिले संकेतों के बाद आया है, जिनके अनुसार अमेरिका इस सप्ताह ईरानी तेल की खेप पर दी गई 30-दिन की छूट को खत्म होने देगा, और उसने पिछले सप्ताहांत ही रूसी तेल पर दी गई इसी तरह की छूट को भी खत्म होने दिया था। इन छूटों के तहत, समुद्र में पहले से मौजूद तेल की खेपों से जुड़े सीमित लेन-देन करने की अनुमति दी गई थी, जिससे वैश्विक बाजारों को कुछ समय के लिए राहत मिली थी।
इस कदम के साथ ही, ट्रंप प्रशासन द्वारा वैश्विक आपूर्ति में आ रही बाधाओं को दूर करने और ऊर्जा की आसमान छूती कीमतों को कम करने के लिए इस तरह की छूट का इस्तेमाल करने के प्रयासों का भी अंत हो गया है। 20 मार्च को जारी की गई ईरानी तेल पर छूट के कारण, लगभग 140 मिलियन बैरल तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंच पाया था, जिससे मौजूदा संघर्ष के दौरान आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद मिली थी। यह छूट 19 अप्रैल को खत्म होने वाली है।
बेसेंट ने इस बात को फिर से दोहराया कि अब आगे किसी भी तरह की राहत देने पर विचार नहीं किया जा रहा है। उन्होंने 'द एसोसिएटेड प्रेस' से बात करते हुए कहा, "ईरानियों के लिए तो बिल्कुल भी नहीं।" उन्होंने कहा, "हमने नाकाबंदी कर रखी है, और अब वहां से किसी भी तरह का तेल बाहर नहीं आ रहा है।" उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान को जल्द ही तेल उत्पादन बंद करने की नौबत का सामना करना पड़ सकता है, "अगले दो-तीन दिनों के भीतर, उन्हें अपना उत्पादन बंद करना शुरू करना पड़ेगा, जो उनके तेल के कुओं के लिए बहुत ही नुकसानदायक साबित होगा।"
यह घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब ईरान में US-इजरायल युद्ध के कारण वैश्विक तनाव अपने चरम पर है, और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने के कारण ऊर्जा बाजारों में भारी उथल-पुथल मची हुई है। इससे पहले, तेल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के भी पार चली गई थीं, जिसके चलते बाजारों को स्थिर करने के उद्देश्य से मार्च महीने में पहली बार इन छूटों को जारी किया गया था।
हालांकि, ट्रेजरी विभाग ने इससे पहले कुछ समय के लिए रूसी तेल पर दी गई छूट को दोबारा लागू किया था, लेकिन बेसेंट ने स्पष्ट किया कि वह फैसला, आर्थिक रूप से कमजोर देशों द्वारा की गई अपीलों से प्रभावित होकर लिया गया था। वर्ल्ड बैंक और इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड में हुई मीटिंग्स के दौरान उन्होंने कहा, "10 से ज़्यादा सबसे कमज़ोर और सबसे गरीब देश मेरे पास आए और बोले, 'क्या आप हमारी मदद कर सकते हैं?'"
उन्होंने साफ़ किया कि यह छूट सिर्फ़ एक बार के लिए थी। बेसेंट ने कहा "यह उन कमज़ोर और गरीब देशों के लिए थी। लेकिन मुझे नहीं लगता कि हमें दोबारा ऐसी कोई छूट मिलेगी। मुझे लगता है कि समुद्र में मौजूद ज़्यादातर रूसी तेल अब तक बिक चुका है। अब जब ये दोनों छूट खत्म हो रही हैं, तो अमेरिका ईरानी और रूसी तेल पर अपने प्रतिबंधों को और कड़ा कर रहा है, जबकि ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर अभी भी दबाव बना हुआ है।
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जापान ने सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद से चली आ रही अपनी शांतिवादी नीति में ऐतिहासिक बदलाव कर डाला। उसने घातक हथियारों के निर्यात पर लगा बैन पूरी तरह से हटा दिया। प्रधानमंत्री सानेका ईची की कैबिनेट ने यह फैसला लिया कि अब जापान युद्धपोत, लड़ाकू ड्रोन, मिसाइलें, फाइटर जेट्स, हेलीकॉप्टर जो कुछ भी बनाएगा दुनिया को बेच सकेगा। यह बदलाव चीन और उत्तर कोरिया की बढ़ती आक्रमकता के कारण हुआ है। जैसा कि वहां बताया जा रहा है। जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने कहा है कि तेजी से बदलते सुरक्षा परिदृश्य में यह नई नीति जापान की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी और क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय शांति में अहम योगदान देगी। चीन चीख रहा है लेकिन ऑस्ट्रेलिया, भारत, दक्षिण पूर्व एशिया और यूरोप जैसे देशों ने इसका स्वागत किया है। इतना ही नहीं इस बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। 22 से 24 अप्रैल 2026 को टोक्यो में आठवीं आर्मी टू आर्मी स्टाफ टॉक्स हुई।
