2026 'समुद्री साझा भविष्य वाला समुदाय' शांगहाई मंच का आयोजन
बीजिंग, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। संयुक्त रूप से समुद्री सुरक्षा की रक्षा करें और नीले विकास को बढ़ावा दें विषय पर दूसरा समुद्री साझा भविष्य वाला समुदाय शांगहाई मंच 23 अप्रैल को शांगहाई मैरीटाइम यूनिवर्सिटी के लिनकांग कैंपस में आयोजित किया गया।
साझा भविष्य वाले समुद्री समुदाय का निर्माण समुद्री क्षेत्र में मानव जाति के लिए साझा भविष्य वाले समुदाय की अवधारणा का एक जीवंत उदाहरण है और साथ ही वैश्विक महासागर शासन में सुधार के लिए चीन द्वारा प्रदान किया गया एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक उत्पाद भी है। इस मंच का उद्देश्य चीन और अन्य देशों के बीच समुद्री क्षेत्र में आदान-प्रदान और सहयोग के लिए एक सेतु का निर्माण करना, समुद्री सुरक्षा की संयुक्त रूप से रक्षा करने और नीली समृद्धि को साझा करने के प्रयासों को एकजुट करना तथा साझा भविष्य वाले समुद्री समुदाय की अवधारणा को बढ़ावा देने में गति प्रदान करना है।
इस आयोजन में एक मुख्य मंच और चार समानांतर उप-मंच शामिल थे। विशेषज्ञों और विद्वानों ने एशिया-प्रशांत समुद्री सहयोगात्मक विकास, समुद्री सुरक्षा और कानूनी सिद्धांत, नीली अर्थव्यवस्था की कार्यप्रणाली और राष्ट्रीय सुरक्षा स्थिति जैसे विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
संयुक्त राष्ट्र एशिया-प्रशांत आर्थिक और सामाजिक आयोग के एक अधिकारी ने अपने वीडियो संबोधन में अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग में चीन द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका की प्रशंसा की और सभी पक्षों से सहयोग को मजबूत करने, आम सहमति बनाने, संयुक्त रूप से जहाजरानी के हरित, डिजिटल और लचीले विकास को बढ़ावा देने, हाथ मिलाकर साझा भविष्य वाले समुद्री समुदाय का निर्माण करने तथा संयुक्त रूप से स्थायी और समृद्ध भविष्य बनाने का आह्वान किया।
इस आयोजन के दौरान वैश्विक समुद्री सुरक्षा स्थिति आकलन और दृष्टिकोण (2025-2026) रिपोर्ट और संयुक्त रूप से समुद्री सुरक्षा की रक्षा और नीले भविष्य का निर्माण पहल जारी की गई, जिससे समुद्री अवधारणाओं का प्रसार हुआ और विभिन्न तरीकों से सहयोग पर आम सहमति बनी।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत और मिस्र के बीच पहली नौसेना-स्तरीय स्टाफ वार्ता, समुद्री रक्षा संबंधों की मजबूती का अहम कदम
काहिरा, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि भारत और मिस्र की नौसेनाओं के बीच पहली बार नौसेना-से-नौसेना स्टाफ वार्ता (एनएनएसटी) काहिरा में आयोजित की गई। यह बैठक भारत-मिस्र संयुक्त रक्षा समिति (जेडीसी) की 11वीं बैठक के दौरान हुई।
इस बातचीत को भारतीय दूतावास ने समुद्री सहयोग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। दोनों देशों के बीच हुई इस बातचीत में ऑपरेशनल तालमेल, संयुक्त प्रशिक्षण, समुद्री क्षेत्र की जानकारी और नौसेना तकनीक और जहाज निर्माण में सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा हुई।
समुद्री सहयोग भारत और मिस्र के रक्षा संबंधों का एक अहम हिस्सा रहा है। यह बैठक दोनों देशों के बीच नौसैनिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
इससे पहले इसी हफ्ते काहिरा में हुई जेडीसी बैठक में भी दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को बढ़ाने पर अच्छी और उपयोगी चर्चा की थी। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संयुक्त सचिव (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) अमिताभ प्रसाद ने किया। इसमें रक्षा मंत्रालय और सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। वहीं मिस्र की तरफ से रक्षा मंत्रालय और सेना के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
दोनों पक्षों ने पिछली बैठक के बाद हुई प्रगति की समीक्षा की और आगे के लिए एक रोडमैप तय किया। इसमें 2026-27 के लिए रक्षा सहयोग योजना पर सहमति बनी, जिसमें कई चीजें शामिल हैं। जैसे सैन्य स्तर पर अधिक संरचित बातचीत, संयुक्त प्रशिक्षण बढ़ाना, समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना, सैन्य अभ्यासों का दायरा और जटिलता बढ़ाना, और रक्षा उत्पादन और तकनीक में साझेदारी बढ़ाना।
भारतीय पक्ष ने अपने तेजी से बढ़ते रक्षा उत्पादन क्षेत्र की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि भारत का रक्षा उत्पादन 20 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा हो चुका है और भारत लगभग चार अरब डॉलर के रक्षा उत्पाद 100 से अधिक देशों को निर्यात कर रहा है।
दोनों देशों ने मिलकर रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इसमें संयुक्त रूप से रक्षा उपकरणों का विकास और उत्पादन करने की संभावनाओं पर काम करने की बात हुई। रक्षा क्षेत्र में उद्योग सहयोग अब भारत और मिस्र के रिश्तों का एक अहम हिस्सा बनता जा रहा है।
--आईएएनएस
एवाई/डीएससी
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