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यूपी के आध्यात्मिक पर्यटन को गति देगा ये एक्सप्रेसवे, कनेक्ट होंगे आस्था के ये प्रमुख केंद्र
UP News: योगी सरकार के राज्य में शिक्षा, रोजगार और विकास की तमाम योजनाएं चला रही है. इसके साथ ही आध्यात्मिक पर्यटन को और मजबूत करने की दिशा में भी सरकार काम कर रही है. यूपी में बन रहे गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए भी योगी सरकार राज्य में आध्यात्मिक पर्यटन को नई गति देने जा रही है.
दरअसल, योगी सरकार की ओर से जारी एक प्रेस नोट में कहा गया है कि गंगा एक्सप्रेस-वे का सबसे बड़ा योगदान यह होगा कि यह उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहे पांच प्रमुख स्पिरिचुअल कॉरिडोर को मजबूत आधार देगा. इन कॉरिडोरों का उद्देश्य राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों को एक व्यवस्थित धार्मिक पर्यटन नेटवर्क के रूप में आपस में जोड़ना है. जिससे श्रद्धालु एक ही यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों के दर्शन कर सकेंगे.
आसान होगी तीर्थ स्थलों पर पहुंच
बता दें कि गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक बनाया जा रहा है. इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से प्रदेश के कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल आपस में जुड़ जाएंगे. इनमें गढ़मुक्तेश्वर के साथ-साथ कल्कि धाम, बेल्हा देवी धाम, चंद्रिका देवी शक्ति पीठ और त्रिवेणी संगम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल शामिल हैं. इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से इन सभी तीर्थ स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी. इन तीर्थ स्थलों पर हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं.
इस दिशा में प्रयागराज-विंध्याचल-काशी कॉरिडोर भी अहम भूमिका निभाएगा. त्रिवेणी संगम से विंध्याचल देवी धाम और उससे आगे काशी तक की यात्रा भा सुगम हो जाएगी. इस कॉरिडोर से शक्ति और शिव के प्रमुख तीर्थ स्थल जुड़ जाएंगे. जिससे ये धार्मिक पर्यटन का एक शक्तिशाली मार्ग बन सकता है.
प्रयागराज-अयोध्या-गोरखपुर कॉरिडोर
इसके साथ ही प्रयागराज-अयोध्या-गोरखपुर कॉरिडोर से रामभक्ति से जुड़े प्रमुख स्थलों को जोड़ता है. प्रयागराज के संगम से अयोध्या में रामलला के दर्शन और उससे आगे गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर तक पहुंच अब आसान हो जाएगी. यह मार्ग रामायण परंपरा से जुड़े तीर्थों को एक मजबूत धार्मिक सर्किट के रूप में पहचान मिलेगी. जबकि प्रयागराज-लखनऊ-नैमिषारण्य कॉरिडोर भी आध्यात्मिक तौर से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. ये कॉरिडोर नैमिषारण्य को जोड़ता है जो एक पवित्र स्थान है. जहां 88 हजार ऋषियों ने तपस्या की थी. इसके साथ ही यहां कई पुराणों का वाचन भी हुआ है. बेहतर सड़क संपर्क के चलते यह क्षेत्र भी आध्यात्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाएगा.
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प्रयागराज-राजापुर-चित्रकूट कॉरिडोर का महत्व
वहीं रामायण से जुड़े स्थलों को जोड़ने वाला प्रयागराज-राजापुर-चित्रकूट कॉरिडोर भी गंगा एक्सप्रेस-वे के बनने से नई रफ्तार पाएगा. ये राजापुर यानी गोस्वामी तुलसीदास की जन्मभूमि है और चित्रकूट तक का मार्ग भक्तों को भगवान राम के वनवास से जुड़े पवित्र स्थलों के दर्शन कराएगा. साथ ही प्रयागराज-मथुरा-वृंदावन-शुक तीर्थ कॉरिडोर कृष्ण भक्ति से जुड़े प्रमुख स्थलों को आपस में जोड़ेगा. बता दें कि मथुरा और वृंदावन पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन केंद्र रहे हैं. लेकिन बेहतर कनेक्टिविटी होने की वजह से यहां भी आने वाले दिनों में देशी और विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या में और इजाफा हो सकता है.
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