भारतीय सेना और जापान ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स के बीच गहरी चर्चा हुई। फोकस था रक्षा सहयोग को और मजबूत करना। इंटर ऑपरेटिबल बढ़ाना, द्विपक्षीय अभ्यास बढ़ाना और एसएमई एक्सचेंज। भारतीय दूतावास जापान ने एक्स पर लिखा कि भारतीय सेना और जापान ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स के बीच आठवीं आर्मी टू आर्मी स्टाफ टॉक्स यानी एएसटी 22 से 24 अप्रैल 2026 को टोक्यो में आयोजित की गई। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय अभ्यासों और एसएमई आदान-प्रदान को बढ़ाकर रक्षा सहयोग और इंटर ऑपरेटिबिलिटी को और मजबूत बनाना है। डेलीगेशन ने जापान में भारत की राजदूत नगमा एम मलिक और जापान ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स के चीफ आर्म स्टाफ जनरल आरआई से भेंट की। तो वहीं भारतीय सेना ने भी अपना बयान जारी किया और कहा कि दोनों पक्ष प्री ओपन और इंक्लूसिव इंडोपेसिफिक के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं। इतना ही नहीं एमए के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल का बड़ा बयान सामने आया। उन्होंने कहा कि भारत जापान के तीन सिद्धांतों की समीक्षा का स्वागत करता है। रक्षा और सुरक्षा सहयोग हमारी विशेष रणनीति और वैश्विक साझेदारी का बहुत मजबूत स्तंभ है।
जापान हमारा सच्चा मित्र देश है। वर्ल्ड वॉर टू में उसकी नौसेना दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेना थी। अमेरिका ने उसके कई एयरक्राफ्ट कैरियर तबाह कर दिए। लेकिन आज जापान फिर से आधुनिक और हाईटेक सैन्य ताकत बनकर उभरा और सबसे खास बात यह है कि वह भारत का भरोसेमंद दोस्त है। दोस्तों अब असली धमाका शुरू होता है। जापान ने हथियार निर्यात पर बैन हटा दिया। दोस्तों जापान ने हथियार निर्यात पर से बैन हटा दिया है। यह सच्चाई है। अगर भारत ने अब खरीदे जापान के ये टॉप पांच वेपंस तो और चीन पर हमला हुआ तो भारी तबाही होगी। पहला है ईजुमो क्लास हेलीकॉप्टर कैरियर। ये लगभग 248 मीटर लंबा विशाल युद्धपोथ है। इसका डिज़ाइन काफी हद तक अमेरिकी कैरियर्स जैसा दिखता है। ये एक साथ कई हेलीकॉप्टर ऑपरेट कर सकता है और अब इसे F35B फाइटर जेट्स के लिए भी मॉडिफाई किया जा रहा है।
दूसरे नंबर पर सोरियो क्लास पडुब्बी। दुनिया की सबसे उन्नत स्टील डीजल इलेक्ट्रिक सबमरीन लगभग शून्य आवाज लंबे समय तक पानी के अंदर रहने की क्षमता और दोनों अगर सौर क्लास की टेक्नोलॉजी भारत को मिल गई तो हमारी पनडुबिया दुश्मन के लिए अज्ञात मौत बन जाएंगी। मलक्का स्टेट में छिपकर बैठ जाए तो चीन की पूरी सप्लाई लाइन कट जाएगी। तीसरे नंबर पर आता है कांगो क्लास मिसाइल डिस्ट्रॉयर। यह एगस कॉम्बैट सिस्टम से लैस है। वर्टिकल लॉन सिस्टम है। हवा, समुद्र और मिसाइल हमलों से बचाव में माहिर है। चौथे नंबर पर अगर हथियार की बात करें तो चौथे नंबर पर आया एडवांस हेलीकॉप्टर और एिएशन सिस्टम। दरअसल ये नाइट विज़न बुलेट प्रूफ कॉकपिट हर मौसम में ऑपरेशन में सक्षम है। लद्दाख की बर्फीली चोटियों पर यह हेलीकॉप्टर हमारे जवानों को सुपर पावर बना देगी। रात के अंधेरे में भी दुश्मन पर हमला हो सकेगा और पीएलए के लिए यह नाइट मेयर है। पांचवें नंबर पर है F35 स्टिल फाइटर जेट। बता दें यह फिफ्थ जनरेशन का सबसे एडवांस वर्जन है। F35 भी शॉर्ट टेक ऑफ और वर्टिकल लैंडिंग कर सकता है। दोस्तों राफेल और तेजस के साथ F35 आ गया तो भारतीय वायुसेना आसमान की बादशाहत करेगी। स्टिल अटैक दुश्मन को कुछ पता भी नहीं चलेगा और हमारे वायुवीर दुश्मन पर भारी पड़ते दिखाई देंगे। यह हथियार जो मैंने आपको बताया यह सिर्फ मशीन नहीं भारत जापान दोषी का प्रतीक बनेंगे।
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