सुरों के 'उस्ताद' बड़े गुलाम अली खां ने उमराव जान के एक गाने के लिए ली थी 25 हजार फीस
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। याद पिया की आए...आए ना बलम...नैना मोरे तारास गाये...जैसे गीतों को गाकर अमर कर देने वाले उस्ताद बड़े गुलाम अली खां भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास में एक ऐसा नाम है जिन्होंने श्रोताओं के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। वे पटियाला घराने के महान प्रतिनिधि थे और अपनी विलक्षण आवाज, अद्भुत तानों तथा भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए जाने जाते थे। 25 अप्रैल 1968 को बड़े गुलाम अली खां का निधन हो गया था लेकिन उनके गाने आज भी लोगों को पसंद आते हैं।
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